एक केले का पत्ता और 26 तरह के पकवान, जानें क्या है Onam Sadhya की परंपरा
ओणम साध्या
ओणम साध्या केरल की पारंपरिक शाकाहारी दावत है, जिसे केले के पत्ते पर परोसा जाता है. इसमें चिप्स, अचार, अवियल, सांभर, रसम से लेकर कई तरह के पायसम शामिल होते हैं. जानें साध्या में शामिल 26 लोकप्रिय व्यंजनों के नाम, परोसने का तरीका और इसका महत्व.
केरल का ओणम सिर्फ फूलों की रंगोली और त्योहार तक सीमित नहीं है. इस मौके पर बनने वाली ओणम साध्या भी खास आकर्षण होती है. केले के पत्ते पर परोसी जाने वाली यह पारंपरिक शाकाहारी दावत अपने अलग स्वाद और परोसने के तरीके के लिए जानी जाती है. साध्या में कई तरह के व्यंजन एक साथ परोसे जाते हैं.
क्या है ओणम साध्या?
मलयालम में ‘साध्या’ का मतलब दावत या भोज होता है. ओणम के मौके पर तैयार होने वाली साध्या को ओणसाध्या कहा जाता है. इसमें पूरी तरह शाकाहारी खाना बनाया जाता है और आमतौर पर इसे दोपहर के समय परोसा जाता है. खास बात यह है कि इसमें खाना प्लेट में नहीं, बल्कि केले के पत्ते पर सजाया जाता है.
साध्या में 26 व्यंजन होने की बात काफी प्रचलित है, लेकिन यह कोई तय संख्या नहीं है. अलग-अलग जगह और परिवार के हिसाब से व्यंजनों की संख्या कम या ज्यादा हो सकती है. बड़े आयोजनों में 30 से ज्यादा पकवान भी शामिल हो सकते हैं.
केले के पत्ते पर क्या-क्या मिलता है?
साध्या में सबसे पहले पत्ते पर नमक, पका केला, केले के चिप्स, शर्करा वराट्टी, पप्पडम, आम और नींबू का अचार तथा इंजी पुली जैसी चीजें रखी जाती हैं. इसके बाद थोरन, मेझुक्कुपुरट्टी, अवियल, ओलन, कालन, एरिसरी, कूटू करी, पचड़ी, किचड़ी और पुलिसरी जैसी सब्जियां व साइड डिश परोसी जाती हैं.
मुख्य भोजन में चोरू यानी चावल के साथ परिप्पु, सांभर और रसम शामिल होते हैं. अंत में संभारम यानी मसाला छाछ और अलग-अलग तरह के पायसम परोसे जाते हैं. इनमें अदा प्रधमन, पालदा पायसम और परिप्पु प्रधमन खास हैं.
साध्या का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
ओणम साध्या को सिर्फ खाना नहीं, बल्कि केरल की संस्कृति, परंपरा और सामूहिकता का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि ओणम के दौरान लोग राजा महाबली के स्वागत और समृद्धि की खुशी में मिलकर त्योहार मनाते हैं. साध्या इसी खुशी और मिल-जुलकर खाने की परंपरा का अहम हिस्सा है.
साध्या में अलग-अलग स्वादों का संतुलन भी देखने को मिलता है. खट्टा, मीठा, नमकीन, तीखा और हल्का कड़वा स्वाद कई व्यंजनों के जरिए एक साथ मिलता है.
कैसे खाएं साध्या?
साध्या आमतौर पर हाथ से खाई जाती है. चावल और करी को हाथ से मिलाकर छोटे निवाले बनाए जाते हैं. जो व्यंजन नहीं चाहिए, उसे दोबारा परोसने से विनम्रता से मना किया जा सकता है. खाना खत्म होने के बाद केले के पत्ते को अपनी ओर मोड़ना संतोष और भोजन की सराहना का संकेत माना जाता है.
इस तरह ओणम साध्या स्वाद के साथ-साथ अतिथि सत्कार, समानता और मिल-बांटकर त्योहार मनाने की खूबसूरत परंपरा को भी दर्शाती है.
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