Atul Subhash Story : पत्नी की प्रताड़ना पर वीडियो बनाकर अतुल सुभाष ने लगाई फांसी, सिस्टम पर उठाए गंभीर सवाल

अतुल सुभाष
Atul Subhash Story : अतुल सुभाष की पत्नी निकिता सिंघानिया ने उसपर कई तरह के झूठे मामले दर्ज कराये थे, ऐसा दावा अतुल ने अपनी मौत से पहले किया है. साथ ही उसका परिवार भी यह कह रहा है कि अतुल पर उसकी पत्नी ने झूठे मामले दर्ज कराए थे.
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Atul Subhash Story : अतुल सुभाष आत्महत्या मामले में बेंगलुरु की मराठाहल्ली पुलिस ने उसके भाई विकास कुमार की शिकायत पर अतुल की पत्नी निकिता सिंघानिया सहित चार लोगों के खिलाफ बीएनएस की धारा 108 और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर लिया है. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.34 वर्षीय अतुल सुभाष ने लगभग एक घंटे का वीडियो सूट करने के बाद 9 दिसंबर को आत्महत्या की और उस वीडियो में अपनी पत्नी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. अतुल सुभाष ने 24 पेज का सुसाइड नोट भी लिखा है.
अतुल सुभाष पर पत्नी ने दहेज कानूनों के तहत दर्ज कराया था मामला
अतुल सुभाष की पत्नी निकिता सिंघानिया ने उसपर कई तरह के झूठे मामले दर्ज कराये थे, ऐसा दावा अतुल ने अपनी मौत से पहले किया है. साथ ही उसका परिवार भी यह कह रहा है कि अतुल पर उसकी पत्नी ने झूठे मामले दर्ज कराए थे. निकिता सिंघानिया अपने बेटे से अतुल को मिलने नहीं देती है और उसने गुजारा भत्ते के रूप में तीन करोड़ की मांग की थी. पत्नी के झूठे आरोपों से परेशान होकर आईटी इंजीनियर अतुल सुभाष ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली और इसकी जानकारी अपने भाई को मेल पर दिया. अतुल ने अपनी पत्नी, जज और सास के अतिरिक्त दो और लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है. उसने बताया कि उसपर पत्नी ने अप्राकृतिक शारीरिक संबंध, मर्डर सहित नौ मामले में केस दर्ज कराया है.
वीडियो में कहा-देश में सिर्फ महिलाओं के लिए कानून
पत्नी से परेशान अतुल सुभाष ने देश के कानूनों के प्रति भी अपनी निराशा व्यक्त की और कहा कि यहां सिर्फ महिलाओं के लिए कानून है, हमारे जैसे लोगों की कोई सुनने वाला नहीं है. मुझपर झूठा केस दर्ज किया गया है. लेकिन मैं अपनी पत्नी को पैसा देने की बजाय मरना पसंद करूंगा. मैं कमाऊंगा और वह मुझे प्रताड़ित करके मुझसे पैसे लेगी यह अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा.
वीडियो में बेटे को लेकर बताई अंतिम इच्छा
अतुल ने सुसाइड से पहले जो वीडियो बनाया है उसमें यह कहा है कि मेरी अंतिम इच्छा है कि मेरे बेटे को मेरे माता-पिता को सौंप दिया जाए क्योंकि वह मेरा अंतिम अंश है. मेरी पत्नी उसका भविष्य खराब कर देगी. मेरे माता-पिता और भाई उसकी देख-भाल कर लेंगे. जिस वक्त मुझे माता-पिता का सहारा बनना चाहिए था, मैं उन्हें दुख देकर जा रहा हूं.
पुरुष अधिकार कार्यकर्ताओं ने सिस्टम पर लगाए गंभीर आरोप
अतुल सुभाष की आत्महत्या पर चिंता जताते हुए पुरुष अधिकार कार्यकर्ता बरखा त्रेहन ने कहा कि अतुल सुभाष पहले व्यक्ति नहीं हैं, जिनके साथ यह दुर्घटना हुई है. उनके जैसे लाखो पुरुष हैं जो महिलाओं से पीड़ित हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं होती है, क्योंकि देश में पुरुषों के लिए कोई कानून नहीं है.बरखा ने पूरे सिस्टम को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया. महिला सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों का दुरुपयोग हो रहा है और इसे सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है. अतुल सुभाष अपनी पत्नी से परेशान था.
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लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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