यह कैसी हिंसा!
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Sep 2015 6:10 AM (IST)
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कश्मीर के सोपोर कस्बे में पिछले दिन तीन साल के बुरहान बशीर की निर्मम हत्या की चौतरफा निंदा हुई है. बुरहान को गोद में लिये उसके पिता बशीर भट भी हत्यारों की गोली के शिकार हुए. पूर्व आतंकी भट अपनी सजा काटने के बाद आम नागरिक का जीवन बिता रहा था. इससे पहले भी कश्मीर […]
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कश्मीर के सोपोर कस्बे में पिछले दिन तीन साल के बुरहान बशीर की निर्मम हत्या की चौतरफा निंदा हुई है. बुरहान को गोद में लिये उसके पिता बशीर भट भी हत्यारों की गोली के शिकार हुए. पूर्व आतंकी भट अपनी सजा काटने के बाद आम नागरिक का जीवन बिता रहा था. इससे पहले भी कश्मीर में पूर्व आतंकवादियों की हत्या की घटनाएं हुई हैं, पर इस बार हमलावरों ने मासूम पर भी गोलियां बरसाने से परहेज नहीं किया. इस घटना पर आम कश्मीरियों में व्यापक क्षोभ और निराशा का माहौल है.
सोशल मीडिया पर निर्दोषों की हत्या के विरोध में कश्मीरियों की प्रतिक्रियाओं से इसका संकेत मिलता है. जाहिर है, राजनीतिक मांगों की पूर्ति के लिए आतंक, हिंसा और अलगाववाद को जरिया बनानेवाले तत्वों के लिए बुरहान की हत्या आत्ममंथन का अवसर होना चाहिए. सरकार, समाज और कश्मीर में सक्रिय सभी तत्वों को हिंसा की बेलगाम संस्कृति और उन्माद के विषाक्त वातावरण से आम कश्मीरियों को निजात दिलाने के उपायों पर गहन सोच-विचार करने की जरूरत है.
कश्मीर की अशांति में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है. ध्यान रहे कि पांच साल पहले एक 11 वर्षीय बालक उन्मादी भीड़ द्वारा फेंके जा रहे पत्थरों का निशाना बना था. उसके पिता अपने नवजात शिशु को अस्पताल ले जाने की अनुमति उस भीड़ से मांग रहे थे, पर बेपरवाह अलगाववादियों के पत्थरों ने शिशु और चार साल के एक अन्य बच्चे को गंभीर चोट पहुंचायी थी. उस समय भी, और अब बुरहान की शव यात्रा में भी हजारों लोगों की भागीदारी से स्पष्ट है कि कश्मीर की जनता हिंसा की राजनीति से दुखी और नाराज है.
मौके की नजाकत देख अलगाववादी संगठनों ने इस हत्याकांड के लिए सुरक्षा बलों पर आरोप मढ़े हैं. वे भूल जाते हैं कि ऐसे मौकों पर उनके भड़काऊ बयानों से घाटी में शांति के प्रयासों को झटका लगता है और आतंकियों तथा उपद्रवियों को शह मिलता है. उम्मीद करनी चाहिए कि सरकार इस घटना की त्वरित जांच करा कर दोषियों को कड़ी सजा दिलायेगी. इससे बुरहान की मौत पर कश्मीर की जनता के हृदय में उभरे दर्द को कुछ राहत मिलेगी.
दुनिया का इतिहास गवाह है कि हिंसा के रास्ते से तबाही के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ है. घाटी में शांति की स्थापना ही बुरहान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
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