झारखंड से छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाली नई रेल लाइन में आ सकती है अड़चन

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झारखंड से छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाली नई रेल लाइन (File Photo)

रेल लाइन निर्माण संघर्ष समिति ने मांग की है कि पुराने रूट से ही बरवाडीह-चिरमिरी-अंबिकापुर रेल लाइन बने. बैठक के बाद कहा गया कि जनता किसी भी कीमत पर अपने अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेगी.

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बरवाडीह-चिरमिरी-अंबिकापुर रेल लाइन निर्माण संघर्ष समिति के आह्वान पर बुधवार (1 जुलाई)  को राजकीय मध्य विद्यालय, बड़गड़ के परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी. इस बैठक में बड़गड़, भंडरिया और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और प्रबुद्ध नागरिक शामिल हुए. बैठक के दौरान प्रस्तावित रेल परियोजना के पुराने मार्ग को बदलकर नये रूट से निर्माण किये जाने के निर्णय का पुरजोर विरोध किया गया.

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क्षेत्र के विकास पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा

वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पुराने प्रस्तावित मार्ग को छोड़कर नयी रेल लाइन का निर्माण किसी अन्य रूट से किया गया, तो बड़गड़ एवं भंडरिया क्षेत्र की वर्षों पुरानी रेल संपर्क की मांग अधूरी रह जायेगी. इससे क्षेत्र के विकास पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. समिति के पदाधिकारी जयप्रकाश मिंज ने कहा कि बरवाडीह–चिरमिरी–अंबिकापुर रेल परियोजना इस पिछड़े क्षेत्र के विकास की आधारशिला है. इसके रूट में परिवर्तन होने से आदिवासी और पिछड़े क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह कट जाएंगे. क्षेत्र की जनता किसी भी कीमत पर अपने अधिकारों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेगी.

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क्षेत्रवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है

बैठक को संबोधित करते हुए आनंद सोनी ने कहा कि पुराने प्रस्तावित रेल मार्ग के लिए वर्षों पहले सर्वेक्षण (सर्वे) सहित कई आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी थीं. अब अचानक नया रूट तय करना क्षेत्रवासियों की भावनाओं के साथ सरासर खिलवाड़ है. उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से पुराने प्रस्तावित मार्ग को बहाल कराने के लिए प्रभावी पहल करने की मांग की. वहीं, मनोज कुमार राज ने कहा कि इस क्षेत्र को परियोजना से अलग करने पर स्थानीय शिक्षा, रोजगार, व्यापार और समग्र विकास पर दूरगामी और नकारात्मक असर पड़ेगा. संदीप गुप्ता ने कहा कि यह लड़ाई पूरे क्षेत्र के भविष्य की है और मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा.

65 एकड़ रेलवे भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से पहुंचे श्रीकांत सिंह, राजदेव मिंज और मंगरहारा पंचायत के सरपंच उदय कुमार राम ने बताया कि इस परियोजना के तहत पूर्व में प्रस्तावित रेलवे जंक्शन बलरामपुर के सरनाडीह गांव में निर्धारित था. रेलवे विभाग की लगभग 65 एकड़ भूमि आज भी सरकारी ऑनलाइन अभिलेखों में रेलवे के नाम ही दर्ज है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने उक्त भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है और राजनीतिक रसूख के कारण पुराने प्रस्तावित रेल मार्ग के निर्माण में बाधा उत्पन्न की जा रही है. इस मामले से बलरामपुर के कलेक्टर को अवगत कराया जा चुका है तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में भी मामला विचाराधीन है.

आंदोलन को तेज करने के लिए जनजागरण अभियान

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पुराने प्रस्तावित रेल मार्ग से ही परियोजना का निर्माण सुनिश्चित कराने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा. इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों, रेल मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों को स्मार-पत्र (ज्ञापन) सौंपा जाएगा. मांगें पूरी न होने पर चरणबद्ध आंदोलन को और तेज किया जायेगा.

कार्यक्रम का संचालन जितेंद्र चंद्रवंशी ने किया. अंत में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया. इस अवसर पर जिला परिषद प्रतिनिधि राधेश्याम जायसवाल, बड़गड़ मुखिया प्रतिनिधि दिनेश लकड़ा, मदगड़ी मुखिया प्रतिनिधि सत्यानंद बाखला, विधायक प्रतिनिधि ओमप्रकाश, भाजपा मंडल अध्यक्ष बजरंग प्रसाद, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष अर्जुन मिंज, सुरेश केशरी, अरविंद जायसवाल, आजाद अंसारी, अखिलेश पांडेय, कौशर आलम, राहुल गुप्ता, रिशु सोनी, ललन बैठा, दीनानाथ सोनी सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे.

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