Major Navya Shekhawat: राष्ट्रपति के साथ चलने वाली ये महिला ऑफिसर कौन हैं? जानिए CDS से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ एडीसी नव्या शेखावत
Major Navya Shekhawat: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ नजर आने वाली मेजर नव्या शेखावत इन दिनों चर्चा में हैं. भारतीय सेना से जुड़ी उनकी यह नई जिम्मेदारी काफी खास है। सीडीएस से शुरू हुआ उनका सफर अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंच चुका है. आखिर नव्या शेखावत कौन हैं और उनकी कहानी इतनी खास क्यों है?
Major Navya Shekhawat: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ किसी ऑफिशियल प्रोग्राम में आपने एक महिला मिलिट्री ऑफिसर को जरूर देखा होगा. इन दिनों उनका नाम भी काफी चर्चा में है. ये हैं मेजर नव्या शेखावत, जिन्हें राष्ट्रपति की एडीसी यानी एड-डी-कैंप नियुक्त किया गया है. इस जिम्मेदारी के साथ नव्या शेखावत ने भारतीय सेना में एक खास उपलब्धि हासिल की है. वह भारतीय सेना से राष्ट्रपति की एडीसी बनने वाली पहली महिला ऑफिसर हैं. हालांकि, यहां एक बात समझना जरूरी है. नव्या शेखावत राष्ट्रपति की पहली महिला एडीसी नहीं हैं. उनसे पहले साल 2025 में भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी राष्ट्रपति की पहली महिला एडीसी बनी थीं. नव्या शेखावत की खास उपलब्धि यह है कि वह भारतीय सेना से राष्ट्रपति की एडीसी बनने वाली पहली महिला ऑफिसर हैं.
सीडीएस के जरिए शुरू हुआ सेना में जाने का सफर
मेजर नव्या शेखावत का सेना में ऑफिसर बनने का सफर सीडीएस यानी कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज परीक्षा से शुरू हुआ. यह परीक्षा यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन यानी यूपीएससी आयोजित करता है. इस परीक्षा के जरिए योग्य उम्मीदवारों को सेना में ऑफिसर बनने के लिए आगे बढ़ने का मौका मिलता है. सीडीएस के बाद नव्या शेखावत ने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी यानी ओटीए में आर्मी ट्रेनिंग लिया. यहां उन्होंने सेना में ऑफिसर के तौर पर काम करने के लिए जरूरी ट्रेनिंग पूरा किया. इसके बाद वह भारतीय सेना में शामिल हुईं और यहीं से उनके मिलिट्री करियर की शुरुआत हुई.
2021 में भारतीय सेना में मिली कमीशन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नव्या शेखावत को साल 2021 में आर्मी सर्विस कोर यानी एएससी में कमीशन मिला था. आर्मी सर्विस कोर सेना तक जरूरी सामान और दूसरी जरूरी चीजें पहुंचाने से जुड़े काम करता है. सेना में ऑफिसर के तौर पर काम करते हुए नव्या आगे बढ़ती रहीं और मेजर के पद तक पहुंचीं. इसके बाद साल 2026 में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की एडीसी की जिम्मेदारी दी गई. यानी 2021 में सेना में कमीशन मिलने के करीब पांच साल बाद वह राष्ट्रपति की एडीसी बनीं. यह उनके मिलिट्री करियर का एक अहम पड़ाव है.
आखिर राष्ट्रपति की एडीसी का काम क्या होता है?
राष्ट्रपति के साथ किसी मिलिट्री ऑफिसर को देखकर कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि एडीसी का काम आखिर क्या होता है. क्या उनकी जिम्मेदारी सिर्फ राष्ट्रपति के साथ मौजूद रहने तक होती है? ऐसा नहीं है, एडीसी यानी एड-डी-कैंप राष्ट्रपति के ऑफिशियल प्रोग्राम्स और समारोहों में मदद करती हैं. इन मौकों पर वह राष्ट्रपति के साथ रहती हैं और मिलिट्री और फॉर्मल नियमों से जुड़े कामों में भूमिका निभाती हैं.
राष्ट्रपति के कई तरह के कार्यक्रम होते हैं. इनमें समारोह, ऑफिशियल मीटिंग्स और दूसरे जरूरी प्रोग्राम शामिल होते हैं. ऐसे मौकों पर एडीसी प्रोग्राम से जुड़े जरूरी कामों में मदद करती हैं और संबंधित ऑफिशियल्स के साथ को-आर्डिनेशन बनाए रखती हैं. इसलिए एडीसी की जिम्मेदारी सिर्फ राष्ट्रपति के साथ दिखाई देने तक सीमित नहीं होती. इस पद से जुड़े कई जरूरी ऑफिशियल काम होते हैं.
राष्ट्रपति के पास कितनी एडीसी होती हैं?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति के पास कुल पांच एडीसी होती हैं. इनमें तीन भारतीय सेना से, एक भारतीय नौसेना से और एक भारतीय वायुसेना से होती हैं. ये ऑफिसर राष्ट्रपति के ऑफिशियल प्रोग्राम और समारोहों में उनके साथ रहती हैं और अपनी जिम्मेदारियां निभाती हैं. मेजर नव्या शेखावत भी अब इसी टीम का हिस्सा हैं. उनकी नियुक्ति की सबसे खास बात यह है कि भारतीय सेना से पहली बार किसी महिला ऑफिसर को राष्ट्रपति की एडीसी की जिम्मेदारी मिली है.
पहली महिला एडीसी और पहली महिला आर्मी एडीसी में क्या फर्क है?
मेजर नव्या शेखावत के बारे में बात करते समय एक बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. उन्हें राष्ट्रपति की पहली महिला एडीसी कहना सही नहीं होगा. साल 2025 में भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी राष्ट्रपति की पहली महिला एडीसी बनी थीं. अब साल 2026 में मेजर नव्या शेखावत को यह जिम्मेदारी मिली है. वह राष्ट्रपति की एडीसी बनने वाली दूसरी महिला ऑफिसर हैं. लेकिन भारतीय सेना से राष्ट्रपति की एडीसी बनने वाली वह पहली महिला ऑफिसर हैं. यानी यशस्वी सोलंकी और नव्या शेखावत की उपलब्धि में यही फर्क है. यशस्वी सोलंकी नौसेना से पहली महिला राष्ट्रपति एडीसी बनीं, जबकि नव्या शेखावत ने भारतीय सेना से यह उपलब्धि हासिल की है.
क्यों चर्चा में है मेजर नव्या शेखावत का नाम?
मेजर नव्या शेखावत की नियुक्ति इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने भारतीय सेना में एक खास उपलब्धि हासिल की है. वह भारतीय सेना से राष्ट्रपति की एडीसी बनने वाली पहली महिला ऑफिसर हैं. उनका सेना में जाने का सफर सीडीएस परीक्षा से शुरू हुआ. इसके बाद उन्होंने चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में ट्रेनिंग लिया जिसके बाद साल 2021 में उन्हें आर्मी सर्विस कोर में कमीशन मिला. इसके बाद उन्होंने सेना में काम करते हुए आगे बढ़कर मेजर का पद हासिल किया. अब उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की एडीसी की जिम्मेदारी मिली है.
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