सरजी! ‘कुर्सियापा’ हो गया है आपको

Published at :17 Feb 2015 5:32 AM (IST)
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सरजी! ‘कुर्सियापा’ हो गया है आपको

कुणाल देव प्रभात खबर, जमशेदपुर बेबाक सिंह इन दिनों बीमार चल रहे हैं. तनाव थोड़ा ज्यादा हो गया है. इसका प्रत्यक्ष कारण न तो मुङो पता चल पा रहा है, न ही वह बता रहे हैं. आखिर, एक दिन मैं उन्हें लेकर डॉक्टर के पास गया. डॉक्टर परिचित थे और मजाकिया भी. सो, बेबाक सिंह […]

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कुणाल देव

प्रभात खबर, जमशेदपुर

बेबाक सिंह इन दिनों बीमार चल रहे हैं. तनाव थोड़ा ज्यादा हो गया है. इसका प्रत्यक्ष कारण न तो मुङो पता चल पा रहा है, न ही वह बता रहे हैं. आखिर, एक दिन मैं उन्हें लेकर डॉक्टर के पास गया. डॉक्टर परिचित थे और मजाकिया भी. सो, बेबाक सिंह को देखते ही बोले, ‘‘अरे भाई, दूसरों को बीमार करनेवाले खुद बीमार कैसे पड़ गये?’’ बेबाक सिंह भी कहां चुप रहने वाले थे, तुरंत पलटवार किया, ‘‘क्या करें, आप जैसों की रोजी-रोटी का भी तो ख्याल रखना पड़ता है.’’ इस पर सब हंस पड़े और बेबाक सिंह के चेहरे पर भी रौनक लौटती दिखायी दी. डॉक्टर साहब ने मुझसे धीरे से कहा, ‘‘महापुरुष बीमार नहीं हैं.

लगता है गलचौरी के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे हैं. कुछ वक्त इन्हें भी दे दिया करिए, बिल्कुल ठीक हो जायेंगे.’’ इतने में सफेद कुरते-पाजामे में भारी-भरकम शरीर के स्वामी नेताजी का भी वहां पदार्पण हो गया. हांफते हुए उन्होंने कहा, ‘‘डॉक्टर साहब! जल्दी कुछ करिए, वरना मर जायेंगे. कितनी भी कोशिश कर रहा हूं, नींद ही नहीं आ रही. अजीब सी बेचैनी छायी रहती है. मन करता है पूरी दुनिया को आग लगा दें. तमाम डॉक्टरों को दिखा लिया, पर कोई फायदा नहीं हुआ.

पैसा पानी की तरह बहा, सो अलग.’’ डॉक्टर ने नेताजी को आला लगा कर चेक किया और कहा, ‘‘सरजी! कोई बड़ा रोग नहीं है, लेकिन जल्दी ठीक भी नहीं होगा.’’ ‘‘भला यह कैसा रोग है डॉक्टर साहब?’’, नेताजी ने बहुत ही चिंता के साथ पूछा. ‘‘अरे, डरिये मत भाई. इसका नाम है कुर्सियापा ’’, डॉक्टर ने हंसते हुए कहा.

बेबाक सिंह आदतन बीच में टपक पड़े, ‘‘यह क्या नया रोग है?’’ ‘‘अरे नहीं भाई, रोग तो पुराना ही है, लेकिन नाम नया पड़ा है. यह रोग उन नेताओं को होता है, जो या तो चुनाव हार गये हों या फिर कुरसी गंवा बैठे हों. इसके बाद जो बेचैनी, अनिंद्रा और चिड़चिड़ापन शुरू होता है, वह अगली जीत या कुरसी पाने तक जारी रहता है’’, डॉक्टर ने कहा. ‘‘अच्छा वही वाला रोग न, जिससे सुशासन बाबू परेशान चल रहे हैं, जिसके चक्कर में मांझी ने खुद ही पार्टी की नाव डुबो दी.. और बाघ-बकरी एक ही घाट पर पानी पीने के लिए तैयार हैं.’’

डॉक्टर साहब ने कहा, ‘‘बिल्कुल ठीक समङो. इस बीमारी से न सुपरमैन बच सकता है और न मफलरमैन. योग से मन को काबू में कर लेने का दावा करनेवाले साधु-संत भी इससे अछूते नहीं हैं.’’ बेबाक सिंह अब क्रिकेटर युवराज सिंह की तरह फॉर्म में लौट आये, बोले- ‘‘डॉक्टर साहेब, एक सलाह आपके लिए भी है. अच्छी कमाई चाहते हैं तो दिल्ली का रुख कीजिए. वहां आयी राजनीतिक सुनामी के बारे में तो आपने भी सुना ही होगा. बड़े-बड़े धुरंधर वहां कुर्सियापा की बीमारी के शिकार होने वाले हैं. ’’

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