हिंदी के लिए बद्री नारायण व संताली के लिए कजली सोरेन को साहित्य अकादमी पुरस्कार दिये जाने की घोषणा
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 22 Dec 2022 6:51 PM
संताली भाषा के लेखक कजली सोरेन को उनके कविता संग्रह ‘साबरनका बालिरे सानन पंजय’ के लिए दिये जाने की घोषणा हुई है.
sahitya akademi award : साहित्य अकादमी पुरस्कार 2022 की आज घोषणा कर दी गयी है. इस बार हिंदी के लिए बद्री नारायण को साहित्य अकादमी पुरस्कार उनके कविता संग्रह ‘तुमड़ी के शब्द के लिए दिये जाने की घोषणा हुई है. बद्री नारायण हिंदी साहित्य जगत के वरिष्ठ कवि हैं. बद्रीनारायण का जन्म बिहार के भोजपुर जिले में 1965 में हुआ है. उनके कई कविता संग्रह बहुत चर्चित रहे हैं. उन्हें भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है.
इस बार संताली भाषा के लेखक कजली सोरेन को उनके कविता संग्रह साबरनका बालिरे सानन पंजय के लिए दिये जाने की घोषणा हुई है. वहीं मैथिली भाषा के लिए अजित आजाद को ‘पेन ड्राइवमे धरती’ कविता संग्रह के लिए दिये जाने की घोषणा हुई है.
अंग्रेजी भाषा के लिए अनुराधा राय को उनके उपन्यास ऑल दि लाइव्स वि नेवर लीव्स के लिए दिये जाने की घोषणा हुई है, जबकि उर्दू के लिए अनीस अशफाक को इस साल का साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया जायेगा. 23 भाषाओं के लिए दिये जा रहे साहित्य अकादमी पुरस्कार में सात कविता संग्रह, छह उपन्यास, दो कहानी संग्रह, दो साहित्य समालोचना, तीन नाटक और एक आत्मकथा शामिल हैं. पुरस्कार के संबंध में साहित्य अकादमी के सचिव के श्रीनिवास राव ने जानकारी दी.
मैथिली भाषा के लिए अजित आजाद को साहित्य अकादमी पुरस्कार दिये जाने की घोषणा हुई है. उनके कविता संग्रह ‘पेन ड्राइवमे धरती’ के लिए उन्हें यह पुरस्कार दिये जाने की घोषणा हुई है. अजित आजाद का कविता संग्रह 265 पृष्ठों का है, जिसमें 185 कविताएं संकलित हैं.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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