आचार संहिता से अटका विकास

Published at :24 May 2014 5:08 AM (IST)
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आचार संहिता से अटका विकास

रांची में मेयर पद के लिए चुनाव होने जा रहा है. जून में चुनाव है और फिर लागू होगी आचार संहिता. यानी विकास का काम फिर प्रभावित. आचार संहिता राज्य भर में नहीं, सिर्फ रांची क्षेत्र में लागू होगी. लोकसभा चुनाव हाल ही में खत्म हुआ. राज्य में लंबे समय तक आचार संहिता लागू थी. […]

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रांची में मेयर पद के लिए चुनाव होने जा रहा है. जून में चुनाव है और फिर लागू होगी आचार संहिता. यानी विकास का काम फिर प्रभावित. आचार संहिता राज्य भर में नहीं, सिर्फ रांची क्षेत्र में लागू होगी. लोकसभा चुनाव हाल ही में खत्म हुआ.

राज्य में लंबे समय तक आचार संहिता लागू थी. सरकारी काम ठप था. अब फिर मेयर चुनाव के नाम पर कई बड़े काम रांची में नहीं होंगे. यह आचार संहिता हटेगी, तो कुछ माह बाद राज्य में विधानसभा चुनाव होंगे. फिर लागू होगी आचार संहिता. इस कारण कई नीतिगत फैसले नहीं हो पायेंगे. इसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ रहा है. ठीक है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव हर साल नहीं होते, इसलिए आचार संहिता जब लागू होगी तो कुछ दिनों के लिए काम बाधित होगा ही. चिंता की बात है मेयर चुनाव. गत वर्ष यह चुनाव हुआ था.

चुनाव में गड़बड़ी हुई थी. चुनाव रद्द कर दिया गया था. एक साल तक रांची शहर बिना मेयर के रहा. महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लिये गये. गत वर्ष भी चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू रही, इस बार फिर होगी. यानी एक चुनाव को लेकर दो-दो बार. अगर यह गड़बड़ी नहीं होती, भ्रष्टचार सामने नहीं आता तो मेयर चुनाव रद्द नहीं होता. प्रत्याशियों को दोबारा खड़ा नहीं होना पड़ता. अब मेयर चुनाव में प्रत्याशियों को फिर से खड़ा होना पड़ेगा, चुनाव कार्यो में अफसरों को लगना होगा.

यह सब नहीं होता अगर पिछला चुनाव बेईमानी के कारण रद्द नहीं करना पड़ता. राज्य को बड़ी कीमत चुकानी पड़ती. कोई भी चुनाव आसान नहीं होता. सरकारी तंत्र को लगना पड़ता है. इस चुनाव में भी सरकार का भारी पैसा खर्च होगा. जिन कर्मचारियों-अफसरों से दूसरे काम लिये जा सकते थे, उन्हें अब चुनाव कार्य में जुटना पड़ेगा. कहीं इस बार भी गड़बड़ी हुई, फिर चुनाव रद्द हुए तो यही कहानी फिर दोहरायी जायेगी. व्यवस्था को ठीक करना होगा. ऐसी स्थिति पैदा करनी होगी, ताकि बेवजह चुनाव कराने की नौबत ही नहीं आये. बेईमानों को पकड़ना होगा और सजा दिलानी होगी ताकि कोई बेईमानी करने की हिम्मत नहीं करे. अगर ऐसा करते हैं तो बार-बार चुनाव, बार-बार आचार संहिता लागू करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और विकास के काम में रोड़ा नहीं आयेगा.

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