कावेरी नदी विवाद : विजय के मंत्री का कर्नाटक CM पर हमला, कहा- स्टालिन की सुनते हैं, कांग्रेस की नहीं

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कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार (बाएं) और तमिलनाडु के सीएम जोसेफ विजय (फोटो : X)

कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार (बाएं) और तमिलनाडु के सीएम जोसेफ विजय (फोटो : X)

कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच सियासी तनाव बढ़ गया है. मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के करीबी मंत्री आर. निर्मलकुमार ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया है.

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Cauvery Water Dispute : कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की पहल के कुछ ही दिनों बाद उनकी सरकार के वरिष्ठ मंत्री आर. निर्मलकुमार ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि शिवकुमार अपनी पार्टी कांग्रेस की नहीं, बल्कि डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन की बात मानते हैं.

'स्टालिन कहेंगे तो वही करेंगे'

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार पत्रकारों से बातचीत में निर्मलकुमार ने कहा, "डीके शिवकुमार कांग्रेस नेतृत्व की भी नहीं सुनते. अगर एमके स्टालिन या उनका परिवार कुछ कहेगा, तो वह उसी के अनुसार काम करेंगे. दोनों के बीच बेहद करीबी रिश्ते हैं."

उन्होंने दावा किया कि डीएमके लगातार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि कावेरी विवाद में मुख्यमंत्री विजय राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए हैं.


DMK और AIADMK पर भी साधा निशाना

निर्मलकुमार ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी के बावजूद डीएमके ने अलग से याचिका दायर कर मामले को उलझाने की कोशिश की. उन्होंने सवाल उठाया कि जब डीएमके सत्ता में थी, तब उसने कावेरी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में कोई याचिका क्यों नहीं दायर की. इसके साथ ही उन्होंने AIADMK पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विधानसभा में प्रस्ताव का समर्थन करने के बाद अदालत में उसे चुनौती देना विरोधाभासी है.

बातचीत की जगह अब टकराव

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री विजय ने कावेरी विवाद पर डीके शिवकुमार से मुलाकात का प्रस्ताव दिया था, लेकिन कर्नाटक की ओर से इसे फिलहाल टाल दिया गया. इसके बाद दोनों राज्यों के बीच सियासी माहौल और गर्म हो गया है. हालांकि तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल बंटवारे के अलावा व्यापार, औद्योगिक परियोजनाओं और सीमा पार बुनियादी ढांचा विकास जैसे कई मुद्दों पर सहयोग भी जरूरी माना जाता है.

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आलोक पाठक

लेखक के बारे में

By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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