भौम प्रदोष पर शिव-हनुमान की पूजा क्यों है खास? जानें महादेव और बजरंगबली के बीच का कनेक्शन
भगवान शिव और हनुमान जी की सांकेतिक तस्वीर (एआई)
भौम प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा करना बहुत ही फलदायक माना जाता है. मान्यता है कि दोनों के बीच गहरा संबंध है. आइए, पौराणिक कथाओं के माध्यम से जानते हैं महादेव और बजरंगबली के बीच के इस खास कनेक्शन के बारे में.
Bhom Pradosh Vrat: हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. यह व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार को पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है. इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है. हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है. लेकिन भौम प्रदोष की खासियत सिर्फ मंगलवार का दिन नहीं है. इसके पीछे भगवान शिव और हनुमान जी से जुड़ी एक खास मान्यता भी है. आखिर क्या है शिव-हनुमान का यह संबंध ? आइए जानते हैं.
शिव और हनुमान जी का क्या है कनेक्शन?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी भगवान शिव के 11 वें रुद्र स्वरूप हैं. हनुमान जी के शिव स्वरूप से जुड़ी अलग-अलग कथाएं भी प्रचलित हैं.
पहली कथा: शिवजी के तेज से हुआ हनुमान जी का जन्म

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया. मोहिनी रूप को देखकर भगवान शिव उस रूप से प्रभावित हुए. इस दौरान भगवान शिव के शरीर से निकले तेज को ऋषियों ने सुरक्षित रख लिया. कहा जाता है कि भगवान शिव के संकेत पर सप्त ऋषियों ने इस तेज को एक पत्ते पर रखा और माता अंजनी के कान के माध्यम से उनके गर्भ तक पहुंचाया. इसके बाद माता अंजनी गर्भवती हुईं और उन्होंने हनुमान जी को जन्म दिया.
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दूसरी कथा: नंदी के श्राप से जुड़ा हनुमान जी का अवतार

हनुमान जी के शिव स्वरूप से जुड़ी एक अन्य कथा रावण और नंदी के श्राप से जुड़ी है. कहा जाता है कि रावण भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था. एक बार वह भगवान शिव को अपने साथ लंका ले जाना चाहता था. जब रावण कैलाश पहुंचा, तो वहां नंदी ने उसे समझाया कि भगवान शिव को लंका ले जाने से माता पार्वती और उनके अन्य भक्तों को कष्ट होगा. नंदी की बात सुनकर रावण क्रोधित हो गया और उसने नंदी के वानर जैसे रूप का अपमान किया.
रावण के अपमान से क्रोधित होकर नंदी ने उसे श्राप दिया कि एक वानर ही उसके साम्राज्य के विनाश का कारण बनेगा और उसकी मृत्यु में भी उसकी भूमिका होगी. एक मान्यता के अनुसार, नंदी के इसी श्राप को पूरा करने के लिए भगवान शिव ने हनुमान जी के रूप में अवतार लिया. आगे चलकर हनुमान जी ने भगवान श्रीराम की सहायता की और रावण के विरुद्ध युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने अपनी पूंछ से लंका में आग लगा दी. इस तरह नंदी का श्राप भी पूरा हुआ.
क्यों खास है मंगलवार का प्रदोष?
'भौम' शब्द मंगल ग्रह से जुड़ा है. ज्योतिषीय मान्यताओं में मंगल को भूमिपुत्र यानी भौम कहा जाता है. इसलिए मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है. धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत कर्ज से मुक्ति और मंगल ग्रह से जुड़ी परेशानियों से राहत की कामना के लिए विशेष माना जाता है.
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Disclaimer: इस लेख में दी गई सभी जानकारियां धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं. प्रभात खबर इन मान्यताओं की पुष्टि नहीं करता है.
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