World Cancer Day : जिंदगी की जंग में कैंसर को मात देनेवालों पर पढ़िए यह खास रिपोर्ट

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Feb 2020 10:06 AM

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-मैं हूं और मैं रहूंगा अंतरराष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ ने पहली बार 1933 में जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में विश्व कैंसर दिवस मनाया था. इसका उद्देश्य था, इस गंभीर बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता लाना. कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिससे आज सबसे ज्यादा लोगों की मृत्यु हो रही है. तमाम प्रयासों के बावजूद कैंसर के […]

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-मैं हूं और मैं रहूंगा

अंतरराष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ ने पहली बार 1933 में जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में विश्व कैंसर दिवस मनाया था. इसका उद्देश्य था, इस गंभीर बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता लाना. कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिससे आज सबसे ज्यादा लोगों की मृत्यु हो रही है. तमाम प्रयासों के बावजूद कैंसर के मरीजों की संख्या में कमी नहीं आ रही है. इसलिए हर वर्ष चार फरवरी को कैंसर दिवस मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस भयानक बीमारी कैंसर से होनेवाले नुकसान के बारे में बताया जा सके. I Am and I Will अर्थात मैं हूं और मैं रहूंगा इस बार की थीम है. इस थीम का संदेश है कि कैंसर जैसी खतरनाक बीमार को हमें हराना है. अपनी जिंदगी को जीना है. राजीव पांडेय @ रांची की यह रिपोर्ट वैसे लोगों पर ही है, जिन्होंने जिंदगी की जंग में कैंसर को मात दी. इनकी हिम्मत दूसरों को प्रेरणा दे रही है.
कैंसर रोगी हो सकते हैं पूरी तरह से स्वस्थ
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 33 फीसदी कैंसर रोगी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. वहीं 33 फीसदी कैंसर रोगी के जीवन को बेहतर इलाज से बढ़ाया जा सकता है़ हालांकि सबसे बड़ी चिंता यह है कि 80 से 85 फीसदी लोग कैंसर की अंतिम अवस्था में अस्पताल पहुंचते हैं. इस कारण उन्हें बचाने में परेशानी होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर को रोका तो नहीं जा सकता है, लेकिन जागरूकता फैला कर इस रोग से बचाया जरूर जा सकता है.
शैल शर्मा: कैंसर रोगियों को दे रही हैं हौसला
बोकारो की रहने वाली 49 वर्षीया शैल शर्मा को पांच वर्ष पहले ब्रेस्ट कैंसर का पता चला़ इसके बाद तो मानों पूरा परिवार ही टूट गया. खुद शैल शर्मा भी चिंतित रहने लगीं कि उनका जीवन बचेगा या नहीं. इसके बाद पति विपिन भूषण शर्मा ने पत्नी की हिम्मत दी और इलाज से पूर्ण स्वस्थ होने का विश्वास दिलाया. डॉक्टरों ने भी ज्यादा जीवन नहीं होने की बात कहकर उन्हें हताश कर दिया था़ लेकिन शैल बेहतर इलाज और मजबूत इच्छा शक्ति के दम पर कैंसर को मात दे रही हैं. शैल बताती हैं कि वह प्रतिदिन नियमित दो घंटे योग करती हैं. अब वह कैंसर रोगियों को हौसला देती हैं कि कैसे जीवन को जीया जा सकता है.
जोकिम डांग: जीत गये जिंदगी की बड़ी जंग
हिनू के रहनेवाले सीआइएसएफ के जवान जोकिम डांग वर्ष 2014 में कैंसर से पीड़ित हुए. अस्पताल में उनको पता चला कि मल्टीपल कैंसर है, लेकिन उन्होंने जिंदगी से हार नहीं मानी. विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह पर इलाज कराया. आज जोकिम डांग पूरी तरह स्वस्थ हैं. पहले की तरह ऑफिस में सेवा दे रहे हैं. वह कैंसर रोगियों को जीवन जीने की कला सीखा रहे हैं.
सुबोया: कैंसर को मात देकर जी रहीं जिंदगी
पलामू निवासी सुबोया देवी को तीन साल पहले ब्रेस्ट कैंसर का पता चला. इसके बाद पूरा परिवार सकते में आ गया. डॉक्टरों ने कहा कि इलाज से आप पूरी तरह स्वस्थ हो सकती हैं. सुबोया देवी और परिजनों को हिम्मत दी़ फिर परिजन अस्पताल पहुंचे़ डॉ नम्रता मानसरिया ने जांच की़ इसमें पता चला कि ब्रेस्ट कैंसर पूरे स्तन में फैल गया है. ट्यूमर का आकार आठ किलो का हो चुका है़ इसके बाद सर्जरी की गयी़ कीमोथेरेपी के बाद सुबोया देवी पूरा स्वस्थ हैं.
आयुर्वेद में कैंसर का इलाज संभव
इंटीग्रेड मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉ एसके अग्रवाल के अनुसार झारखंड के जंगलों में उत्पन्न होनेवाली वन औषधियां में भी कैंसर से बचाव के गुण मौजूद हैं. वन औषधियों से बनी दवाओं में कैंसर की कोशिकाओं को रोकने और नष्ट करने की क्षमता रहती है. कचनार, भेलावा, सीताफल, पलाश, कालमेघ, शल्लकी व भुईचंपा जैसी औषधि से बनी दवाइयों के सेवन से कैंसर रोगियों को लाभ मिलता है. वहीं सदाबहार में बर्च, टेक्सस की औषधि से विकसित दवाओं का प्रयोग विभिन्न प्रकार के कैंसर में लाभ पहुंचाता है. अमृता, शतावर, मंडूकपर्णी, अश्वगंधा, कालमेघ, तुलसी, नीम, घृतकुमारी, मजीठ आदि आयुर्वेद की दवाइयां रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं.
फल-सब्जी में बचाने की क्षमता
अनार का रस, बीज व छिलके सभी अंगों में कैंसर के इलाज में लाभ पहुंचाते हैं. इसके अलावा अंगूर, आम, अंजीर और पपीता के सेवन से भी कैंसर मरीज को लाभ मिलता है. इसमें सर्वाधिक एंटीऑक्सीडेंट रसायन होते हैं, जो कैंसर के उत्तकों को बढ़ने से रोकते हैं. वहीं ब्रोकोली सब्जी, तीसी या अलसी के नियमित प्रयोग से कैंसर से बचाव होता है. अनेक वैज्ञानिक शोध में यह पता चला है कि कैंसर सहित अनेक रोगों में 20 से 40 ग्राम तीसी का उपयोग काफी फायेदामंद होता है.
हल्दी से भी कैंसर का इलाज
सब्जी-फल के अलावा रसोई में कई मसाले हैं, जो कैंसर से हमें बचाते हैं. कई पुस्तकों में हल्दी के गुण पर 20 वर्षों में 100 से अधिक शोध कार्य किये गये हैं. अमेरिका में हल्दी पर 20 से अधिक शोध कार्य किये गये हैं, जिससे कैंसर मरीजों को काफी लाभ पहुंचा है.
होमियोपैथी भी कारगर
होमियोपैथ चिकित्सक डॉ यूएस वर्मा के अनुसार होमियोपैथी में कैंसर के इलाज की दवाइयां मौजूद हैं. कैंसर रोगियों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए दवाइयां दी जाती हैं. वहीं कैंसर के लिए विशेष दवाइयां चलायी जाती है, जिससे मरीज को पूरा लाभ मिलता है.
कैंसर से बचाने में योग अहम
प्राणायाम का विशेष महत्व है. रेजक व पूरक (सांस लेने व छोड़ने) के नियमित अभ्यास से शरीर की ऊर्जा को बढ़ाया जा सकता है. अंदर का टॉक्सिन बाहर निकलता है, जो उत्तकों को स्वस्थ बनाता है. रेचक व पूरक के दौरान कुंभक लगाने से तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
कैंसर के खतरे को ऐसे पहचानें
तीन सप्ताह से अधिक समय तक मुंह या जीभ में घाव हो
भोजन निगलने में लगातार असुविधा हो या बदहजमी हो
पेशाब में परेशानी
तीन सप्ताह से अधिक खांसी या आवाज कर्कश होने पर
स्तन में सूजन अथवा कड़ापन या खिंचाव होने पर
चार-छह सप्ताह से ज्यादा समय तक बार-बार दस्त होना
असामान्य रक्त प्रवाह या मासिक धर्म के बाद भी रक्तश्राव की शिकायत होना
ये भी हैं संकेत
शरीर के किसी अंग में असामान्य सूजन या कड़ापन
तिल या मस्सा के आकार या रंग में परिवर्तन
लगातार बुखार या वजन में कमी होना
कैंसर में अधिकतर मरीज अंतिम अवस्था में इलाज कराने आते हैं, जिससे उनको बचाना मुश्किल होता है. कैंसर के प्रथम स्टेज में मरीज आ जायें, तो ठीक होने की संभावना ज्यादा रहती है. लक्षण होने पर तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से मिलना चाहिए.
डॉ रोहित कुमार झा,कैंसर रोग विशेषज्ञ
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