Hockey World Cup: ऑस्ट्रेलिया से 0-0 ड्रॉ के बाद टूटा भारत का सेमीफाइनल का सपना, कहां चूकी टीम?
भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया हॉकी वर्ल्ड कप मैच (फोटो- सोशल मीडिया)
भारतीय महिला हॉकी टीम का FIH वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में पहुंचने का सपना ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के साथ टूट गया. निर्णायक मुकाबले में टीम एक भी गोल नहीं कर सकी और टाई-ब्रेकर में पिछड़ गई. जानें भारत के समीफाइनल से बाहर होने का कारण
FIH Women's Hockey World Cup 2026: भारतीय महिला हॉकी टीम का सेमीफाइनल में पहुंचने का सपना ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के साथ टूट गया. अम्स्टेलवीन में खेले गए करो या मरो के मुकाबले में भारत को हर हाल में जीत की जरूरत थी, लेकिन टीम 60 मिनट में एक भी गोल नहीं कर सकी. दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया के लिए ड्रॉ ही सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए पर्याप्त था.
महिला हॉकी वर्ल्ड कप में भारत का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रहा. टीम ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 6-1 की शानदार जीत दर्ज की, लेकिन इसके बाद गोल के लिए संघर्ष करती नजर आई. चीन के खिलाफ 2-2, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 0-0 का ड्रॉ खेलने के बाद भारत को नीदरलैंड्स से 0-2 की हार झेलनी पड़ी. खास बात यह रही कि पहले राउंड में 8 गोल करने वाली भारतीय टीम दूसरे राउंड के अपने दोनों मैचों में एक भी गोल नहीं कर सकी.
भारत के विश्व कप अभियान का रिपोर्ट कार्ड
| मुकाबला | नतीजा | भारत के गोल | क्या मिला? |
| चीन | 2-2 ड्रॉ | 2 | 1 अंक |
| दक्षिण अफ्रीका | 6-1 जीत | 6 | 3 अंक |
| इंग्लैंड | 0-0 ड्रॉ | 0 | 1 अंक |
| नीदरलैंड्स | 0-2 हार | 0 | 0 अंक |
| ऑस्ट्रेलिया | 0-0 ड्रॉ | 0 | 1 अंक |
करो या मरो मुकाबले में भारतीय महिला टीम नहीं कर सकी एक भी गोल
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबला भारत के लिए करो या मरो का था. सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए भारतीय टीम को हर हाल में जीत दर्ज करनी थी, जबकि ऑस्ट्रेलिया को सिर्फ हार से बचना था. भारत को मुकाबले में पेनल्टी कॉर्नर के मौके मिले, लेकिन टीम उन्हें गोल में नहीं बदल सकी. आखिरी मिनटों में भारतीय हमलों का दबाव बढ़ा, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई डिफेंस ने हर कोशिश को नाकाम कर दिया. आखिरकार मुकाबला 0-0 पर खत्म हुआ और भारत की सेमीफाइनल की उम्मीद भी खत्म हो गई.
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बराबर अंक और गोल अंतर के बावजूद भारत से आगे कैसे निकला ऑस्ट्रेलिया?
पूल ई में ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों के खाते में 2-2 अंक थे और दोनों का गोल अंतर भी -2 था. इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया दूसरे स्थान पर रहा. वजह थी उसके अधिक गोल. ऑस्ट्रेलिया ने तीन गोल किए थे, जबकि भारत के खाते में दो गोल थे. ऐसे में टाई-ब्रेकर की स्थिति में ऑस्ट्रेलिया भारत से आगे रहा और उसे सेमीफाइनल का टिकट मिल गया.
पूल ई का पॉइंट्स टेबल
| टीम | मैच | जीत | ड्रॉ | हार | गोल | गोल अंतर | अंक |
| नीदरलैंड्स | 3 | 3 | 0 | 0 | 10-3 | +7 | 9 |
| ऑस्ट्रेलिया | 3 | 0 | 2 | 1 | 3-5 | -2 | 2 |
| भारत | 3 | 0 | 2 | 1 | 2-4 | -2 | 2 |
| चीन | 3 | 0 | 2 | 1 | 4-7 | -3 | 2 |
पूल ई से शीर्ष दो टीमों को सेमीफाइनल में जाना था. नीदरलैंड्स पहले ही जगह बना चुका था, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने भारत को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान हासिल किया.
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तो आखिर कहां चूका भारत?
1. निर्णायक मैचों में फिनिशिंग कमजोर रही
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत ने छह गोल किए, लेकिन चीन के खिलाफ दो, इंग्लैंड के खिलाफ शून्य, नीदरलैंड्स के खिलाफ शून्य और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी शून्य गोल आए. टूर्नामेंट के निर्णायक मुकाबलों में भारत की सबसे बड़ी समस्या फिनिशिंग रही. इंग्लैंड, नीदरलैंड्स और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम एक भी गोल नहीं कर सकी.
2. नीदरलैंड्स के खिलाफ हार ने दबाव बढ़ा दिया
नीदरलैंड्स के खिलाफ 0-2 की हार ने भारत को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जहां ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत जरूरी हो गई थी. दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया को पता था कि ड्रॉ भी उसे सेमीफाइनल में पहुंचा देगा.
3. पेनल्टी कॉर्नर का पूरा फायदा नहीं उठा पाया भारत
भारत के कोच स्जोर्ड मारिज्ने ने ऑस्ट्रेलिया से पहले खुद माना था कि टीम को बड़े मुकाबलों में मिले मौकों को गोल में बदलना होगा और पेनल्टी कॉर्नर की फिनिशिंग बेहतर करनी होगी. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यही समस्या निर्णायक साबित हुई.
4. दूसरे राउंड में गोल का सूखा
भारत ने पहले राउंड के तीन मैचों में 8 गोल किए, लेकिन दूसरे राउंड में नीदरलैंड्स और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम का खाता नहीं खुल सका. यही गोल का सूखा अंत में भारत के सेमीफाइनल के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बना.
एक गोल की कमी ने बदल दी पूरी कहानी
भारत के अभियान में कुछ सकारात्मक पहलू जरूर रहे. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 6-1 की जीत और इंग्लैंड के खिलाफ क्लीन शीट टीम की क्षमता दिखाती है. लेकिन टूर्नामेंट के निर्णायक दौर में गोल नहीं कर पाना भारत पर भारी पड़ा.
पहले राउंड में 8 गोल करने वाली टीम दूसरे राउंड में एक भी गोल नहीं कर सकी. नीदरलैंड्स के खिलाफ हार ने मुश्किलें बढ़ाईं और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ ने सेमीफाइनल का दरवाजा बंद कर दिया. बराबर अंक और गोल अंतर के बावजूद ऑस्ट्रेलिया के ज्यादा गोल उसे आगे ले गए. इस तरह भारत का विश्व कप अभियान एक ऐसे मैच में खत्म हुआ, जिसमें उसे जीत चाहिए थी, लेकिन टीम गोल नहीं कर सकी.
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