दहेज की प्रताड़ना, आया की नौकरी... जानें कौन हैं कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड दिलाने वाली शर्मीला धनखड़

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शर्मिला धनखड़ (फोटो—एक्स)

शर्मिला धनखड़ (फोटो—एक्स)

दो साल की उम्र में पोलियो, दहेज प्रताड़ना और आया की नौकरी... इन सब से लड़कर शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीता है. यह सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी सफलता है.

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Sharmila Dhankhar: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की पैरा एथलीट शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं की शॉट पुट F57 स्पर्धा में 9.81 मीटर का सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बन गईं. उनकी इस उपलब्धि ने भारत का पैरा एथलेटिक्स में 20 साल का पदक इंतजार भी खत्म कर दिया. लेकिन यह गोल्ड मेडल सिर्फ खेल की जीत नहीं, बल्कि जिंदगी से लड़कर हासिल की गई सबसे बड़ी सफलता भी है.

दो साल की उम्र में पोलियो

15 अगस्त 1986 को हरियाणा के रेवाड़ी जिले के चित्रौली गांव में जन्मीं शर्मिला धनखड़ बेहद साधारण परिवार से हैं. दो साल की उम्र में तेज बुखार के बाद उन्हें पोलियो हो गया, जिससे उनका एक पैर प्रभावित हो गया. किसान पिता और नेत्रहीन मां के बीच आर्थिक तंगी में उनका बचपन बीता. बेहतर इलाज तक नहीं मिल सका, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

घरेलू हिंसा और टूटा पहला रिश्ता

कम उम्र में उनकी पहली शादी हुई, लेकिन ससुराल में उन्हें दहेज के लिए वर्षों तक प्रताड़ित किया गया. घरेलू हिंसा झेलनी पड़ी. 26 साल की उम्र में पति ने उन्हें घर से निकाल दिया. तब तक उनकी दो बेटियां हो चुकी थीं. मजबूरी में वह दोनों बेटियों को लेकर मायके लौट आईं.

पेट पालने के लिए किया आया का काम

पति से अलग होने के बाद शर्मिला ने परिवार का बोझ न बनने का फैसला किया. दो बेटियों की परवरिश के लिए उन्होंने आया (केयरगिवर) का काम किया और छोटे-मोटे रोजगार कर परिवार चलाया. कई बार हालात इतने मुश्किल हुए कि उन्होंने जिंदगी से हार मानने तक का सोच लिया, लेकिन उनकी बेटियों ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी.

दूसरी शादी ने बदली जिंदगी

28 साल की उम्र में उन्होंने अजीत सिंह से दूसरी शादी की. अजीत ने उन्हें पैरा एथलेटिक्स में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया. रिश्तेदार और कोच टेकचंद के मार्गदर्शन में उन्होंने 34 साल की उम्र में शॉट पुट की ट्रेनिंग शुरू की. शुरुआत में उनका थ्रो सिर्फ 5 मीटर था, लेकिन लगातार मेहनत से उन्होंने एक साल के भीतर राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ नेशनल चैंपियनशिप का गोल्ड जीत लिया.

बर्मिंघम में चूकीं, ग्लासगो में चमका गोल्ड

बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में शर्मिला चौथे स्थान पर रह गई थीं और पदक से मामूली अंतर से चूक गई थीं. इसके बाद उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार किया. 2025 इंडियन ओपन पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड जीता, दुबई फज्जा इंटरनेशनल में गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए और अब ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 9.81 मीटर का थ्रो कर देश को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026, ग्लासगो में दूसरा गोल्ड मेडल दिलाया. इस उपलब्धि पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उन्हें बधाई दी.

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Abhijeet Kumar

लेखक के बारे में

By Abhijeet Kumar

अभिजीत कुमार पत्रकारिता जगत में दो वर्षों का अनुभव रखने वाले युवा पत्रकार हैं. उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), ढेंकानाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. अपने पेशेवर सफर में उन्होंने रिपोर्टिंग, सब-एडिटिंग, पेज डिजाइन और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में कार्य किया है. वर्तमान में वह प्रभात खबर के स्पोर्ट्स डेस्क में कार्यरत हैं, जहां खेल जगत से जुड़ी खबरों के संपादन, लेखन और प्रस्तुतीकरण की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

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