राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर फिर बोला हमला, कहा यह सांठगांठ वाले पूंजीवाद की पक्षधर
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Apr 2015 4:32 PM
तोंगलाबाद, महाराष्ट्र: नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ हमला बोलते हुए कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज आरोप लगाया कि इस सरकार ने ऐसे समय में किसानों को बेसहारा छोड दिया है जब देश कृषि संकट के दौर से गुजर रहा है. उन्होंने इसके अलावा कहा कि यह सरकार ‘सांठगांठ वाले पूंजीवाद’ की पक्षधर है. […]
तोंगलाबाद, महाराष्ट्र: नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ हमला बोलते हुए कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज आरोप लगाया कि इस सरकार ने ऐसे समय में किसानों को बेसहारा छोड दिया है जब देश कृषि संकट के दौर से गुजर रहा है. उन्होंने इसके अलावा कहा कि यह सरकार ‘सांठगांठ वाले पूंजीवाद’ की पक्षधर है.
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के प्रभावित गांवों में अपनी दिन भर की ‘पदयात्रा’ शुरु करते हुए उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हालात बहुत अशांत करने वाले हैं. वहां लोगों में ‘बेसहारा छोड दिए जाने की भावना’ है. सरकार का काम यह है कि जब लोग कष्ट झेल रहे हों तो वह मदद का हाथ बढाए. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन महाराष्ट्र और केंद्र में बैठी सरकारों ने उन्हें धोखा दिया है.’’
हाल में अचानक किए पंजाब के दौरे और वहां संकटग्रस्त किसानों से मिलकर लौटे कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा ,‘‘देशभर के किसानों की शिकायत है कि भाजपा सरकार ने उन्हें बोनस से वंचित किया है. यह सरकार सिर्फ कुछ सांठगांठ करने वाले पूंजीपतियों की पक्षधर है और उसे किसानों, गरीब लोगों और मजदूरों का संरक्षण करने में कोई दिलचस्पी नहीं है.’’
राहुल ने आज सुबह महाराष्ट्र के अमरावती जिले के गुंजी गांव से ‘संवाद यात्रा’ की शुरुआत की. यह यात्रा क्षेत्र में किसानों और कृषि क्षेत्र के संकटों को रेखांकित करने के लिए है.राहुल गुंजी से रामगांव के बीच कुल पांच गांवों में जाएंगे और बेमौसम बारिश के कारण फसलों का नुकसान झेलने वाले किसानों से मुलाकात करेंगे. वह उन किसानों के परिवारों से भी मुलाकात करेंगे, जिन्होंने फसल नष्ट होने के कारण खुदकुशी कर ली है.
हीरापुर गांव के एक मंदिर में जूट से बनी चटाई पर बैठे कांग्रेस उपाध्यक्ष ने पीडित किसानों के एक समूह की बात बहुत धैर्य से सुनी.ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ‘‘बीमा कंपनियां मुआवजा देने के लिए कुछ चुनिंदा इलाकों का ही चयन कर रही हैं और बाकी किसानों को उनके बकाया लाभ से वंचित रखा जा रहा है.’’
एक ग्रामीण पांडुरंग ने राहुल से शिकायत की कि बीमा कंपनियां अपने एजेंटों को भेज देती हैं, जो इन विदेशी बीमा कंपनियों के लिए धंधा बटोरते हैं. इससे उन्हें तो फायदा होता है, लेकिन आखिरकार किसान को नुकसान उठाना पडता है.
इनमें से कई किसानों ने कहा कि उन्हें कीटनाशक और उर्वरक बेहद उंचे दामों पर दिए जा रहे हैं जबकि इन चीजों की उत्पादन लागत काफी कम है.ग्रामीणों ने राहुल का ध्यान बेमौसम बारिश के कारण उनकी सोया फसल को पहुंचे नुकसान की ओर भी खींचा. एक अन्य किसान ने कहा कि नुकसान के कारण सोयाबीन की कीमतों में भारी गिरावट आई है.
भूमि अधिग्रहण विधेयक, 2015 का विरोध संसद में करने की राहुल की पहल की सराहना करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें इस बात का डर है कि खेतों पर उद्योगों का अधिकार हो जाएगा.
ग्रामीणों ने कांग्रेस नेता को बताया कि वर्ष 2006 से 2014 तक जिले के धमनगांव तालुका में लगभग 171 किसान आत्महत्या कर चुके हैं. तेज धूप के बीच राहुल एक गांव से दूसरे गांव तक पैदल ही गए. इस पदयात्रा में कांग्रेस के कार्यकर्ता बडी संख्या में शामिल थे. इनमें खासतौर पर युवा कांग्रेस के सदस्य थे. इन लोगों के हाथों में पार्टी के झंडे, बैनर और पोस्टर थे.
किसानों के साथ हुई इस बैठक के दौरान मौजूद महाराष्ट्र विधानसभा में नेता विपक्ष और पूर्व कृषि मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने फसल बीमा योजना की जटिलताओं के बारे में 44 वर्षीय कांग्रेस उपाध्यक्ष को जानकारी दी.अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव मुकुल वासनिक और कांग्रेस की ओर से राज्यसभा के सदस्य अविनाश पांडे भी राहुल के साथ थे.
इससे पहले, गुंजी में राहुल ने नीलेश वाल्के और अंबादास वाहिले नामक किसानों के परिजनों से भी मुलाकात की थी. इन दोनों किसानों ने हाल ही में खुदकुशी की है.
1200 लोगों की आबादी वाला गुंजी इस ‘पदयात्रा’ का पहला पडाव था. यहां राहुल ने अनाथालयों के बच्चों के एक समूह के साथ भी कुछ समय के लिए बातचीत की.इसके बाद वह शाहपुर गांव गए. इस क्षेत्र में भी किसानों ने बडी संख्या में खुदकुशी की है. अमरावती जिले में गुंजी से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस क्षेत्र का महाराष्ट्र विधानसभा में प्रतिनिधित्व कांग्रेस के वीरेंद्र जगताप करते हैं.
महाराष्ट्र देश के उन राज्यों में से एक है, जो भारी कृषि संकट का सामना कर रहे हैं. विदर्भ क्षेत्र के अमरावती खंड में इस साल कई किसानों ने खुदकुशी की है.
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