भौम प्रदोष व्रत कथा: जब बेटे को आग में झोंकने के लिए तैयार हो गई मां, हनुमान जी ने ऐसे ली परीक्षा
भौम प्रदोष व्रत कथा (एआई तस्वीर)
भौम प्रदोष व्रत की कथा हनुमान जी की एक सच्ची भक्त महिला से जुड़ी है. मान्यता है कि एक दिन हनुमान जी साधु का रूप धारण कर उसकी परीक्षा लेने उसके घर पहुंचे. आखिर हनुमान जी ने भक्त महिला की परीक्षा कैसे ली? जानने के लिए पढ़ें पूरी कथा.
Bhom Pradosh Vrat Katha: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है. भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत इस बार 8 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा. जब प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और मंगल ग्रह को समर्पित है. ऐसे में भौम प्रदोष का व्रत रखने से भगवान शिव और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है और कुंडली में मंगल ग्रह मजबूत होने की मान्यता है.
भौम प्रदोष व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक वृद्ध महिला रहती थी. उसका एक बेटा था, जिसका नाम मंगलिया था. वह महिला भगवान हनुमान की बहुत बड़ी भक्त थी. वह हर मंगलवार को पूरी श्रद्धा से व्रत रखती और हनुमान जी की पूजा करती थी.
वृद्ध महिला मंगलवार के दिन दो नियमों का विशेष रूप से पालन करती थी. वह उस दिन न तो घर में मिट्टी से लीपाई करती थी और न ही मिट्टी खोदती थी. कई वर्षों तक महिला इसी तरह हनुमान जी की भक्ति करती रही. एक दिन हनुमान जी ने उसकी भक्ति की परीक्षा लेने का निर्णय लिया.
हनुमान जी ने ली भक्त की कठिन परीक्षा
हनुमान जी साधु का रूप धारण करके वृद्ध महिला के घर पहुंचे. उन्होंने आवाज लगाई, "क्या यहां कोई हनुमान जी का भक्त है, जो मेरी इच्छा पूरी कर सके?" आवाज सुनकर वृद्ध महिला बाहर आई और हाथ जोड़कर बोली, "महाराज, बताइए मैं आपकी क्या सेवा कर सकती हूं?"
साधु ने कहा, "मुझे बहुत भूख लगी है. मैं यहीं भोजन बनाना चाहता हूं. तुम थोड़ी सी जगह मिट्टी से लीप दो." यह सुनकर वृद्ध महिला परेशान हो गई. उसने कहा, "महाराज, मैं मंगलवार के दिन न तो मिट्टी खोदती हूं और न ही घर लीपती हूं. इसके अलावा आप जो भी सेवा कहेंगे, मैं करने के लिए तैयार हूं." साधु ने उसकी बात सुनी और कुछ देर बाद एक कठिन परीक्षा लेने का फैसला किया.
बेटे को सुरक्षित देखकर हैरान रह गई वृद्धा
साधु ने कहा, "अगर तुम मिट्टी से जगह नहीं लीप सकतीं तो अपने बेटे मंगलिया को बुलाओ. मैं उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा." यह सुनकर वृद्ध महिला बहुत दुखी हुई. उसके लिए यह बहुत कठिन स्थिति थी, लेकिन उसने साधु को वचन दिया था कि मिट्टी लीपने के अलावा वह उनकी हर बात मानेगी. वृद्ध महिला ने भारी मन से अपने बेटे मंगलिया को बुलाया और साधु की बात मान ली. इसके बाद वह दुखी होकर घर के अंदर चली गई.
हनुमान जी ने दिया आशीर्वाद
कुछ समय बाद साधु ने वृद्ध महिला को बुलाकर कहा, "मंगलिया को भी बुला लो. वह भी हमारे साथ भोजन करेगा."यह सुनकर वृद्ध महिला की आंखों में आंसू आ गए. उसने कहा, "महाराज, कृपया मेरे बेटे का नाम लेकर मेरे दुख को और मत बढ़ाइए." लेकिन साधु के बार-बार कहने पर उसने कांपती आवाज में मंगलिया को पुकारा.
तभी मंगलिया हंसता-खेलता हुआ उसके सामने आ गया. अपने बेटे को बिल्कुल सुरक्षित देखकर वृद्ध महिला हैरान रह गई. उसकी आंखों से खुशी के आंसू निकल आए और वह साधु के चरणों में गिर पड़ी. उसी समय हनुमान जी अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए. उन्होंने वृद्ध महिला को दर्शन दिए और उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद दिया. हनुमान जी की कृपा से वृद्ध महिला का जीवन धन्य हो गया और अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई.
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