खास बातचीत: बोले सुनील शेट्टी- किसी एक्टर को भुलाने के लिए चार साल काफी होता है

Updated at : 25 Aug 2019 8:16 AM (IST)
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खास बातचीत: बोले सुनील शेट्टी- किसी एक्टर को भुलाने के लिए चार साल काफी होता है

90 के दशक के एक्शन हीरो सुनील शेट्टी चार साल के अंतराल के बाद फिल्म ‘पहलवान’ से वापसी कर रहे हैं. मूल रूप से कन्नड़ में बनने वाली यह फिल्म हिंदी सहित दूसरी भाषाओं में भी रिलीज हो रही है. सुनील शेट्टी इस फिल्म को पैन इंडिया की फिल्म करार देते हैं, जिससे दक्षिण भारत […]

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90 के दशक के एक्शन हीरो सुनील शेट्टी चार साल के अंतराल के बाद फिल्म ‘पहलवान’ से वापसी कर रहे हैं. मूल रूप से कन्नड़ में बनने वाली यह फिल्म हिंदी सहित दूसरी भाषाओं में भी रिलीज हो रही है. सुनील शेट्टी इस फिल्म को पैन इंडिया की फिल्म करार देते हैं, जिससे दक्षिण भारत से लेकर पूरा भारत जुड़ाव महसूस करेगा क्योंकि इमोशन ही आखिरकार सभी को जोड़ता है. पेश है सुनील शेट्टी की उर्मिला कोरी से हुई बातचीत के प्रमुख अंश.

-आप साउथ से हैं इसलिए आपके लिए ‘पहलवान’ से जुड़ना आसान रहा
मेरी मातृभाषा तुलु है. जबकि ये फिल्म कन्नड़ में है. उर्दू और हिंदी में जो फर्क है. वे इन दोनों भाषाओं में है. वैसे मैंने कन्नड़ में डबिंग नहीं की है सिर्फ हिंदी में ही की है क्योंकि मैं हिंदी छोड़कर किसी दूसरी भाषा के साथ न्याय नहीं कर पाता था. ये फिल्म भाषा की वजह से नहीं इमोशन की वजह से मैंने हां कहा है.

-आपने एक्टिंग से ब्रेक क्यों लिया था?
मैं चार साल बाद फिल्म कर रहा हूं. मैंने ब्रेक इसलिए लिया था क्योंकि मेरे पिताजी की तबीयत खराब थी. उनको लगवा की शिकायत थी. मैं बहुत डिस्टर्ब था उस वक्त. एक नाराजगी सी हो गयी थी शूटिंग से, पता नहीं क्यों लेकिन हो गया था. मैं अब आ गया हूं वापस लाइट कैमरा और एक्शन में.

-क्या ब्रेक के दौरान आपने एक्टिंग को मिस किया?
सच कहूं तो मैंने एक्टिंग को मिस नहीं किया, क्योंकि मैं अपने पिता में पूरी तरह से व्यस्त था. मुझे ये बात पता थी कि अगर शूटिंग पर मैं गया तो भले ही सभी बोलेंंगे कि छह बजे पैकअप हो जायेगा लेकिन आठ बज ही जाता है. उस वक्त प्राथमिकता मेरा पापा थे. पर हां मेरे जेहन में ये बात जरुर चलती रहती थी कि कहीं मैं एक्टिंग भूल तो नहीं जाऊंगा न.

-पिता के साथ अपने रिश्ते को किस तरह परिभाषित करेंगे आप जबकि वे अब आपके बीच नहीं रहें?

मेरे पिताजी मेरे हीरो रहे हैं. वे नौ साल की उम्र में मुंबई आये थे. जिस रेस्टोरेंट के वो क्लीनर ब्वॉय थे वहां के मालिक बनें. उनसे बड़ा मेरे लिए कोई प्रेरणा नहीं हो सकती है. मेरे पिता जी सिर्फ एक बार मेरी फिल्मों के सेट पर आये थे. मेरी फिल्में कौन सी सुपरहिट हो रही है कौन सी नहीं, उन्हें पता नहीं होती थी. हमलोग बहुत ही सिंपल तरीके से रहते थे. आज भी वही है. भले ही मेरे पिताजी हमारे बीच नहीं हैं. मेरे घर में तीन एक्टर हो गये हैं. मुझे और मेरे बेटे और बेटी मिलाकर लेकिन मैंने जो अपने पिता से सीखा है. वही आगे ले जा रहा हूं.

-आपका बेटा अहान जल्द ही फिल्मों में आने वाले हैं? आप उसको क्या राय देते हैं?

अगले साल तक फिल्म रिलीज होगी. मैं अपने बच्चों को सफलता से ज्यादा असफलता को हैंडल करने की सीख देता हूं. मुझे लगता है कि सफलता को वे हैंडल कर लेंगे. असफलता को नहीं. ये इंडस्ट्री बहुत ही डेंजर है. मैंने पहलवान को इसलिए हां कहा क्योंकि इसमें किच्चा सुदीप है. उनकी जबरदस्त फैन फॉलोईंग है तो कहीं न कहीं मैं भी उनके कंधे पर सवार हूं. मुझे अपने इस डर को स्वीकारने में कोई हिचक नहीं है. मैं लकी हूं कि मीडिया अब तक मुझे नहीं भुला है. वे अभी भी मेरे बारे में लिखते रहते हैं वरना जो चार सालों से काम नहीं कर रहा कौन उसके बारे में लिखता है. चार साल काफी होते हैं किसी एक्टर को खत्म होने में.

-आपने अपनी असफलता को कैसे हैंडल किया था?

मेरी पहली फिल्म ही कामयाब हुई थी लेकिन मेरे बारे में कई लोगों ने अच्छा नहीं कहा था. एक टॉप समीक्षक ने तो मुझे एक्टिंग छोड़कर रेस्टोरेंट बिजनेस में जाने की सलाह दे दी थी हालांकि वे अभी कुछ नहीं कर रहे हैं. मैं कर्म में यकीन करता हूं. जो भी बातें मेरे निगेटिव में आयी. मैंने उन पर गौर करना शुरू किया और पाया कि हां मैं उतनी अच्छी एक्टिंग नहीं कर पाऊंगा क्योंकि मैंने कभी एक्टिंग सीखा नहीं है इसलिए मैंने खतरों से भरा स्टंट करना शुरू किया ताकि मुझे फिल्में आॅफर होती रही है. मैंने हमेशा सीखते रहने की कोशिश की है.

-90 के दशक में आप व अक्षय एक साथ काम करते थे. आज आप दोनों एक साथ नजर नहीं आते हैं इसकी वजह?

फिल्म की कॉस्टिंग बढ़ जाती है. सभी की इतनी डिमांड होती है. स्टार के प्राइज में ही फिल्म करोड़ों पार हो जाती है. मैं ‘पहलवान’ की बात करूं तो इस फिल्म में प्रोड्क्शन पर खर्च हुआ है कलाकारों पर नहीं. कंटेंट पर फोकस होता है. यही वजह है कि साउथ की रीजनल फिल्में 500 करोड़ पार कर जाती हैं और हमारी हिंदी फिल्में अभी भी उस आंकड़ें से बहुत दूर है. वहां का कंटेंट देखिए. वहां के दर्शक एक फिल्म को दो बार से अधिक देखते हैं. हमारे यहां तो दर्शक सिर्फ शुक्रवार, शनिवार , रविवार ही फिल्म देखते हैं. उसके बाद सोमवार से कलेक्शन में जबरदस्त गिरावट देखने को मिलती है.

-इंडस्ट्री में ये बात प्रसिद्ध है कि अन्ना सभी के लिए हर समय मौजूद है?

ये बात एक खुशी देती है. मैंने हमेशा से अपने से जुड़े हर रिश्ते की कद्र करता रहा हूं इसलिए मेरे अच्छे रिश्ते सभी से बन जाते हैं. साउथ फिल्म में मेरी एंट्री सेलिब्रिटी क्रिकेट लीग की वजह से हुई है. आठ साल पहले जब यह शुरू हुआ था तो हमने सोचा था कि इससे साउथ सहित दूसरी फिल्म इंडस्ट्री से भी हमने जुड़ने का मौका मिलेगा. कैमरामैन सभी जगह काम करते थे लेकिन अब एक्टर और डायरेक्टर भी हर इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं.

-अभिनय में मौजूदा दौर में कितना फर्क पाते हैं ?
हां एक्टिग काफी बदल चुकी है. मैंने इस फिल्म में मॉनिटर देखा है. पहले नहीं देखता था. अब समझना होता है कि आप ओवरएक्टिंग तो नहीं कर रहे हैं. अब तो मैं ड्रेसिंग में भी अपने बच्चों की राय लेता हूं. मैं उन्हें सुनता हूं. मैं अपनी उम्र के अनुसार रोल करता हूं.

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