सुषमा स्‍वराज ने राजनीतिक जीवन में कई रिकॉर्ड बनाये, पढ़ें पूरी यात्रा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Aug 2019 11:27 PM

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नयी दिल्ली : पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्‍होंने मंगलवार देर रात एम्स में आखिरी सांस ली. स्वराज को दिल का दौरा पड़ने पर रात 10 बजकर 20 मिनट पर एम्‍स में भर्ती कराया गया था. उन्हें सीधे आपातकालीन वॉर्ड में ले जाया गया. सुषमा स्‍वराज […]

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नयी दिल्ली : पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्‍होंने मंगलवार देर रात एम्स में आखिरी सांस ली. स्वराज को दिल का दौरा पड़ने पर रात 10 बजकर 20 मिनट पर एम्‍स में भर्ती कराया गया था. उन्हें सीधे आपातकालीन वॉर्ड में ले जाया गया.

सुषमा स्‍वराज का जन्‍म 14 फरवरी 1952 में हरियाणा के अंबाला छावनी हुआ था. उन्होंने अम्बाला के सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत तथा राजनीति विज्ञान में स्नातक किया.

1970 में उन्हें अपने कालेज में सर्वश्रेष्ठ छात्रा के सम्मान से सम्मानित किया गया था. वे तीन साल तक लगातार एसडी कालेज छावनी की एन सी सी की सर्वश्रेष्ठ कैडेट और तीन साल तक राज्य की श्रेष्ठ वक्ता भी चुनी गईं.

इसके बाद उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चण्डीगढ़ से कानून की शिक्षा प्राप्त की. पंजाब विश्वविद्यालय से भी उन्हें 1973 में सर्वोच्च वक्ता का सम्मान मिला था. 1973 में ही स्वराज भारतीय सर्वोच्च न्यायलय में अधिवक्ता के पद पर कार्य करने लगी.

13 जुलाई 1975 को उनका विवाह स्वराज कौशल के साथ हुआ. जो सर्वोच्च न्यायलय में उनके सहकर्मी और साथी अधिवक्ता थे. कौशल बाद में छह साल तक राज्यसभा में सांसद रहे और इसके अतिरिक्त वे मिजोरम प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं. स्वराज दम्पत्ति की एक पुत्री है बांसुरी, जो लंदन के इनर टेम्पल में वकालत कर रही हैं.

* सुषमा स्‍वराज का राजनीतिक जीवन

70 के दशक में सुषमा स्वराज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गयी थी. उनके पति स्वराज कौशल सोशलिस्ट नेता जॉर्ज फर्नांडिस के करीबी थे और इस कारण ही वे भी 1975 में जॉर्ज फर्नांडिस की विधिक टीम का हिस्सा बन गयी.

आपातकाल के समय उन्होंने जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया. आपातकाल की समाप्ति के बाद वह जनता पार्टी की सदस्य बन गयी. 1977 में उन्होंने अंबाला छावनी विधानसभा क्षेत्र से हरियाणा विधानसभा के लिए विधायक का चुनाव जीता और चौधरी देवी लाल की सरकार में 1977-79 के बीच राज्य की श्रम मन्त्री रह कर 25 साल की उम्र में कैबिनेट मंत्री बनने का रिकार्ड बनाया था. 1979 में तब 27 वर्ष की स्वराज हरियाणा राज्य में जनता पार्टी की राज्य अध्यक्ष बनी.

80 के दशक में भारतीय जनता पार्टी के गठन पर वह भी इसमें शामिल हो गयी. इसके बाद 1987 से 1990 तक पुनः वह अंबाला छावनी से विधायक रही और भाजपा-लोकदल संयुक्त सरकार में शिक्षा मंत्री रही. अप्रैल 1990 में उन्हें राज्यसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया, जहां वह 1996 तक रही. 1996 में उन्होंने दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीता और 13 दिन की वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री रही.

मार्च 1998 में उन्होंने दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से एक बार फिर चुनाव जीता. इस बार फिर से उन्होंने वाजपेयी सरकार में दूरसंचार मंत्रालय के अतिरिक्त प्रभार के साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में शपथ ली थी. 19 मार्च 1998 से 12 अक्टूबर 1998 तक वह इस पद पर रही. इस अवधि के दौरान उनका सबसे उल्लेखनीय निर्णय फिल्म उद्योग को एक उद्योग के रूप में घोषित करना था, जिससे कि भारतीय फिल्म उद्योग को भी बैंक से कर्ज मिल सकता था.

अक्टूबर 1998 में उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और 12 अक्टूबर 1998 को दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला. हालांकि, 3 दिसंबर 1998 को उन्होंने अपनी विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया और राष्ट्रीय राजनीति में वापस लौट आई.

सितंबर 1999 में उन्होंने कर्नाटक के बेल्लारी निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के विरुद्ध चुनाव लड़ा. अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने स्थानीय कन्नड़ भाषा में ही सार्वजनिक बैठकों को संबोधित किया था. हालांकि वह 7 प्रतिशत के मार्जिन से चुनाव हार गयी.

अप्रैल 2000 में वह उत्तर प्रदेश के राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद में वापस लौट आईं. 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश के विभाजन पर उन्हें उत्तराखण्ड में स्थानांतरित कर दिया गया.

उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल में फिर से सूचना और प्रसारण मंत्री के रूप में शामिल किया गया था, जिस पद पर वह सितंबर 2000 से जनवरी 2003 तक रही. 2003 में उन्हें स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और संसदीय मामलों में मंत्री बनाया गया और मई 2004 में राजग की हार तक वह केंद्रीय मंत्री रही.

अप्रैल 2006 में स्वराज को मध्य प्रदेश राज्य से राज्यसभा में तीसरे कार्यकाल के लिए फिर से निर्वाचित किया गया. इसके बाद 2009 में उन्होंने मध्य प्रदेश के विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से 4 लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की. 21 दिसंबर 2009 को लालकृष्ण आडवाणी की जगह 15वीं लोकसभा में सुषमा स्वराज विपक्ष की नेता बनी और मई 2014 में भाजपा की विजय तक वह इसी पद पर आसीन रही.

साल 2014 में वे विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा लोकसभा की सांसद निर्वाचित हुई हैं और उन्हें भारत की पहली महिला विदेश मंत्री होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. भाजपा में राष्ट्रीय मंत्री बनने वाली पहली महिला सुषमा के नाम पर कई रिकार्ड दर्ज हैं. वे भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता बनने वाली पहली महिला थीं. वे कैबिनेट मंत्री बनने वाली भी भाजपा की पहली महिला थीं. वे दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री भी रहीं और भारत की संसद में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार पाने वाली पहली महिला भी रहीं.

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