BCCI Central Contract Rules: Central Contract चाहिए तो टीम को देना होगा ज्यादा वक्त? BCCI ला सकता है नया नियम
टीम इंडिया (एक्स)
BCCI Central Contract Rules: BCCI सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट नियमों में बदलाव पर विचार कर रहा है. जानिए खिलाड़ियों की पूरे सीजन उपलब्धता को कैसे मिलेगी अहमियत. क्या होगा नया नियम?
BCCI Central Contract Rules: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े नियमों में बदलाव पर विचार कर रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड अगले सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के लिए खिलाड़ियों की पूरे सीजन उपलब्धता को भी एक अतिरिक्त मानदंड बनाने पर चर्चा कर रहा है. हालांकि, अभी इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो खिलाड़ियों के लिए सिर्फ मैदान पर प्रदर्शन और टीम में योगदान ही पर्याप्त नहीं होगा. यह भी देखा जा सकता है कि खिलाड़ी पूरे सीजन में चयन के लिए कितने समय तक उपलब्ध रहा और कितने मैचों में उसके चयन पर विचार किया जा सका.
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क्या है BCCI का नया प्रस्ताव?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, BCCI खिलाड़ियों की पूरे सीजन की उपलब्धता को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के लिए पात्रता के एक अतिरिक्त आधार के रूप में शामिल करने पर विचार कर रहा है. इसके तहत बोर्ड यह तय कर सकता है कि किसी खिलाड़ी को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के लिए योग्य होने के लिए न्यूनतम संख्या में मैचों के लिए उपलब्ध रहना होगा या एक तय प्रतिशत की उपलब्धता बनाए रखनी होगी. हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि उपलब्धता की न्यूनतम सीमा कितनी होगी. यह भी स्पष्ट नहीं है कि इसकी गणना कुल मैचों की संख्या के आधार पर होगी या उपलब्धता के प्रतिशत के आधार पर.
चोटिल खिलाड़ियों के लिए क्या होगा नियम?
इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल चोटिल खिलाड़ियों को लेकर है. कई बार खिलाड़ी टीम का हिस्सा बनने के बावजूद चोट के कारण लंबे समय तक मैदान से बाहर रहते हैं. ऐसे में अगर उपलब्धता को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की पात्रता से जोड़ा जाता है, तो चोट के कारण बाहर रहने वाले खिलाड़ियों के लिए अलग नियम की जरूरत पड़ सकती है.
यह भी तय करना होगा कि गंभीर चोट, रिहैबिलिटेशन या मेडिकल कारणों से अनुपलब्ध रहने वाले खिलाड़ियों की अवधि को उपलब्धता की गणना में शामिल किया जाएगा या नहीं. फिलहाल BCCI ने इस संबंध में कोई अंतिम फॉर्मूला घोषित नहीं किया है.
प्रदर्शन के साथ उपलब्धता भी होगी अहम?
अगर BCCI इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के आकलन में प्रदर्शन के साथ उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर बन सकती है.
इसका मतलब यह नहीं होगा कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन की अहमियत कम हो जाएगी. बल्कि बोर्ड उपलब्धता को एक अतिरिक्त मानदंड के रूप में इस्तेमाल कर सकता है, ताकि लंबे सीजन के दौरान टीम के लिए नियमित रूप से उपलब्ध रहने वाले खिलाड़ियों को भी महत्व दिया जा सके.

आराम दिए जाने वाले खिलाड़ियों पर भी उठेगा सवाल
उपलब्धता की शर्त लागू करने से पहले BCCI को यह भी स्पष्ट करना होगा कि आराम दिए गए खिलाड़ियों का आकलन कैसे किया जाएगा. अगर किसी खिलाड़ी को टीम मैनेजमेंट या चयनकर्ताओं की योजना के तहत आराम दिया जाता है, तो उसे अनुपलब्ध माना जाएगा या नहीं, यह भी नियम का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा. इसी तरह, किसी विशेष सीरीज से बाहर रखे गए खिलाड़ी और खुद चयन के लिए उपलब्ध नहीं रहने वाले खिलाड़ी के बीच भी अंतर करना पड़ सकता है.
अभी BCCI ने नहीं किया अंतिम फैसला
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव और चर्चा का विषय है. BCCI ने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के लिए उपलब्धता को अनिवार्य शर्त बनाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. बोर्ड को अंतिम फैसला लेने से पहले न्यूनतम उपलब्धता, चोट, आराम, चयन और अन्य विशेष परिस्थितियों से जुड़े नियम तय करने होंगे.
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो आने वाले सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में खिलाड़ियों के प्रदर्शन, फिटनेस और टीम के लिए उपलब्धता, तीनों को पहले से ज्यादा महत्व मिल सकता है. फिलहाल, खिलाड़ियों के लिए उपलब्धता को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की अनिवार्य शर्त मानना जल्दबाजी होगी, क्योंकि BCCI की ओर से इस पर अंतिम निर्णय आना बाकी है.
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