काले धन की जांच और जन अपेक्षाएं

विदेशी बैंकों में काला धन रखनेवाले भारतीयों के नाम बताने से ना-नुकर के बाद सरकार ने तीन नाम सर्वोच्च न्यायालय के सामने जाहिर किये हैं. लेकिन इस खुलासे से न तो जांच की प्रगति का पता चलता है और न ही सरकारी रवैये और मंशा पर उठ रहे सवालों के जवाब मिलते हैं. एक अहम […]
विदेशी बैंकों में काला धन रखनेवाले भारतीयों के नाम बताने से ना-नुकर के बाद सरकार ने तीन नाम सर्वोच्च न्यायालय के सामने जाहिर किये हैं. लेकिन इस खुलासे से न तो जांच की प्रगति का पता चलता है और न ही सरकारी रवैये और मंशा पर उठ रहे सवालों के जवाब मिलते हैं.
एक अहम सवाल तो यही पूछा जा रहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल की बजाय जांच पर नियंत्रण सरकार के हाथ में क्यों रहे? सरकारी नियंत्रण का अर्थ है खाताधारकों और काले धन की अर्थव्यवस्था पर भी उसका नियंत्रण. ऐसे में गोपनीय दस्तावेजों तक पहुंच रखनेवाले राजनेता व नौकरशाहों द्वारा अपनी ताकत के आर्थिक एवं राजनीतिक दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. भाजपा ने 2011 में एक रिपोर्ट में काला धन का आकार 100 लाख करोड़ से अधिक का बताया था.
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