सावन की अंतिम सोमवारी आज: आयुष्मान योग में बरसेगी शिव-गौरी की कृपा, जानें पूजन विधि और मनोकामना पूर्ति के उपाय

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आयुष्मान और प्रीति योग में सावन की अंतिम सोमवारी

पवित्र सावन मास की अंतिम सोमवारी शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता गौरी की पूजा करने से भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त होती है. पूजा के बाद शिव पंचाक्षरी, शिव गायत्री और महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है.

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Sawan Last Somwar: सावन की अंतिम सोमवारी इस बार बेहद शुभ संयोग लेकर आई है. शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा, जलाभिषेक और विशेष उपायों से भक्त सुख-समृद्धि, आरोग्य, शांति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.

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पवित्र सावन मास की चौथी और अंतिम सोमवारी पर शिव भक्तों को भोलेनाथ के साथ माता गौरी की भी असीम कृपा मिलने की धार्मिक मान्यता है. इस दिन शिव-पार्वती के पृथ्वी पर विचरण करने की मान्यता के कारण पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है. भक्त मनोकामना पूर्ति और भगवान शिव की कृपा पाने के लिए घरों तथा शिवालयों में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करेंगे.

गंगाजल से पंचामृत तक चढ़ेगा प्रसाद

अंतिम सोमवारी के अवसर पर मंदिरों को फूलों, विभिन्न पत्रों और रंग-बिरंगी विद्युत रोशनी से भव्य रूप से सजाया गया है. भगवान शिव को गंगाजल, दूध, दही, पंचामृत, भस्म, बेलपत्र, भांग-धतूरा, आक, मधु और घी अर्पित किया जाएगा. दिनभर जलाभिषेक के बाद शाम को भव्य श्रृंगार पूजा होगी और श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद वितरित किया जाएगा.

अंतिम सोमवारी पर बन रहा कल्याणकारी संयोग

ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार सावन शुक्ल द्वादशी पर अंतिम सोमवारी के दिन पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के साथ प्रीति और आयुष्मान योग का संयोग बन रहा है. सुबह 08:57 बजे तक प्रीति योग और इसके बाद पूरे दिन आयुष्मान योग रहेगा. मान्यता है कि ऐसे शुभ संयोग में शिव आराधना करने से रोग, शोक, भय और ग्रहजनित बाधाओं से राहत मिलती है तथा सुख-समृद्धि के मार्ग खुलते हैं.

विधि-विधान से करें शिव-पार्वती का पूजन

सोमवारी पर शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश, कार्तिकेय, नंदी, शिव-पार्वती और चंद्रमा का पूजन करें. सबसे पहले शिवलिंग और गौरी प्रतिमा पर जल अर्पित करें. दूध में शहद मिलाकर अभिषेक करें. शिवलिंग पर बेलपत्र और माता गौरी को सफेद फूल चढ़ाएं. इसके बाद शिवलिंग पर चंदन से त्रिपुंड बनाएं और देवी गौरी को चंदन अर्पित करें. दूध से बनी मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद बांटें.

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मनोकामना के लिए करें विशेष उपाय

संतान प्राप्ति के लिए दूध-घी से अभिषेक और धतूरे का फूल, दीर्घायु के लिए आक का फूल तथा सर्वसुख के लिए हरसिंगार अर्पित करने की मान्यता है. शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए घी से अभिषेक कर कुसुम पुष्प चढ़ाएं. सुयोग्य जीवनसाथी के लिए बेला, मोक्ष के लिए आक, अलसी या शमीपत्र तथा लक्ष्मी प्राप्ति के लिए दूध व गन्ने के रस से अभिषेक कर शंखपुष्पी अर्पित करें.

धन, विवाह और मानसिक शांति के भी उपाय

वाहन सुख के लिए चमेली, धन-संपत्ति के लिए कमल व गुलाब, विवाह संबंधी बाधाओं के लिए बेला या अपराजिता का फूल अर्पित करना शुभ माना गया है. मानसिक शांति के लिए भांग एवं भस्म, पारिवारिक कलह दूर करने के लिए पीला कनेर या धतूरा तथा मनोकामना सिद्धि के लिए बेलपत्र, शमीपत्र और कनेर अर्पित करने की मान्यता है.

नंदी के कान में कहें अपनी मनोकामना

शिव-पार्वती पूजन के बाद भगवान शिव के प्रिय वाहन नंदी की पूजा अवश्य करें. धार्मिक मान्यता है कि नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहने से वह शीघ्र भगवान शिव तक पहुंचती है. नंदी को पुरुषार्थ, सरलता और सजगता का प्रतीक भी माना जाता है.

उमा-महेश्वर पूजा के शुभ मुहूर्त

  • अमृत काल: सुबह 05:28 से 07:04 बजे तक
  • शुभ योग: सुबह 08:40 से 10:16 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:26 से दोपहर 12:17 बजे तक
  • चर-लाभ-अमृत: दोपहर 01:28 से शाम 06:16 बजे तक
  • प्रदोष काल: शाम 06:16 से रात 08:38 बजे तक


पूजा के बाद करें इन मंत्रों का जाप

  • शिव पंचाक्षरी मंत्र— ॐ नमः शिवाय।
  • शिव गायत्री मंत्र— ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्।
  • लघु मृत्युंजय मंत्र— ॐ जूं सः।
  • इसके साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है।



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