Desi Ghee Diya: पूजा में दीपक के नीचे क्यों रखा जाता है अनाज? जानें किस धातु के दीये से दूर होगी ग्रहों की पीड़ा और बढ़ेगा धन
देसी घी के दीपक का धार्मिक महत्व
Desi Ghee Diya: ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में दीपक को सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का प्रतीक माना गया है. जानिए किस देवता के लिए कितनी बत्तियां, कौन सा तेल और किस धातु का दीपक शुभ माना जाता है, साथ ही दीपक के नीचे अनाज रखने का महत्व.
Desi Ghee Diya: हिंदू धर्म में पूजा के दौरान दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि दीपक की ज्योति सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और देव कृपा का प्रतीक होती है.
देवताओं को प्रसन्न करने के लिए जलाएं देसी घी का दीपक
पूजा-पाठ में दीपक जलाना शुभ परंपराओं में शामिल है. पंडित पुरनेंदु पाठक के अनुसार धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान के सामने दीपक जलाते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है. दीपक जलाते समय श्रद्धापूर्वक मंत्र का जाप भी किया जाता है— “अग्नि ज्योतिः परं ब्रह्म, दीपो ज्योतिर्जनार्दनः, दीपो हरतु मे पापं, दीप ज्योतिः नमोऽस्तुते.”
दीपक को प्रकाश, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि देवताओं को प्रसन्न करने के लिए शुद्ध देसी घी का दीपक जलाना शुभ होता है. मां भगवती के लिए तिल के तेल और मौली की बाती का दीपक विशेष माना गया है. वहीं शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए सरसों और चमेली के तेल के दीपक का विधान बताया जाता है.
देवताओं के लिए कितनी बत्तियों का दीपक?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए बत्तियों की संख्या भी अलग बताई गई है. सूर्यदेव की पूजा में एक या सात बत्तियों, मां भगवती के लिए नौ बत्तियों तथा हनुमान जी और भगवान शिव की पूजा में पांच बत्तियों का दीपक जलाना शुभ माना जाता है.
अनुष्ठानों में पांच अलग-अलग धातुओं—सोना, चांदी, कांसा, तांबा और लोहा—से बने दीपकों का भी विशेष महत्व बताया गया है.
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दीपक के नीचे अनाज रखने की मान्यता
दीपक जलाते समय उसके नीचे सप्तधान्य रखने की परंपरा भी बताई गई है. मान्यता है कि इससे जीवन के कष्ट दूर होते हैं. नीचे गेहूं रखने से धन-धान्य की वृद्धि, जबकि चावल रखने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है. जलते दीपक में गुलाब की पंखुड़ी या लौंग रखने को भी शुभ माना जाता है.
सोने से लेकर लोहे तक के दीपक का महत्व
सोने का दीपक: इसे गेहूं के आसन पर रखकर गाय के शुद्ध घी से जलाने की परंपरा बताई गई है. मान्यता है कि इससे घर में उन्नति, धन और बुद्धि की वृद्धि होती है.
चांदी का दीपक: चावल के आसन पर सफेद फूलों के साथ स्थापित कर शुद्ध घी से जलाने का विधान बताया गया है. इससे सात्विक धन और समृद्धि बढ़ने की मान्यता है.
तांबे का दीपक: लाल मसूर के आसन पर दक्षिण दिशा में रखकर तिल के तेल से जलाने की परंपरा है. मान्यता है कि इससे मनोबल बढ़ता और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं.
कांसे का दीपक: चने की दाल के आसन पर उत्तर दिशा में रखकर तिल के तेल से जलाने का विधान बताया गया है. इससे धन की स्थिरता बनी रहने की मान्यता है.
लोहे का दीपक: उड़द दाल के आसन पर पश्चिम दिशा में सरसों के तेल से जलाने की परंपरा बताई गई है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे अनिष्ट और दुर्घटना से बचाव होता है.
ग्रहों की पीड़ा दूर करने में दीपक
ज्योतिषीय मान्यताओं में दीपक का संबंध ग्रहों से भी जोड़ा जाता है. नवग्रह पूजा में सोने के दीपक को सूर्य का प्रतीक माना जाता है. तांबे को मंगल से संबंधित माना गया है. दीपक जलाकर प्रार्थना करने की परंपरा का उद्देश्य पूजा-अनुष्ठान के दौरान दिव्य ज्योति को साक्षी मानना और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करना है.
नोट: दीपक, तेल, धातु और उनके फल से जुड़ी बातें धार्मिक तथा ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं. यह जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है और प्रभात खबर इसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करता है.
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