34 साल पुराने जेपी अत्रे टूर्नामेंट का अंत, क्या बढ़ते क्रिकेट कैलेंडर में घरेलू क्रिकेट की जगह घट रही है?

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PCA Colts की टीम 2024 में बनी थी चैंपियन फोटो—एक्स

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34 साल पुराना जेपी अत्रे क्रिकेट टूर्नामेंट अब बंद हो गया है. बढ़ते अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट कैलेंडर के दबाव ने इस अहम टूर्नामेंट के सफर को खत्म कर दिया है.

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JP Atray cricket tournament: भारतीय क्रिकेट इस समय प्रतिभा और व्यस्तता, दोनों के दौर से गुजर रहा है. टीम इंडिया के पास लगभग हर फॉर्मेट में विकल्पों की कमी नहीं है. घरेलू क्रिकेट लगातार नए खिलाड़ियों को सामने ला रहा है और आईपीएल ने इस प्रतिभा को दुनिया के सामने पहुंचाने का रास्ता भी खोल दिया है. लेकिन इसी तस्वीर का दूसरा पहलू भी है.

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34 साल पुराने ऑल इंडिया जेपी अत्रे क्रिकेट टूर्नामेंट का सफर अब खत्म हो गया है. 1992 में शुरू हुआ यह 50 ओवर का टूर्नामेंट लंबे समय तक भारतीय घरेलू क्रिकेट के प्री-सीजन कैलेंडर का अहम हिस्सा रहा. टूर्नामेंट के आयोजकों और अत्रे परिवार ने इसे बंद करने का फैसला लिया है. इसकी प्रमुख वजह लगातार व्यस्त होता क्रिकेट कैलेंडर बताई गई है.

34 साल पुराने टूर्नामेंट के बंद होने के कई कारण

जेपी अत्रे टूर्नामेंट की शुरुआत ऐसे समय में हुई थी, जब घरेलू क्रिकेट का कैलेंडर आज की तुलना में काफी सीमित था. 50 ओवर का यह टूर्नामेंट खिलाड़ियों के लिए सीजन से पहले अपनी लय हासिल करने और चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने का महत्वपूर्ण मौका था. लेकिन अब क्रिकेट का पूरा ढांचा बदल चुका है. इंटरनेशनल क्रिकेट के मुकाबले बढ़े हैं. आईपीएल के आने के बाद फ्रेंचाइजी क्रिकेट का प्रभाव तेजी से बढ़ा है. इसके अलावा अलग-अलग राज्यों और फ्रेंचाइजियों की टी20 प्रतियोगिताओं ने भी खिलाड़ियों के कैलेंडर में नई जगह बना ली है.

जेपी अत्रे टूर्नामेंट के आयोजकों के मुताबिक, शीर्ष खिलाड़ियों की उपलब्धता लगातार मुश्किल होती जा रही थी. बढ़ते अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कार्यक्रम के साथ टी20 क्रिकेट और राज्य स्तरीय लीग के विस्तार ने भी कैलेंडर पर दबाव बढ़ाया. टूर्नामेंट के आयोजन के लिए मैदानों की उपलब्धता भी एक चुनौती बन गई थी.

भारतीय क्रिकेट का कैलेंडर इतना व्यस्त कैसे हुआ?

भारतीय क्रिकेट का मौजूदा घरेलू ढांचा अपने आप में बहुत बड़ा है. BCCI के 2026-27 घरेलू सीजन में पुरुष और महिला क्रिकेट के अलग-अलग आयु वर्गों और फॉर्मेट को मिलाकर 1,788 मैच निर्धारित हैं. पुरुष क्रिकेट में सीनियर से लेकर अंडर-16 तक और महिला क्रिकेट में सीनियर से लेकर अंडर-15 तक प्रतियोगिताएं शामिल हैं. सीनियर पुरुष क्रिकेट में दलीप ट्रॉफी के बाद ईरानी कप, रणजी ट्रॉफी, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट आते हैं. यानी घरेलू खिलाड़ियों के लिए भी एक लंबा और लगातार चलता हुआ कार्यक्रम मौजूद है.

इसके समानांतर टीम इंडिया का अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम भी कम नहीं है. BCCI के मुताबिक 2026-27 के घरेलू अंतरराष्ट्रीय सीजन में भारत 17 शहरों में कुल 22 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलेगा. वेस्टइंडीज, श्रीलंका, जिम्बाब्वे और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बहु-फॉर्मेट सीरीज कार्यक्रम का हिस्सा हैं. और इसके बीच आईपीएल जैसी बड़ी फ्रेंचाइजी लीग है. इसके अलावा विदेशी टी20 लीग और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत ट्रेनिंग तथा आराम का समय भी कैलेंडर में जगह मांगता है. यही वह बिंदु है जहां जेपी अत्रे जैसे टूर्नामेंट के सामने सबसे बड़ी चुनौती आती है. अगर शीर्ष खिलाड़ी उपलब्ध नहीं हैं, तो प्रतियोगिता का आकर्षण और प्रतिस्पर्धात्मक स्तर दोनों प्रभावित होते हैं.

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छोटे घरेलू टूर्नामेंट युवा खिलाड़ियों के लिए जरूरी

बड़े घरेलू टूर्नामेंटों की अपनी जगह है, लेकिन छोटे और आमंत्रण आधारित टूर्नामेंटों का महत्व अलग होता है. जेपी अत्रे टूर्नामेंट इसका अच्छा उदाहरण है. 34 साल के सफर में इसमें कई ऐसे खिलाड़ी खेले, जिन्होंने आगे चलकर भारत का प्रतिनिधित्व किया. आयोजकों के अनुसार, करीब 140 प्रतिभागी बाद में भारतीय टीम तक पहुंचे.

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युवा खिलाड़ी के लिए ऐसे टूर्नामेंट सिर्फ रन या विकेट जुटाने का माध्यम नहीं होते. यह बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने, अलग परिस्थितियों में खुद को परखने और चयनकर्ताओं की नजर में आने का अवसर भी देते हैं. घरेलू क्रिकेट की सबसे बड़ी ताकत यही है कि राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने से पहले खिलाड़ी को प्रतिस्पर्धी क्रिकेट का पर्याप्त अनुभव मिलता है. अगर कैलेंडर में ऐसी प्रतियोगिताओं की संख्या लगातार घटती है, तो सवाल सिर्फ मैचों की संख्या का नहीं होगा. सवाल प्रतिभा की पहचान के रास्तों का भी होगा.

एशियन गेम्स से पहले बदल सकता है भारतीय क्रिकेट का मॉडल

इस बहस को समझने के लिए 2026 एशियन गेम्स भी अहम उदाहरण है. जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स में क्रिकेट की वापसी हुई है. भारत पुरुष और महिला, दोनों वर्गों में डिफेंडिंग चैंपियन है. पुरुष क्रिकेट का फाइनल 3 अक्टूबर को होना है. भारत के लिए यह टूर्नामेंट सिर्फ एक और प्रतियोगिता नहीं है. एशियन गेम्स के दौरान अलग टीम को तैयार करना, खिलाड़ियों को आराम देना और नए चेहरों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव देना चयन और वर्कलोड मैनेजमेंट का हिस्सा बन सकता है. लेकिन इसकी कीमत घरेलू क्रिकेट को नहीं चुकानी चाहिए.

सितंबर के आखिर से भारत का घरेलू अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम भी शुरू हो रहा है. वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन वनडे और पांच टी20 मैच 27 सितंबर से 17 अक्टूबर के बीच निर्धारित हैं. इसका मतलब है कि एशियन गेम्स और भारत के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के बीच समय का अंतर काफी कम है. ऐसे में भारतीय क्रिकेट को यह तय करना होगा कि किस खिलाड़ी को किस फॉर्मेट में प्राथमिकता दी जाए और किसे आराम दिया जाए.

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