हर बात पर ‘नहीं’ कहने वाले माता-पिता हो जाएं सावधान, बच्चे पर पड़ सकता है असर

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क्या बच्चे को हर बात पर रोकना सही है? जानिए ज्यादा "ना" कहने का बच्चों की सोच और आत्मविश्वास पर क्या असर पड़ सकता है. जानें कब बच्चों को रोकना चाहिए और कब उन्हें सीखने के लिए आजादी देनी चाहिए.

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Parenting Tips: छोटे बच्चे नई चीजें सीखने के लिए हमेशा उत्सुक रहते हैं. वे हर चीज को छूकर, देखकर और समझकर सीखने की कोशिश करते हैं. ऐसे में कई बार माता-पिता बच्चे को रोकने के लिए दिनभर में कई बार "नहीं" या "ना" कह देते हैं. लेकिन क्या हर बात पर बच्चे को रोकना सही है? एक्सपर्ट्स के अनुसार, बच्चों को नियम सिखाना जरूरी है, लेकिन हर छोटी बात पर रोक लगाने से उनके व्यवहार और आत्मविश्वास पर असर पड़ सकता है.

ज्यादा रोक-टोक से बच्चे पर पड़ सकता है असर

अगर बच्चे को हर काम के लिए मना किया जाए, तो धीरे-धीरे उसके मन में डर पैदा हो सकता है. कुछ बच्चे अपनी बात रखना कम कर देते हैं, जबकि कुछ हर बात का विरोध करने लगते हैं. लगातार रोकने से बच्चे की रचनात्मक सोच और नई चीजें सीखने की इच्छा भी प्रभावित हो सकती है.

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बच्चों के लिए जरूरी है कि उन्हें सही और गलत का फर्क समझाया जाए, न कि हर बार सिर्फ रोक दिया जाए.

रोकने के बजाय सही रास्ता दिखाएं

पैरेंटिंग एक्सपर्ट्स बच्चों को समझाने के लिए Positive Redirection का तरीका अपनाने की सलाह देते हैं. इसका मतलब है कि बच्चे को डांटने या रोकने के बजाय उसे कोई बेहतर विकल्प दिया जाए.

जैसे अगर बच्चा दीवार पर रंग कर रहा है, तो उसे सिर्फ "ऐसा मत करो" कहने के बजाय कह सकते हैं, "चलो इस पेपर पर ड्राइंग बनाते हैं." इससे बच्चा अपनी क्रिएटिविटी भी दिखा पाएगा और सही तरीका भी सीख जाएगा.

इन मामलों में ‘ना’ कहना जरूरी है

कुछ परिस्थितियों में बच्चे को रोकना बेहद जरूरी होता है. जब बच्चे की सुरक्षा से जुड़ा मामला हो, तो माता-पिता को साफ और सख्त तरीके से मना करना चाहिए. जैसे सड़क पर दौड़ना, बिजली के सॉकेट से खेलना, आग या गैस के पास जाना, नुकीली चीजों से खेलना या किसी को चोट पहुंचाना. ऐसी स्थिति में बच्चे को रोकने के साथ यह बताना भी जरूरी है कि वह काम खतरनाक क्यों है.

बच्चों को चाहिए प्यार और सीमाएं

अच्छी पैरेंटिंग का मतलब हर बात पर रोक लगाना नहीं है. बच्चों को अनुशासन के साथ भरोसा और आजादी भी चाहिए. माता-पिता अगर सही समय पर सही तरीके से सीमाएं तय करते हैं, तो बच्चे ज्यादा आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बनते हैं.

बच्चों को सिर्फ नियम नहीं, बल्कि समझ और सहयोग की भी जरूरत होती है. इसलिए हर बार "ना" कहने से पहले सोचें कि क्या बच्चे को रोकना जरूरी है या उसे सही दिशा दिखाने की जरूरत है.

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Pushpanjali

लेखक के बारे में

By Pushpanjali

मेरा नाम पुष्पांजलि है. मैं पिछले 2.5 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रही हूं. इस दौरान मैंने मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, हेल्थ, फैशन, ब्यूटी और होम टिप्स से जुड़े कंटेंट पर काम किया है. मुझे ऐसे आर्टिकल लिखना पसंद है जो आसान भाषा में हों और पाठकों के लिए उपयोगी भी हों. मैं ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर रिसर्च करके SEO-फ्रेंडली कंटेंट तैयार करती हूं. इसके साथ ही आकर्षक हेडलाइन लिखना, सही जानकारी जुटाना और डिजिटल ऑडियंस की पसंद के अनुसार कंटेंट तैयार करना मेरी प्रमुख जिम्मेदारियों का हिस्सा रहा है. मैं हमेशा नई चीजें सीखने और अपने लेखन को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. मेरा उद्देश्य ऐसा कंटेंट तैयार करना है जो लोगों तक सही जानकारी सरल और दिलचस्प तरीके से पहुंचाए.

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