The Taj Story ott release:निर्देशक ने बताया सेंसर बोर्ड ने बदलवाया फिल्म का क्लाइमेक्स

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the taj story ott release

ओटीटी पर हालिया रिलीज हुई ‘द ताज स्टोरी’ के निर्देशक तुषार गोयल ने इस इंटरव्यू में फिल्म की मेकिंग से जुड़ी चुनौतियों पर बातचीत की है

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the taj story ott release :परेश रावल अभिनीत विवादित फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ ओटीटी प्लेटफार्म अमेजॉन प्राइम के लायंसगेट पर स्ट्रीम कर रही है. इस फिल्म फिल्म के निर्देशक तुषार गोयल हैं.इस फिल्म की मेकिंग के बारे में बात करते हुए वे यह बताना नहीं भूलते कि इस फिल्म के लिए उन्हें लगातार धमकियां मिली थी. फिल्म को लेकर उन्होंने कई बातें उर्मिला कोरी के साथ साझा की.

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जब लगा कि ताज महल के इस पक्ष पर फिल्म बननी चाहिए

फिल्म के निर्माता सुरेश झा का एक दिन मुझे कॉल आया. उन्होंने पूछा, क्या आपको ताजमहल के बारे में पता है? मैंने कहा, हां, शाहजहां ने इसे मुमताज महल की याद में बनवाया था. फिर उन्होंने पूछा, इसका दूसरा पक्ष जानते हैं? मैंने जवाब दिया, हां सर, इसके बारे में सुना है, इस पर कई पिटीशन भी डाली गयी हैं. मैं मेरठ से हूं और कई बार ताजमहल जा चुका हूं. उन्होंने कहा कि तो चलिये, इस पर फिल्म बनाते हैं, आप रिसर्च शुरू कीजिए. फिर मैंने रिसर्च करना शुरू किया.

ढाई से तीन साल रिसर्च में लगे

ढाई से तीन साल रिसर्च में लगे. कई ऐसे तथ्य मिले, जो मेरे लिए चौंकाने वाले थे. मैंने ‘बादशाहनामा’ पढ़ी, जिसे अब्दुल लाहौरी ने लिखा है. उसमें कहीं नहीं लिखा कि ताजमहल की नींव शाहजहां ने रखी. उसमें यह उल्लेख है कि यह राजा मान सिंह का पैलेस था, जिसे शाहजहां ने उनके पोते जय सिंह से मुमताज को दफनाने के लिए लिया था. हां, प्रोफेसर राजनाथ की किताब में यह दावा किया गया है कि इसे शाहजहां ने बनवाया, पर कुछ पहलुओं पर उनकी किताब में भी चुप्पी हैं. तब मुझे लगा कि इस विषय पर एक कोर्टरूम ड्रामा बनाया जा सकता है.

फिल्म को लेकर ये था सबसे बड़ा डर

फिल्म को लेकर सबसे बड़ा डर यही था कि फिल्म की रिलीज ना रुक जाये. साउथ के एक बड़े एक्टर उनका मैं नाम नहीं लूंगा, लेकिन जब मैंने उन्हें अपनी यह फिल्म दिखायी, तो उन्होंने बताया कि सेंसर बोर्ड ने इस विषय पर बनी 1992 में एक फिल्म को बैन कर दिया था. उन्होंने कहा कि आपकी फिल्म का भी यही हश्र हो सकता है। यह सुनकर हम थोड़ा डर तो गये थे लेकिन हमारी फिल्म रिलीज हुई

रिसर्च में नहीं मिले शिव के मंदिर के प्रमाण

इस फिल्म के लिए मैंने तीन साल का रिसर्च किया था। रिसर्च के दौरान पता चला कि ताजमहल एक भारतीय आर्किटेचर था, न कि इस्लामिक. ईबिल बहुत बड़े अमेरिकन आर्किटेचर थे, उन्होंने अपनी किताब में इस बात का जिक्र किया है. शिव मंदिर होने के प्रमाण नहीं हैं, लेकिन वहां पर देवी-देवताओं की मूर्तियां थीं.इसकी उन्होंने पुष्टि की है.वैसे कई तथ्य राजा मान सिंह का महल होने का दावा करते हैं तो निश्चित तौर पर महल में देवी देवताओं की मूर्तियां होंगी।

सेंसर बोर्ड ने साढ़े चार मिनट का हिस्सा हटाया

सेंसर बोर्ड ने फिल्म का क्लाइमेक्स बदलवा दिया और करीब साढ़े चार मिनट का हिस्सा हटा दिया. साथ ही 11 छोटे-छोटे कट भी लगाये गये, जो क्लाइमेक्स मूल रूप से था. अगर वह रहता तो दर्शक ताली बजाते हुए थिएटर से बाहर निकलते, लेकिन सेंसर की भी अपनी जवाबदेही होती है.उन्होंने फिल्म का क्लाइमेक्स बदल दिया।

परेश रावल को पसंद आया फिल्म से जुड़ा रिसर्च

इस फिल्म के निर्माता चाहते थे कि परेश रावल इस फिल्म को करें और किसी के लिए भी उनके साथ काम करना खुशकिस्मती होगी, लेकिन स्क्रिप्ट भेजने के तीन दिन तक उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया था . फिर उन्होंने कॉल किया. उन्हें फिल्म से जुड़ा रिसर्च बहुत पसंद आया था , जिस वजह से वह फिल्म का हिस्सा बनें।

ताज के आसपास हुई है शूटिंग

ताज पर फिल्म है तो शूटिंग करनी ही थी। सिर्फ एक दिन का शूट हुआ है, क्योंकि वहां शूटिंग के लिए आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की इजाजत लेनी पड़ती है. उन्होंने सीन मांगा और कहा कि ताजमहल शारजहां ने नहीं बनवाया है. ये आप यहां की शूटिंग में नहीं दिखायेंगे. फिर हमने ताज के 22 कमरे का हमने सेट बनाया था और आगरा में हमारी शूटिंग ताज के आसपास हुई है. फिल्म का पहला सीन सिर्फ ताज में शूट हुआ है.


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