महंगाई की मार

Updated at : 17 Nov 2015 5:41 AM (IST)
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महंगाई की मार

खुदरा मुद्रास्फीति में बढ़त का सिलसिला जारी है. जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं. इस साल सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति की दर 3.88 फीसदी थी, जो अक्तूबर में 5.25 फीसदी के स्तर तक जा पहुंची. पिछले चार महीनों में यह सबसे अधिक दर है. इसी तरह वार्षिक उपभोक्ता मूल्यों में मुद्रास्फीति […]

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खुदरा मुद्रास्फीति में बढ़त का सिलसिला जारी है. जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं. इस साल सितंबर में खुदरा मुद्रास्फीति की दर 3.88 फीसदी थी, जो अक्तूबर में 5.25 फीसदी के स्तर तक जा पहुंची. पिछले चार महीनों में यह सबसे अधिक दर है.

इसी तरह वार्षिक उपभोक्ता मूल्यों में मुद्रास्फीति सितंबर के 4.41 फीसदी से बढ़कर अक्तूबर में पांच फीसदी हो गयी. हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि इस बढ़त में त्योहारों के दौरान बढ़ी मांग का भी योगदान है, लेकिन इसका असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर व्यापक रूप से पड़ा है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के श्रेणी में खाद्य वस्तुओं की संख्या सबसे अधिक है. रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के मुताबिक जनवरी, 2016 तक खुदरा मुद्रास्फीति की दर छह फीसदी तक पहुंच सकती है और बैंक का लक्ष्य है कि 2017 के मार्च तक इसे पांच फीसदी तक लाया जाये. मुद्रास्फीति के मौजूदा रुझानों को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा. दूसरी ओर थोक मूल्य सूचकांक में मुद्रास्फीति पिछले 12 महीनों से लगातार नकारात्मक में है, हालांकि उसमें भी कुछ बढ़त दर्ज की गयी है.

सितंबर के -4.54 फीसदी की तुलना में अक्तूबर यह -3.81 फीसदी रही है. थोक और खुदरा मुद्रास्फीति में इतना भारी अंतर इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बढ़ी हुई कीमतों से हासिल मुनाफा खाद्य पदार्थों के मूल उत्पादकों और किसानों तक नहीं पहुंच कर, थोक और खुदरा व्यापारियों के खाते में जा रहा है. ऐसे में यह सरकार की जिम्मेवारी बनती है कि वह खाने-पीने की चीजों की महंगाई पर रोकथाम के लिए कारगर कदम उठाये तथा बाजार के मुनाफे को किसानों तक पहुंचाने के इंतजाम पुख्ता करे. दाल, गेहूं, सब्जियां, दूध जैसे उत्पाद न सिर्फ रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें हैं, बल्कि ये जीने के लिए बुनियादी जरूरतें भी हैं.

अगर ये वस्तुएं वाजिब दामों पर आम जन को हासिल नहीं हो पा रही हैं, तो यह बड़ी प्रशासनिक विफलता का भी सूचक है. आशा है कि सरकार महंगाई पर लगाम लगाने और उचित कीमतों पर खाद्य पदार्थों की निर्बाध आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए अविलंब आवश्यक उपाय करेगी, जिसकी जरूरत पिछले कई महीनों से लगातार महसूस की जा रही है. ऐसा करना समूची अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है, क्योंकि महंगाई से मांग भी प्रभावित होती है.

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