विभुवन संकष्टी पर जरूर पढ़ें यह व्रत कथा, बप्पा करेंगे हर संकट दूर

भगवान गणेश
Vibhuvan Sankashti 2026: विभुवन संकष्टी का पावन पर्व विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित है. इस दिन भक्त भगवान गणेश की श्रद्धा और भक्ति के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं तथा व्रत रखते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. कहा जाता है कि कथा पाठ से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और साधक को पूजा-व्रत का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है.
Vibhuvan Sankashti 2026: अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ने वाले संकष्टी व्रत को विभुवन संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. यह पर्व प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार भगवान विष्णु को समर्पित पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के दौरान आता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने और व्रत कथा का पाठ करने से जीवन के बड़े-बड़े संकट, दरिद्रता तथा मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं. विभुवन संकष्टी से जुड़ी कई प्रचलित कथाएं हैं. इनमें से एक प्रसिद्ध कथा का वर्णन इस लेख में किया गया है.
पौराणिक कथा
महर्षि वेद व्यास ने द्रौपदी को सुनाई कथा
इस पावन व्रत की महिमा का वर्णन द्वापर युग में मिलता है. जब कुरुवंश के महान ऋषि महर्षि वेद व्यास पांडवों से मिलने उनके वनवास के दौरान पहुंचे, तब द्रौपदी अपने अपमान और दुखों से अत्यंत व्यथित थीं. उन्होंने महर्षि व्यास से पूछा, “हे मुनिवर! मैंने ऐसा कौन-सा कर्म किया था, जिसके कारण मुझे इस जन्म में इतना अपमान और कष्ट सहना पड़ रहा है?” द्रौपदी की शंका दूर करने के लिए महर्षि वेद व्यास ने उन्हें राजा चंद्रसेन और रानी रत्नावली की कथा सुनाई.
राजा चंद्रसेन का छिन गया सब कुछ
ऋषि व्यास ने बताया कि सतयुग में राजा चंद्रसेन अपनी पत्नी रत्नावली के साथ एक समृद्ध और सुखी राज्य का शासन करते थे. उनकी प्रजा खुशहाल थी और राज्य में धर्म का बोलबाला था. लेकिन उनकी समृद्धि से ईर्ष्या रखने वाले पड़ोसी राजाओं ने अचानक उनके राज्य पर आक्रमण कर दिया.युद्ध में पराजित होने के बाद राजा चंद्रसेन और रानी रत्नावली को अपना राज्य छोड़कर घने जंगलों में शरण लेनी पड़ी. उनका सारा वैभव और सम्मान उनसे छिन गया.
महर्षि मार्कंडेय का आश्रम
महल का सुख छोड़ने के बाद राजा और रानी भोजन और पानी के लिए भी संघर्ष करने लगे. एक दिन भूख-प्यास से व्याकुल होकर जंगल में भटकते हुए वे महर्षि मार्कंडेय के आश्रम पहुंचे. आश्रम के शांत और पवित्र वातावरण में प्रवेश करते ही उन्हें मानसिक शांति का अनुभव हुआ.दोनों ने महर्षि मार्कंडेय के चरणों में प्रणाम किया और अपने दुखों से मुक्ति का उपाय पूछा. राजा चंद्रसेन ने जानना चाहा कि आखिर उन्हें किस कर्म का फल भोगना पड़ रहा है.
पूर्व जन्म की भूल
त्रिकालदर्शी महर्षि मार्कंडेय ने ध्यान लगाकर राजा के पूर्व जन्म का रहस्य जाना और कहा,”हे राजन्! पूर्व जन्म में भी तुम एक प्रतापी राजा थे. एक बार शिकार के दौरान तुम जंगल में पहुंचे, जहां कुछ नाग-कन्याएं लाल वस्त्र धारण कर अधिक मास की संकष्टी चतुर्थी का व्रत कर रही थीं. उन्होंने बताया कि यह व्रत भगवान गणेश को प्रसन्न करने वाला है और इससे सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं.” महर्षि ने आगे कहा कि उस समय राजा ने भी यह व्रत करने का संकल्प लिया था, लेकिन महल लौटने के बाद वैभव, सत्ता और अहंकार के कारण वे अपना संकल्प भूल गए. भगवान गणेश को दिया गया वचन पूरा न करने और अहंकार में डूबे रहने के कारण उन्हें अगले जन्म में अनेक कष्टों का सामना करना पड़ा.
पश्चाताप से बदला भाग्य
महर्षि मार्कंडेय से अपने पूर्व जन्म की भूल जानकर राजा चंद्रसेन को गहरा पश्चाताप हुआ. उन्होंने संकल्प लिया कि अब वे इस गलती को नहीं दोहराएंगे.जब अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, अर्थात विभुवन संकष्टी चतुर्थी का दिन आया, तब राजा चंद्रसेन और रानी रत्नावली ने पूरे विधि-विधान, श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान गणेश का व्रत और पूजन किया. राजा-रानी की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर विघ्नहर्ता भगवान गणेश ने उन्हें आशीर्वाद दिया. उनके शत्रुओं का नाश हुआ और राजा चंद्रसेन को अपना खोया हुआ राज्य, वैभव, मान-सम्मान तथा सुख-समृद्धि पुनः प्राप्त हो गई. तभी से विभुवन संकष्टी चतुर्थी के व्रत को संकटों और दरिद्रता को दूर करने वाला अत्यंत फलदायी व्रत माना जाता है.
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By Neha Kumari
नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.
डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.
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