जॉन एफ केनेडी की शख्सीयत

Published at :22 Nov 2013 3:02 AM (IST)
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जॉन एफ केनेडी की शख्सीयत

।। विवेक शुक्ला ।।(वरिष्ठ पत्रकार) जॉन एफ केनेडी की मौत को आज पचास साल पूरे हो रहे हैं. पर आज भी अमेरिका उन्हें भूला नहीं है. पूरा अमेरिका बड़ी शिद्दत के साथ उन्हें याद करता है. जॉन वास्तव में स्टेट्समैन थे. 22 नवंबर, 1963 को डल्लास, टेक्सास में केनेडी की हत्या कर दी गयी थी. […]

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।। विवेक शुक्ला ।।
(वरिष्ठ पत्रकार)

जॉन एफ केनेडी की मौत को आज पचास साल पूरे हो रहे हैं. पर आज भी अमेरिका उन्हें भूला नहीं है. पूरा अमेरिका बड़ी शिद्दत के साथ उन्हें याद करता है. जॉन वास्तव में स्टेट्समैन थे. 22 नवंबर, 1963 को डल्लास, टेक्सास में केनेडी की हत्या कर दी गयी थी. इस जुर्म के लिए ली हार्वी ऑस्वाल्ड पर आरोप लगा, परंतु इससे पहले कि उस पर मुकदमा चलता, आरोप लगने के दो दिन बाद ही जैक रूबी ने गोली मार कर उसकी हत्या कर दी. केनेडी अमेरिका के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपतियों में से थे. उन्होंने ही कहा था कि ‘यह मत पूछो कि देश ने तुम्हें क्या दिया, बल्कि यह पूछो कि तुमने देश को क्या दिया’. शीत युद्ध में अमेरिका की भूमिका के संबंध में दिये गये भाषण में केनेडी ने अमेरिकियों का आह्वान किया था, ‘यह मत पूछो कि तुम्हारा देश तुम्हारे लिए क्या कर सकता है , यह पूछो कि तुम देश के लिए क्या कर सकते हो?’ उनके इस वक्तव्य से उनकी शख्सीयत को समझा जा सकता है.

बीते दिनों केनेडी की बेटी कैरोलीन केनेडी ने पिता की हत्या के 50 साल बाद अपनी राजनीतिक पारी शुरू की है. कैरोलीन ने जापान में अमेरिकी राजदूत का पद संभाल लिया. 55 वर्षीय कैरोलीन पेशे से वकील हैं और शुरू से ही राष्ट्रपति बराक ओबामा की समर्थक रही हैं. उनके नये पद संभालते ही अमेरिका केनेडी की यादों में डूब गया था.केनेडी भारत को चाहते थे. वे भारत के समाज, संस्कृति और गौरवमयी इतिहास से प्रभावित थे. कहा जाता है कि अगर उनकी अकाल मृत्यु न होती, तो भारत-अमेरिका रिश्ते अलग तरह से विकसित होते. भारत ने 1962 के युद्ध में मिली हार के बाद चीन की सीमा पर नजर रखने के लिए अमेरिका के ‘यू-2’ जासूसी विमानों को अपने हवाई ठिकाने के इस्तेमाल की अनुमति दी थी. केनेडी से इस बाबत नेहरू ने बात की थी. भारतीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 11 नवंबर 1962 को चीन से लगी सीमा पर नजर रखने के लिए यू-2 मिशन को भारतीय क्षेत्र में उड़ान भरने की इजाजत दी थी. पंडित नेहरू के निधन के बाद अमेरिका दौरे पर गये तत्कालीन भारतीय राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन और केनेडी के बीच तीन जून, 1963 को कटक के चारबतिया हवाई ठिकाने के इस्तेमाल को लेकर सहमति बनी थी. चारबतिया हवाई अड्डा दूसरे विश्व युद्ध के समय बनाया गया था.

जब नेहरू ने चीन से लगी सीमा पर नजर रखने के लिए यू-2 मिशन को भारतीय क्षेत्र में उड़ान भरने की अनुमति दी, उस वक्त भारत में अमेरिकी राजदूत जॉन केनेथ गालब्रेथ ने भारत सरकार को सुझाव दिया था कि विवादित क्षेत्र के हवाई सर्वे से चीन की घुसपैठ के बारे में सटीक तसवीर मिल सकेगी. अमेरिका दो कारणों से सीमा क्षेत्र की तसवीरें भारत के साथ बांटता था. पहला कारण यह था कि अमेरिकी नीति-निर्माता विवादित क्षेत्र की तसवीर स्पष्ट करना चाहते थे. जबकि दूसरा कारण तत्कालीन सोवियत रूस के खिलाफ भारत में स्थायी ‘इलेक्ट्रॉनिक रीकानिसेंस मिशन’ स्थापित करना था.

बहरहाल, केनेडी की मौत के 50 साल बीत जाने के बाद उनकी हत्या के कारण का अभी खुलासा नहीं हो पाया है. अब एक नये खुलासे में दावा किया जा रहा है कि सोवियत खुफिया एजेंसी (केजीबी) के कुछ कट्टर स्टालिनवादी अधिकारियों ने ही इस हमले की संभावित रूप से साजिश रची थी. मॉस्को स्थित ब्रिटिश दूतावास में 1961 से 1962 के बीच प्रथम सचिव के पद पर काम करनेवाले राजनायिक राबर्ट हॉम्स की नयी पुस्तक ‘स्पाई लाइक नो अनदर’ में दावा किया है कि उस दौर में केजीबी की कमान पूर्व सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन के भरोसेमंद इवान सेरोव के हाथ में थी, जिन्होंने तत्कालीन सोवियत नेता निकीता ाुश्चेव के अमेरिका प्रेम और क्यूबा को मिसाइल संकट के दौरान अधर में छोड़ने के निर्णय से चिढ़ते हुए केनेडी की हत्या की साजिश को मंजूरी दी थी. पुस्तक में बताया गया है कि ऑस्वाल्ड केनेडी की हत्या से 55 दिन पहले मैक्सिको सिटी स्थित सोवियत महावाणिज्य दूतावास में गया था और सोवियत वीजा दिये जाने की मांग की थी. यह मांग ठुकरा दी गयी थी.

केनेडी की हत्या की जांच करनेवाली अमेरिकी संसद की समिति ने हालांकि 1979 में अपनी रिपोर्ट में सोवियत सरकार को क्लीन चिट देते हुए कहा था कि इस बात की प्रबल संभावना है कि हत्या की साजिश में दो हमलावर शामिल रहे हों, लेकिन सोवियत सरकार का इससे कुछ भी लेना-देना नहीं था. हॉम्स भी इसी बात को दोहराते हुए कहते हैं कि यह बिल्कुल सच है कि केजीबी ने बेहद गुपचुप तरीके से सबकुछ अंजाम दिया हो. खैर, जॉन केनेडी की शख्सीयत को अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया लंबे समय तक याद रखेगी.

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