102 साल पुराने तरीके से कोरोना का ईलाज, अमेरिका में स्वस्थ हुए मरीज के ब्लड प्लाज्मा से होगी घातक वायरस की छुट्टी

Updated at : 30 Mar 2020 2:27 AM (IST)
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102 साल पुराने तरीके से कोरोना का ईलाज, अमेरिका में स्वस्थ हुए मरीज के ब्लड प्लाज्मा से होगी घातक वायरस की छुट्टी

कोरोना की वजह से पूरी दुनिया में कोहराम मचा हुआ है. सभी देशों के वैज्ञानिक इस वायरस को रोकने के तरीके ईजाद करने में जुटे हुए हैं. वहीं, अमेरिका ने 102 साल पुराने तरीके पर काम करना शुरू कर दिया है. अमेरिका के ह्यूस्टन के एक प्रमुख अस्पताल ने कोविड-19 से ठीक हुए एक मरीज का खून इस बीमारी से गंभीर रूप से पीड़ित एक रोगी को चढ़ाया है और यह प्रायोगिक इलाज आजमाने वाला देश का ऐसा पहला चिकित्सालय बन गया है.

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नयी दिल्ली : कोरोना की वजह से पूरी दुनिया में कोहराम मचा हुआ है. सभी देशों के वैज्ञानिक इस वायरस को रोकने के तरीके ईजाद करने में जुटे हुए हैं. वहीं, अमेरिका ने 102 साल पुराने तरीके पर काम करना शुरू कर दिया है. अमेरिका के ह्यूस्टन के एक प्रमुख अस्पताल ने कोविड-19 से ठीक हुए एक मरीज का खून इस बीमारी से गंभीर रूप से पीड़ित एक रोगी को चढ़ाया है और यह प्रायोगिक इलाज आजमाने वाला देश का ऐसा पहला चिकित्सालय बन गया है. घातक कोरोना वायरस से पीड़ित होने के बाद दो सप्ताह से अधिक समय तक अच्छी सेहत में रहे एक व्यक्ति ने ब्लड प्लाज्मा दान दिया है. इस व्यक्ति ने यह ब्लड प्लाज्मा ह्यूस्टन मेथोडिस्ट हॉस्पीटल में ‘कोनवालेस्सेंट सीरम थेरेपी’ के लिए दिया है. ईलाज का यह तरीका 1918 के ‘स्पैनिश फ्लू’ महामारी के समय का है.

अमेरिका समेत चार देश अपनाऐंगे कोरोना से निबटने का दक्षिण कोरियाई मॉडल : कोरोना से निबटने के दक्षिण कोरिया के प्रयासों की चौतरफा तारीफों के बीच कनाडा, सऊदी अरब, स्पेन व अमेरिका ने कोरोना से निबटने के मॉडल पर राष्ट्रपति मून-जे-इन से संपर्क किया है.

प्रधानमंत्री चुंग सी-क्युन ने विदेशी मीडिया से बातचीत में ‘दक्षिण कोरिया मॉडल’ की सफलता के राज शेयर किये हैं. पीएम चुंग ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में दक्षिण कोरिया का अनुभव आगे एक केस स्टडी के रूप में देखा जा सकता है. उल्लेखनीय है कि अमेरिका में कोरोना के सबसे अधिक मरीज हैं. चुंग ने बड़ी स्पष्टता के साथ अपनी बात रखी और कहा कि हमारे प्रयास चार अवधारणा पर टिके हैं- तेजी, पारदर्शिता, इनोवेशन और जनभागीदारी.

शुरू हुई ‘कोनवालेस्सेंट सीरम थेरेपी’ केवल लॉकडाउन ही काफी नहीं

‘यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान’ के निदेशक डॉक्टर एसके सरीन ने सरकार को सुझाव दिया है कि भारत में संक्रमण रोकने के लिए केवल लॉकडाउन ही काफी नहीं है. प्रत्येक संदिग्ध के संपर्क में आये हर एक व्यक्ति की पहचान के लिए चीन और दक्षिण कोरिया की तर्ज पर जीपीएस तकनीक का इस्तेमाल करना होगा.

सूंघने और स्वाद की क्षमता खोना हो सकते हैं कोरोना के शुरुआती लक्षण : रिपोर्ट

सूंघने व स्वाद की क्षमता खोना कोरोना के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं. अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑटोलैरीन्जॉलोजी के सीइओ जेम्स सी डेनेनी ने कहा कि वर्तमान में अमेरिका के साथ-साथ दुनियाभर के कई देशों से कोविड-19 से संबंधित मरीजों में सूंघने और स्वाद की क्षमता खोने की रिपोर्टें आयी हैं. इन लक्षणों की रिपोर्टों को देखते हुए एएओ-एचएनएस ने कोरोना वायरस संक्रमण की जांच में सूंघने और स्वाद की क्षमता खोने को भी शामिल करने का प्रस्ताव दिया है.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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