आज गजानन संकष्टी चतुर्थी पर पढ़ें यह व्रत कथा, भगवान गणेश ने खुद बताया था संकट दूर करने का उपाय

Updated:
विज्ञापन
भगवान गणेश के सामने व्रत कथा का पाठ करते और सुनते हुए श्रद्धालुओं की तस्वीर (एआई)

भगवान गणेश के सामने व्रत कथा का पाठ करते और सुनते हुए श्रद्धालुओं की तस्वीर (एआई)

गजानन संकष्टी चतुर्थी के शुभ अवसर पर, भगवान गणेश की पौराणिक व्रत कथा का पाठ करें. जानें कैसे इस व्रत ने पांडवों के कष्टों को दूर किया और माता पार्वती की मनोकामना पूर्ण की.

विज्ञापन

Gajanana Sankashti Chaturthi 2026: श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को गजानन संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से जीवन के सभी विघ्न, संकट और बाधाएं दूर होती हैं. यदि आप आज गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रख रहे हैं, तो पूजा के समय इस पौराणिक व्रत कथा का पाठ अवश्य करें. मान्यता है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को इस व्रत की महिमा बताई थी.

गजानन संकष्टी चतुर्थी की पौराणिक व्रत कथा

महाभारत काल का प्रसंग

Image

पौराणिक कथा के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना समस्त राज्य हारकर वनवास भोग रहे थे, तब धर्मराज युधिष्ठिर अत्यंत दुखी और चिंतित थे. उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से विनम्रतापूर्वक कहा, "हे पुरुषोत्तम! कृपा करके ऐसा उपाय बताइए, जिससे हमारे सभी संकट दूर हों और भविष्य में हमें ऐसे कष्टों का सामना न करना पड़े." युधिष्ठिर की प्रार्थना सुनकर भगवान श्रीकृष्ण बोले, "हे राजन! मैं तुम्हें एक ऐसे सिद्ध और कल्याणकारी व्रत के बारे में बताता हूं, जो सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है."

माता पार्वती को भगवान गणेश ने बताया व्रत का विधान

Image

श्रीकृष्ण ने आगे बताया कि सतयुग में पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की. जब लंबे समय तक भगवान शिव प्रकट नहीं हुए, तब माता पार्वती ने देवर्षि नारद के कहने पर भगवान श्रीगणेश का स्मरण किया.

माता पार्वती के स्मरण करते ही विघ्नहर्ता भगवान गणेश प्रकट हुए. माता पार्वती ने उनसे कहा, "हे पुत्र! कठोर तपस्या के बाद भी मुझे शिवजी की प्राप्ति नहीं हुई. कृपया ऐसा व्रत बताइए, जिससे मेरी मनोकामना पूर्ण हो सके." तब भगवान गणेश ने कहा, "हे अचलसुते! श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाने वाला संकष्टी चतुर्थी व्रत सभी पापों और कष्टों का नाश करने वाला है. जो भक्त श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं."

संकष्टी चतुर्थी व्रत एवं पूजा विधि

Image

भगवान गणेश ने माता पार्वती को इस व्रत की विधि बताते हुए कहा

  • प्रातःकाल स्नान करके चंद्रोदय तक निराहार व्रत रखने का संकल्प लें.
  • संध्या के समय सफेद तिल मिले जल से स्नान करें.
  • सोने, चांदी, तांबे अथवा मिट्टी के कलश में जल भरकर उस पर वस्त्र बिछाएं और अष्टदल कमल बनाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें.
  • भगवान गणेश का षोडशोपचार पूजन करें तथा पाद्य, अर्घ्य, आचमन, वस्त्र, यज्ञोपवीत, रोली, चंदन, दूर्वा, धूप, दीप और मोदक या लड्डू का भोग अर्पित करें.
  • शुद्ध घी से बने 15 मोदक या लड्डू तैयार करें.
  • इनमें से 5 लड्डू भगवान गणेश को अर्पित करें, 5 योग्य ब्राह्मण को दान दें और शेष 5 प्रसाद के रूप में परिवार के साथ ग्रहण करें.

चंद्रदेव को अर्घ्य देने का विधान

चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को जल, दूध और अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें. अर्घ्य अर्पित करते समय प्रार्थना करें "हे क्षीरसागर से उत्पन्न, माता लक्ष्मी के भ्राता और रोहिणी के पति चंद्रदेव! मेरे द्वारा अर्पित इस अर्घ्य को स्वीकार करें तथा मेरे जीवन के सभी कष्टों का नाश करें." इसके बाद भगवान गणेश से क्षमा प्रार्थना करें, ब्राह्मणों को दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें और दही तथा भोग ग्रहण करके व्रत का पारण करें.

व्रत की अवधि और उद्यापन का महत्व

भगवान गणेश ने माता पार्वती से कहा कि यदि कोई व्यक्ति जीवनभर यह व्रत न कर सके, तो कम से कम 21 वर्षों तक अथवा एक वर्ष तक प्रत्येक मास की संकष्टी चतुर्थी का व्रत अवश्य करे. यदि यह भी संभव न हो, तो केवल श्रावण मास की गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत विधि-विधान से करने और उसका उद्यापन करने से भी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है.

यह भी पढ़ें: इस साल कब मनाई जाएगी सावन शिवरात्रि, जानें किस सामग्री से करें पूजा और क्या मिलेगा फल?


विज्ञापन
नेहा कुमारी

लेखक के बारे में

By नेहा कुमारी

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola