जस्टिस सीकरी ने कॉमनवेल्ल्थ ट्राइब्यूनल में नामित करने के लिए दी गयी सहमति वापस ली

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नयी दिल्ली : न्यायमूर्ति एके सीकरी ने उस सरकारी प्रस्ताव के लिए दी गई अपनी सहमति रविवार को वापस ले ली जिसके तहत उन्हें लंदन स्थित राष्ट्रमंडल सचिवालय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (सीएसएटी) में अध्यक्ष/सदस्य के तौर पर नामित किया जाना था. प्रधान न्यायाधीश के बाद देश के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के एक करीबी सूत्र ने […]

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नयी दिल्ली : न्यायमूर्ति एके सीकरी ने उस सरकारी प्रस्ताव के लिए दी गई अपनी सहमति रविवार को वापस ले ली जिसके तहत उन्हें लंदन स्थित राष्ट्रमंडल सचिवालय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (सीएसएटी) में अध्यक्ष/सदस्य के तौर पर नामित किया जाना था.

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प्रधान न्यायाधीश के बाद देश के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के एक करीबी सूत्र ने बताया कि न्यायाधीश ने रविवार शाम कोसरकारको दी गयी अपनी सहमति वापस ले ली. सूत्रों ने कहा, सरकार ने इस जिम्मेदारी के लिए पिछले महीने उनसे संपर्क किया था. उन्होंने अपनी सहमति दी थी. इस पद पर रहते हुए प्रतिवर्ष दो से तीन सुनवाई के लिए वहां जाना होता और यह बिना मेहनताना वाला पद था.

इससे पहले सरकारी सूत्रों की ओर से कहा जा रहा था कि न्यायमूर्ति एके सीकरी को लंदन स्थित सीएसएटी के सदस्य के लिए मनोनीत किया गया है. हालांकि, इस पर विवाद छिड़ गया था और कांग्रेस ने सीबीआई निदेशक को हटाये जाने पर उनकी सहमति से इसे जोड़ा था और सरकार से जवाब मांगा था. माना जा रहा है कि इस विवाद के चलते ही सीकरी ने सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. सीकरी 6 मार्च को सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होनेवाले हैं.

गौरतलब है कि सीएसएटी का गठन कॉमनवेल्थ देशों के मेमोरैंडम का पालन सुनिश्चित करने के लिए किया गया था. इस मेमोरैंडम को 2005 में नये सिरे से तैयार किया गया था. सीएसएटी में सदस्यों का मनोनयन पांच साल के लिए किया जाता है. इसमें अध्यक्ष समेत आठ सदस्य होते हैं.

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