Astro Special: क्या होता है ज्योतिष का संधि काल गंडांत? शुभ कार्यों के लिए अशुभ क्यों

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ज्योतिष में गंडांत और संधि ( Image AI)

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Gandant in Astrology: ज्योतिष में गंडांत और संधि काल तब होते हैं जब एक अवस्था समाप्त होकर दूसरी शुरू होती है. यह लेख तिथि, नक्षत्र और लग्न गंडांत के प्रकारों और महत्व पर प्रकाश डालता है, साथ ही इन संवेदनशील कालों में बरती जाने वाली सावधानियों की भी जानकारी देता है.

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Astro Special: वैदिक ज्योतिष में गंडांत और संधि महत्वपूर्ण संधिकालों से जुड़े विषय हैं. जब एक स्थिति समाप्त होकर दूसरी शुरू होती है, तो वह समय संक्रमण का होता है. ज्योतिष में ऐसे समय का विशेष रूप से जन्म, विवाह, यात्रा और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के संदर्भ में विचार किया गया है. गंडांत जल और अग्नि तत्व वाली राशियों के बीच बनने वाला एक विशेष संधिकाल है. इन बिंदुओं पर होने वाले परिवर्तन को ज्योतिषीय दृष्टि से संवेदनशील माना गया है और इन्हें मानसिक तनाव, अचानक बदलाव या जीवन में आने वाली बाधाओं से भी जोड़ा है. एस्ट्रोलॉजी स्पेशल के पहली कड़ी में ज्योतिषाचार्य पं. प्रशांत पांडे ज्योतिष में गंडांत के महत्व को जानिए.

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ज्योतिष में क्या होता है संधि काल

संधि का अर्थ है दो अवस्थाओं के बीच का जोड़ या संक्रमण. यह राशियों, तिथियों और अन्य ज्योतिषीय स्थितियों के बीच हो सकती है. संधि के समय एक अवस्था का प्रभाव समाप्त होता है और दूसरी अवस्था का प्रभाव शुरू होता है.

गंडांत के तीन मुख्य प्रकार

ज्योतिष में गंडांत के तीन प्रमुख प्रकार बताए गए हैं.

  1. तिथि गंडांत
  2. नक्षत्र गंडांत
  3. लग्न गंडांत

क्या होता है तिथि गंडांत?

तिथि गंडांत 5वीं–6वीं, 10वीं–11वीं और 15वीं–1वीं तिथि के संधिकाल से संबंधित है. इसके अनुसार 5वीं, 10वीं और 15वीं तिथि के अंतिम 24 मिनट तथा 1वीं, 6वीं और 11वीं तिथि के शुरुआती 24 मिनट को जोड़ा जाता है. इस तरह इन तिथियों के बीच कुल 48 मिनट का गंडांत क्षेत्र बनता है.

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नक्षत्र गंडांत क्या होता है, कैसे बनता है

नक्षत्र गंडांत इन तीन नक्षत्र-संधियों पर बनता है.

• रेवती- अश्विनी • आश्लेषा- मघा • ज्येष्ठा- मूल

रेवती, आश्लेषा और ज्येष्ठा के अंतिम 48 मिनट तथा अश्विनी, मघा और मूल के शुरुआती 48 मिनट को नक्षत्र गंडांत के अंतर्गत रखा है. तीनों में नक्षत्र गंडांत को विशेष महत्व दिया गया है. ज्येष्ठा-मूल की संधि का संबंध अभुक्त मूल से भी है. अभुक्त मूल की अवधि को लेकर अलग-अलग आचार्यों के मत उपलब्ध हैं, इसलिए इसकी गणना में संबंधित परंपरा का विचार किया जाता है.

लग्न गंडांत क्या होता है

लग्न गंडांत इन राशि-संधियों पर देखा जाता है- • कर्क- सिंह • वृश्चिक-धनु • मीन- मेष नोट- कर्क, वृश्चिक और मीन के अंतिम 12 मिनट तथा सिंह, धनु और मेष के शुरुआती 12 मिनट इसमें शामिल होते हैं. प्रत्येक राशि-संधि का कुल गंडांत क्षेत्र 24 मिनट का होता है.

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गंडांत में सावधानी

ज्योतिषीय परंपरा में जन्म, विवाह, यात्रा, व्रत और महत्वपूर्ण शुभ कार्यों के लिए गंडांत काल से बचने की सलाह दी गई है. किसी कुंडली में गंडांत की स्थिति मिलने पर केवल इसी आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है. ग्रहों की स्थिति, उनका बल, दशा और अन्य योगों को भी साथ में देखना चाहिए. शास्त्रीय मत के अनुसार बलवान गुरु लग्न गंडांत के प्रभाव को तथा बलवान चंद्रमा तिथि गंडांत के प्रभाव को कम कर सकता है.

गंडांत और संधि को समझने के लिए इनके विभिन्न प्रकार, उनकी अवधि और कुंडली में ग्रहों की स्थिति इन सभी पहलुओं को साथ लेकर चलना जरूरी है. गंडांत के प्रभाव और उनसे जुड़े उपायों पर विस्तार से चर्चा हम अपने अगले लेख में करेंगे. तब तक इस विषय के अगले भाग के लिए जुड़े रहिए.

- काशी से ज्योतिषाचार्य पं. प्रशांत पांडे

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