एलर्जी दूर करती है भ्रमर मुद्र, जानें विधि

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मां ओशो प्रिया, संस्थापक, ओशोधारा,सोनीपत बरसात की शुरुआत हो गयी है. ऐसे में अधिकांश लोगों को एलर्जी की समस्या होती है. खाने-पीने की चीजों से संवेदनशीलता होने के कारण या किसी अन्य परेशानी के कारण शरीर में कोई प्रतिक्रिया होती है, तो उसे एलर्जी कहा जाता है. शरीर पर होने वाली आम प्रतिक्रियाओं में अस्थमा, […]

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मां ओशो प्रिया, संस्थापक, ओशोधारा,सोनीपत

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बरसात की शुरुआत हो गयी है. ऐसे में अधिकांश लोगों को एलर्जी की समस्या होती है. खाने-पीने की चीजों से संवेदनशीलता होने के कारण या किसी अन्य परेशानी के कारण शरीर में कोई प्रतिक्रिया होती है, तो उसे एलर्जी कहा जाता है. शरीर पर होने वाली आम प्रतिक्रियाओं में अस्थमा, सूजन, दाग-धब्बे, पाचन संबंधी विकार आदि शामिल हैं. त्वचा रोग, खाज-खुजली, एग्जिमा, सफेद दाग, फोड़े-फुंसियां, शीतपित्त, बुखार आदि एलर्जी के लक्षण हैं. एलर्जी में त्वचा सूख जाती है, नसें कमजोर पड़ जाती हैं, त्वचा का रंग बदल जाता है तथा शरीर सूज कर भारी हो जाता है.

बेचैनी होती है. बार-बार प्यास लगती है, खाने में कुछ अच्छा नहीं लगता और उल्टी आदि की शिकायत रहती है. एलर्जी मुद्रा के लगाने से सभी प्रकार की एलर्जी दूर होती है. इसका नित्य प्रयोग करने से एलर्जी की पुरानी से पुरानी बीमारियां भी दूर होती हैं. हमारी रक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) मजबूत होती है. एलर्जी कि मुख्य कारण है मानसिक कमजोरी व हाइपरएक्टिविटी. इस मुद्रा में इन में लाभ होता है. हाइपरएक्टिव बच्चों में एलर्जी की बहुत शिकायत होती है. हाइपरएक्टिविटी वायु रोग है. इसलिए इस मुद्रा में वायु मुद्रा भी लगी हुई है.

विधि: पहले वायु मुद्रा बनाएं अर्थात तर्जनी उंगली को अंगूठे की जड़ में लगाएं. अब अंगूठे के शीर्ष को मध्यमा उंगली के नाखून के पास उंगली के शीर्ष के दायीं ओर रखें. शेष दोनों उंगलियां सीधी रखें.

कितनी देर : 7 मिनट दिन में 4 से 5 बार.

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