Chaurchan 2026: बिहार-झारखंड में चौठचंद्र कब, गणेशजी और चंद्रमा की पूजा का सही समय; महत्व जानें

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चौठचंद्र 2026 को दर्शाती तस्वीर (Image)

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Chaurchan 2026: चौठचंद्र पर्व बिहार और झारखंड में विशेष महत्व रखता है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. जानें 2026 में पूजा का शुभ मुहूर्त और इसका महत्व.

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Chaurchan 2026: बिहार-झारखंड में चौठचंद्र पर्व का विशेष महत्व है. मान्यतानुसार, इस इस दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ-साथ चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. पौराणिक मान्यता है इस व्रत को रखने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. साथ ही, संतान को दीर्घायु जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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इसके अलावा मान्यता यह भी है कि चौठचंद्र व्रत के प्रभाव से बुद्धि सही काम करती है, शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति होती है और जीवन की बाधाओं का अंत होता है. आइए, अब जानते हैं कि बिहार और झारखंड में चौठचंद्र की पूजा का क्या शुभ मुहूर्त है, व्रत कब रखा जाएगा और इस दिन चंद्रमा के दर्शन से जुड़ी मान्यता और महत्व क्या है.

चौठचंद्र 2026 शुभ मुहूर्त

मिथिला पंचांग के अनुसार, भगवान गणेश की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक रहेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश का चतुर्थी तिथि पर मध्याह्न काल में हुआ था.

चौठचंद्र पर चंद्रमा के दर्शन का महत्व

चौठचंद्र शब्द का अर्थ- 'चतुर्थी तिथि का चांद' होता है. यानी भाद्रपद (भादो) शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को देखा जाने वाला चांद. आमतौर पर चतुर्थी के चांद को देखना अशुभ माना जाता है. लेकिन, मैथिल संप्रदाय की परंपरा के अनुसार इस दिन चंद्रमा का दर्शन करना शुभ और मंगलकारी होता है. चौठचंद्र पर चंद्र के दर्शन से कलंक (झूठा आरोप) नहीं लगता.

चौठचंद्र का चांद देखने के दूर होता है कलंक

पौराणिक मान्यता के अनुसार, चतुर्थी के चांद को देखने से आरोप लगता है. श्रीमद्भगवद महापुराण के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण पर स्यमन्तक मणि चुराने का आरोप लगा था. कहा जाता है कि द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने चतुर्थी तिथि का चांद देखा था. कहा जाता है कि नारद जी ने श्रीकृष्ण से कहा था कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि पर चंद्रमा के दर्शन से कलंक (झूठा आरोप) नहीं और अगर लगा हो, तो वह दूर हो जाता है.

चौथचंद्र पूजा लिए पकवान और उसका महत्व

चौठचंद्र पूजा के दिन मुख्य रूप से खीर (चावल और गुड़ का), पूड़ी (अगर संभव हो, तो गुड़ का), पिरुकिया (गुझिया), मीठी टिकरी (बिहार-झारखंड का पारंपरिक पकवान) इत्यादि पकवान बनाए जाते हैं और उन्हीं का भोग चंद्र देव को लगाया जाता है. इस दिन मुख्यतौर पर पारंपरिक पकवान ही बनाए जाते हैं. चौठचंद्र के दिन ये सभी सामग्रियां बांस के बने सूप में रखकर आंगन में पूजन के लिए रखी जाती हैं.

  • चौठचंद्र पूजन सामग्री
  • दूध
  • दही
  • खीर
  • पकवान
  • मौसमी फल
  • सिंदूर
  • तिल
  • सुपारी
  • चंदन
  • शुद्ध जल
  • शंख
  • नया वस्त्र
  • गौर चावल का आटा
  • अष्टदल (अल्पना)
  • दूर्वा दल
  • बेलपत्र
  • सफेद फूल-माला
  • अक्षत
  • केले का पत्ता
  • आम का पत्ता
  • कलश
  • बांस का सूप
  • दीप
  • डाली
चौठचंद्र पूजा सामग्री (Image AI)
चौठचंद्र पूजा सामग्री (Image AI)

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