रांची का 400 साल पुराना स्वयंभू बूढ़ा महादेव मंदिर: जहां शिव-शक्ति की कृपा और मंडा पूजा की अनूठी परंपरा है जीवंत

बूढ़ा महादेव मंदिर, अरगोड़ा रांची
रांची के अरगोड़ा बाईपास रोड स्थित बूढ़ा महादेव मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना धार्मिक स्थल है. यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग और 11 दिनों तक चलने वाली मंड़ा पूजा विशेष आस्था का केंद्र हैं. मान्यता है कि इस दौरान मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मंदिर परिसर में भगवान हनुमान, मां दुर्गा और मां काली के मंदिर भी स्थित हैं. हर वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान यहां आकर्षक थीम आधारित पंडाल बनाए जाते हैं, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनते हैं.
Budha Mahadev Temple Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची के कटहल मोड़, अरगोड़ा बाईपास रोड स्थित बूढ़ा महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है. लगभग 400 वर्ष पुराने इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित स्वयंभू शिवलिंग है, जिसे किसी ने स्थापित नहीं किया बल्कि यह स्वयं प्रकट हुआ माना जाता है. यही कारण है कि दूर-दूर से भक्त भगवान शिव के दर्शन और आशीर्वाद के लिए यहां पहुंचते हैं.
मंडा पूजा से जुड़ी है मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता
बूढ़ा महादेव मंदिर में होने वाली मंडा पूजा की विशेष धार्मिक मान्यता है. 11 दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आराधना करते हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं. मंदिर परिसर में स्थापित नंदी महाराज भक्तों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं.
एक ही परिसर में शिव, शक्ति और हनुमान का दिव्य संगम
मंदिर परिसर केवल शिव उपासना तक सीमित नहीं है. यहां भगवान हनुमान की एक अद्भुत प्रतिमा स्थापित है, जिसमें वे श्रीराम और लक्ष्मण को अपने कंधों पर उठाए हुए दिखाई देते हैं. इसके अलावा मां दुर्गा और मां काली के अलग-अलग मंदिर भी मौजूद हैं. मां दुर्गा के मंदिर में सफेद रंग की सुंदर प्रतिमा स्थापित है, जो श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करती है. परिसर में स्थित प्राचीन पीपल का वृक्ष भी धार्मिक महत्व रखता है.
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दुर्गा पूजा में आकर्षण का केंद्र बनता है भव्य पंडाल
अरगोड़ा स्थित बूढ़ा महादेव मंदिर हर वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान अपने अनोखे थीम आधारित पंडालों के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां वैष्णो देवी और हैरी पॉटर जैसी थीम पर भव्य पंडाल बनाए जा चुके हैं. वर्ष 2025 में पूजा समिति ने 21 हजार किताबों से सजे भव्य दरबार में मां भवानी को विराजमान कर श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया था. धार्मिक आस्था और रचनात्मकता का यह अनूठा संगम मंदिर की पहचान बन चुका है.
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लेखक के बारे में
By शौर्य पुंज
मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.
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