श्रावण मास : मुक्ति व मोक्ष का संगम स्थल अजगैबीनगरी
Author Prabhat khabar digital desk
Updated:
विज्ञापन
शुभंकर अजगैबीनाथ धाम पौराणिक स्थल रहा है. अजगैबीनगरी मुक्ति व मोक्ष का संगम स्थल माना जाता है. केवल सावन ही नहीं, अन्य माह में भी पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा तट पर अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. यहां हर दिन मोक्ष के साथ मुक्ति की कामना मन में लिये लोग पहुंचते हैं. विशेषकर सावन में अजगैबीनगरी […]
विज्ञापन
शुभंकर
अजगैबीनाथ धाम पौराणिक स्थल रहा है. अजगैबीनगरी मुक्ति व मोक्ष का संगम स्थल माना जाता है. केवल सावन ही नहीं, अन्य माह में भी पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा तट पर अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. यहां हर दिन मोक्ष के साथ मुक्ति की कामना मन में लिये लोग पहुंचते हैं. विशेषकर सावन में अजगैबीनगरी का स्वरूप बदल जाता है.
हर दिन देश-विदेश के कांवरिये एक ओर जहां मुक्ति की कामना लिये अपने साथ गंगाजल बाबा बैद्यनाथ को चढ़ाने के लिए ले जाते हैं, वहीं दूसरी ओर दुख, संताप, रोग, शोक से मुक्ति की कामना करते हैं. गंगा तट के समीप ही चिता स्थल पर हर रोज मोक्ष की कामना के लिए दूर-दूर से परिजन आते हैं. सुलतानगंज का श्मशान घाट काफी प्रसिद्ध है. मान्यता है कि यहां दाह संस्कार कराने से मोक्ष प्राप्ति होती है. दूसरी ओर नयी सीढ़ी घाट पर मुक्ति की कामना लिये कांवरिये गंगाजल उठाते हैं. कांवरिया पवित्र उत्तरवाहिनी गंगाजल से बाबा बैद्यनाथ का अभिषेक करते हैं, जिससे उनकी कामना पूरी होती है.
गंगा में डुबकी लगाते ही मिट जाता है तन-मन का संताप
यहां आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि गंगा स्नान करते ही ऐसा लगता है, मानो पूरा शरीर बोझ से मुक्त हो गया हो. मन का संताप मिट जाता है, जिससे पूरे साल तरोताजा रहते हैं. बाबा को जलार्पण करने से वे अपने भक्तों को संकटों से मुक्त रखते हैं.
पुराणों में है वर्णन
सुलतानगंज अजगैबीनाथ धाम महत्वपूर्ण स्थल है. प्रागैतिहासिक काल से ही इसका उल्लेख मिलता है. पुराणों से लेकर महाकाव्य तक में इसकी चर्चा हुई है. मैथिल कोकिल विद्यापति के गीतों में भी इसका उल्लेख है. सन् 938 में चर्चित चीनी यात्री ह्वेन शांग ने भी अपने यात्रा वृतांत में इसका वर्णन किया है.
शिव ने प्रदान किया था अजगव धनुष
यहां की पहाड़ी पर जाह्नु आश्रम का उल्लेख पुराणों में आया है. आज यही पहाड़ी अजगैबीनाथ पहाड़ी के नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि शिव ने मुनि से प्रसन्न होकर अजगव नाम का धनुष उन्हें प्रदान किया था. अजगव धनुष इसी आश्रम से प्राप्त करने के कारण इसका नामकरण अजगैबीनाथ पहाड़ी पड़ा. यहां पर गंगा उत्तराभिमुख होकर बहती है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन