जंतर-मंतर पर सादे कपड़ों में पुलिस पर उठे सवाल, दिल्ली पुलिस ने जारी की नई गाइडलाइन

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दिल्ली पुलिस, फोटो- पीटीआई

दिल्ली पुलिस, फोटो- पीटीआई

Jantar Mantar: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे सवालों के बीच दिल्ली पुलिस ने नई गाइडलाइन जारी की है. अब प्रदर्शन स्थल पर तैनात पुलिसकर्मियों को वर्दी में ही ड्यूटी करनी होगी.

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Jantar Mantar: जंतर-मंतर पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों को अब वर्दी पहनकर ही ड्यूटी करनी होगी. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने निर्देश जारी किया है कि प्रदर्शन स्थल पर कोई भी पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में ड्यूटी नहीं करेगा. यह फैसला सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद लिया गया है. मंगलवार को सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें कुछ लोग सादे कपड़ों में प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाते नजर आए. इन वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर जोरदार प्रतिक्रियाएं आईं.

CJP ने दिल्ली पुलिस से पूछे सवाल

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिल्ली पुलिस से सवाल किया कि सादे कपड़ों में लाठी लेकर प्रदर्शनकारियों पर हमला करने वाले लोग कौन थे. पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर हमला करने के लिए बाहरी लोगों का इस्तेमाल किया गया और मामले की जांच की मांग की.

दिल्ली पुलिस ने दर्ज कीं 10 FIR

इधर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों को लेकर दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में 10 एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं. पुलिस के अनुसार, पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में चार एफआईआर दर्ज की गई हैं, जबकि कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में तीन मामले दर्ज हुए हैं. इसके अलावा मंदिर मार्ग, बाराखंबा रोड और कर्तव्य पथ पुलिस स्टेशनों में एक-एक एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस ने बताया कि सभी मामले प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने, कथित हिंसा और अन्य घटनाओं से जुड़े हैं. इन मामलों की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी.

पुलिस का आरोप- प्रदर्शनकारियों ने किया नियमों का उल्लंघन

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोमवार को नई दिल्ली इलाके में हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने आक्रामक और हिंसक व्यवहार किया. पुलिस के मुताबिक, बार-बार चेतावनी और निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद कुछ लोगों ने क्षेत्र खाली नहीं किया और नियमों का उल्लंघन किया.

250 से ज्यादा वीडियो की जांच कर रही है पुलिस

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने कथित हिंसा, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ के मामले में पांच एफआईआर दर्ज की थीं. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि घटनाएं किसी पूर्व नियोजित योजना का हिस्सा थीं या नहीं. प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान के लिए 250 से अधिक वीडियो की जांच की जा रही है.

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी है आंदोलन

प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून से आंदोलन जारी है. इसी क्रम में मंगलवार (21 जुलाई) को हजारों छात्र और युवा जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे थे. संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ की रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों के साथ उनकी झड़प हो गई. इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. इस कार्रवाई के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए.

हाईकोर्ट ने सरकार और दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब

दिल्ली हाई कोर्ट ने विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के आरोपों से जुड़ी जनहित याचिकाओं (PIL) पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैमरा फुटेज और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड तय SOP के अनुसार सुरक्षित रखे जाएं, ताकि जांच के दौरान उनका उपयोग किया जा सके. हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 सितंबर की तारीख तय की है।

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

वहीं, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया. प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ से याचिकाकर्ता के वकील ने पुलिस की कथित बर्बरता से जुड़े वीडियो का हवाला देते हुए जल्द सुनवाई की मांग की. इसपर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट के पास वीडियो देखने का समय नहीं है और याचिकाकर्ता से अदालत का समय बर्बाद नहीं करने को कहा.

क्या है पूरा मामला?

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हजारों छात्र और युवा परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं के विरोध में संसद मार्च निकाल रहे थे. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय की जाए. मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद बल प्रयोग किया गया.

Also Read:CJP की याचिका पर तत्काल सुनवाई से SC का इनकार, कहा- 'वीडियो देखने का वक्त नहीं'


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प्रीतीश सहाय

लेखक के बारे में

By प्रीतीश सहाय

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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