Coronavirus Lockdown Jharkhand LIVE: मुंबई में फंसे झारखंड के 300 युवकों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, सांसद व विधायक से लगायी वापसी में मदद की गुहार
poors badly affected due to coronavirus lockdown in jharkhand, 10 करोड़ का पोल्ट्री बिजनेस ठप, मुर्गियों को खिलाने के लिए नहीं मिल रहे दाने, रांची : कोरोना वायरस की वजह से देश में घोषित लॉकडाउन के दौरान झारखंड में सरकार और प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद सप्लाई चेन टूटने लगी है. लोगों को खाद्य सामग्री मिलने में दिक्कत हो रही है. राशन दुकान हो या सब्जी की दुकानें, लोगों से मनमानी कीमत वसूली जा रही है. इसकी वजह से लोग दोहरी मार झेल रहे हैं. खासकर दिहाड़ी मजदूर. उनका काम भी चौपट हो गया है और महंगाई की भी मार पड़ रही है. हालांकि, सरकार ने घोषणा की है कि गरीब परिवारों के लिए चूड़ा और गुड़ का वितरण किया जायेगा.
मुंबई में फंसे चतरा के 300 युवक

चतरा के 300 युवक मुंबई में फंसे, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, सांसद और विधायक से लगायी वापसी में मदद की गुहार.
कटहल खरीद रहे लोगों पर पुलिस ने बरसायी लाठियां

गुमला जिला में सुबह नौ बजे परमवीर अलबर्ट एक्का स्टेडियम में कटहल खरीदने को लेकर लोग आपस में उलझ गये. भीड़ लगी, तो पुलिस ने तड़ातड़ लाठियां बरसा दी. बाद में एसडीओ ने लाइन लगवाकर कटहल की बिक्री करवायी.
गढ़वा में 10 करोड़ का पोल्ट्री बिजनेस ठप
कोरोना वायरस का खौफ इतना बढ़ गया है कि गढ़वा जिला में कोई मुर्गी खरीदने के लिए तैयार नहीं है. 10 करोड़ रुपये का पोल्ट्री बिजनेस ठप हो गया है. मुर्गियों को खिलाने के लिए दाने भी नहीं मिल रहे. भूख से मर सकते हैं लाखों चिकन.
चतरा सब्जी बाजार में नहीं हो रहा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन

चतरा शहर के सब्जी मार्केट में शनिवार की सुबह लोग घरों से निकले और सब्जी की खरीदारी करने बाजार पहुंचे. इस दौरान लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का बिल्कुल पालन नहीं किया. हालांकि, पुलिस और प्रशासन सड़कों पर बेवजह घूम रहे लोगों पर सख्ती दिखा रही है.
लोग देखते रहे रामायण, बाजार नहीं आये ग्राहक

राजधानी रांची के रातू प्रखंड का है यह नजारा. धारावाहिक रामायण के प्रसारण के दौरान रातू चट्टी बाजार में नहीं आये ग्राहक.
दिन भर खुली रहेंगी राशन की दुकानें
रांची की राशन दुकानें पहले की तरह दिन भर खुली रहेंगी. दुकानों को बंद करने का कोई समय निर्धारित नहीं किया गया है. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा. ग्राहकों को एक मीटर की दूरी का पालन करना है. 11 बजे या 1 बजे बंद करने का कोई निर्देश नहीं है. दुकान सुबह से शाम तक खुलेगी.
रांची : कोरोना वायरस की वजह से देश में घोषित लॉकडाउन के दौरान झारखंड में सरकार और प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद सप्लाई चेन टूटने लगी है. लोगों को खाद्य सामग्री मिलने में दिक्कत हो रही है. राशन दुकान हो या सब्जी की दुकानें, लोगों से मनमानी कीमत वसूली जा रही है. इसकी वजह से लोग दोहरी मार झेल रहे हैं. खासकर दिहाड़ी मजदूर. उनका काम भी चौपट हो गया है और महंगाई की भी मार पड़ रही है. हालांकि, सरकार ने घोषणा की है कि गरीब परिवारों के लिए चूड़ा और गुड़ का वितरण किया जायेगा.
लेखक के बारे में
By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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