वंदे मातरम के 6 अंतरे गाना अनिवार्य क्यों? SC ने केंद्र से मांगा जवाब

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सुप्रीम कोर्ट, Photo- ANI

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वंदे मातरम के पूरे 6 अंतरे गाने की अनिवार्यता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और कर्नाटक संगीतकार की याचिका पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील एस मुरलीधर के बीच तीखी बहस भी हुई.

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (22 सितंबर) को राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के पूरे 6 अंतरों के गायन से जुड़े प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा. याचिका मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और कर्नाटक संगीतकार टी एम कृष्णा की ओर से दाखिल की गई है. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रगीत में कितने अंतरे होने चाहिए, यह तय करना उसका काम नहीं है.

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याचिका में क्या कहा गया है?

टी एम कृष्णा की ओर से दाखिल याचिका में वंदे मातरम के पूरे छह अंतरों को आधिकारिक रूप से गाने की व्यवस्था को चुनौती दी गई है. याचिका में दावा किया गया है कि बाद के चार अंतरों में धार्मिक प्रकृति के संदर्भ हैं. साथ ही राष्ट्रगीत के अपमान से जुड़े दंड के प्रावधान को भी चुनौती दी गई है.

सुनवाई के दौरान SG की टिप्पणी पर आपत्ति

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कानून बनाने और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर टिप्पणी की. उनकी टिप्पणी पर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ एस मुरलीधर ने कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणी की जरूरत नहीं थी और कानून अधिकारियों से मर्यादा बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है.

मुरलीधर और तुषार मेहता के बीच तीखी बहस

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई. मुरलीधर ने टिप्पणी वापस लेने की मांग की. इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्होंने जो कहा है, उसे दोहरा सकते हैं और उन्हें अपनी टिप्पणी पर अफसोस नहीं है. इसके बाद मुरलीधर ने फिर विरोध दर्ज कराया.

सोचने का मतलब नक्सली होना नहीं

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि किसी मुद्दे पर सोचने या सवाल उठाने का मतलब नक्सली होना नहीं है. इसके बाद जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने हस्तक्षेप करते हुए संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि संविधान के तहत उस व्यक्ति को भी समान अधिकार प्राप्त हैं, जिस पर आतंकवादी होने का आरोप हो.

कोर्ट ने कहा- राष्ट्रगीत क्या हो, यह तय करना हमारा काम नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राष्ट्रगीत का स्वरूप क्या होना चाहिए, यह तय करना अदालत का काम नहीं है. हालांकि, राष्ट्रगीत से जुड़े दंड के प्रावधान को लेकर कोर्ट सुनवाई करने के लिए तैयार है. कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को याचिका की प्रति सौंपते हुए जवाब देने को कहा है.

12 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर की तारीख तय की है. अब केंद्र सरकार की ओर से दाखिल जवाब के बाद कोर्ट दंड संबंधी प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका के संबंधित पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगा.

वंदे मातरम को लेकर पहले भी सामने आया विवाद

वंदे मातरम के छह अंतरों को लेकर हाल के दिनों में कर्नाटक में भी विवाद सामने आया है. केंद्र सरकार की ओर से जारी निर्देश में आधिकारिक संस्करण के रूप में छह अंतरों वाले वंदे मातरम के गायन का उल्लेख किया गया है, जबकि कर्नाटक सरकार ने अपने सरकारी कार्यक्रमों में पहले दो अंतरे गाने का निर्देश दिया था. इस आदेश को कर्नाटक हाईकोर्ट में भी चुनौती दी गई है.

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