2015 के केस में 2026 में दर्ज हुए साक्ष्य: कोर्ट ने कहा- सुनवाई की रफ्तार पर घोंघा भी सवाल उठा सकता है

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सुप्रीम कोर्ट और उसका परिसर, फोटो पीटीआई

Supreme Court On Judicial Delay: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में हो रही देरी पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा- मुकदमे की रफ्तार पर तो घोंघा भी सवाल उठा सकता है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने एक निजी कंपनी की अपील पर यह टिप्पणी की, जिसने फरवरी 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी थी.

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Supreme Court On Judicial Delay: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए कहा, “मुकदमा 2015 में दायर हुआ था. 2026 तक भी वादी के साक्ष्य दर्ज किए जा रहे हैं. हम इतना ही कह सकते हैं कि मुकदमे की रफ्तार पर तो घोंघा भी सवाल उठा सकता है.”

सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की दलील खारिज कर दी

सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की यह दलील भी खारिज कर दी कि जिन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लाने की मांग की गई है, उनकी प्रासंगिकता पर विचार किया जाना चाहिए. अदालत ने कहा कि जिन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लाने की मांग की गई, वे मुकदमा दायर होते समय भी कंपनी के पास थे और बाद में अतिरिक्त साक्ष्य पेश किए जाने के समय भी उसके पास थे. पीठ ने कहा, “अगर इस आवेदन को मंजूर किया जाता है तो इसका मतलब होगा कि अदालत वाणिज्यिक मुकदमों में टुकड़ों-टुकड़ों में कार्यवाही करने के तरीके को स्वीकार कर रही है.” पीठ ने यह भी कहा कि इससे पहले एक बार अतिरिक्त साक्ष्य रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति दी जा चुकी है.

कोर्ट ने कहा- जल्द फैसला किया जाए

अदालत ने कहा कि दस्तावेज कंपनी के पास पहले से मौजूद थे और इन्हें शुरुआत में ही या कम से कम उस समय पेश कर देना चाहिए था, जब पहली बार अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने के लिए आवेदन किया गया था. पीठ ने कहा कि 30 जनवरी 2018 को अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने का पहला आवेदन मंजूर कर लिया गया था, लेकिन उसी आधार पर दूसरा आवेदन नवंबर 2023 में दायर किया गया. अपील खारिज करते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि जितनी जल्दी संभव हो, इस मुकदमे पर फैसला किया जाए.

2015 में दर्ज किया गया था मामला

यह मुकदमा मई 2015 में दायर किया गया था, बाद में जनवरी 2018 में इसे वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 के तहत वाणिज्यिक मुकदमे के रूप में दर्ज किया गया. दिल्ली उच्च न्यायालय ने लंबित मुकदमे में कुछ अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने और एक गवाह को दोबारा जिरह के लिए बुलाने की कंपनी की अर्जी खारिज कर दी थी.


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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

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पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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