क्लासरूम में AI की एंट्री, CBSE के नए प्लान से कैसे बदलेगी शिक्षकों की भूमिका?
क्लास में टीचर की सांकेतिक फोटो (AI Generated)
स्कूल की पढ़ाई अब सिर्फ ब्लैकबोर्ड और किताबों तक सीमित नहीं रही. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटेशनल थिंकिंग ने पढ़ाई के तरीकों को तेजी से बदला है. CBSE ने साल 2026-27 के लिए 'Computational Thinking and Understanding AI' को अपना मुख्य ट्रेनिंग थीम बनाया है.
सीबीएसई के Computational Thinking and Understanding AI प्लान के तहत 20 और 21 नवंबर 2026 को पुणे में नेशनल टीचर्स कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है. इस पहल का असली उद्देश्य केवल छात्रों को AI पढ़ाना नहीं, बल्कि शिक्षकों को तकनीक के साथ ढालना है.
CBSE के AI फोकस से स्कूलों में क्या बदलने वाला है?
CBSE की इस नई रणनीति से स्कूलों का पूरा इकोसिस्टम बदलने जा रहा है. कक्षा 3 से 8 तक कंप्यूटेशनल थिंकिंग को बुनियादी शिक्षा का हिस्सा बनाया जा रहा है. अब बच्चे केवल उत्तर याद नहीं करेंगे, बल्कि किसी समस्या को छोटे हिस्सों में बांटकर उसका तार्किक समाधान निकालना सीखेंगे.
शिक्षक की भूमिका केवल पढ़ाने से आगे कैसे जाएगी?
AI के दौर में शिक्षक अब सिर्फ जानकारी देने वाले माध्यम नहीं रहेंगे, क्योंकि जानकारी इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध है. अब शिक्षक की भूमिका एक 'मेंटॉर' और 'फैसिलिटेटर' की होगी.
- पर्सनलाइज्ड लर्निंग: शिक्षक AI टूल की मदद से हर छात्र की सीखने की क्षमता को समझेंगे और उसी हिसाब से अलग-अलग शिक्षण योजना बनाएंगे.
- क्रिटिकल थिंकिंग पर जोर: छात्र AI द्वारा दिए गए उत्तरों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें, बल्कि उनकी सही जांच करना सीखें, यह जिम्मेदारी शिक्षक की होगी.
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AI से होमवर्क, प्रोजेक्ट और परीक्षा की तैयारी
पारंपरिक होमवर्क जैसे निबंध लिखना या सीधे उत्तर कॉपी करना अब बेअसर हो चुका है, क्योंकि छात्र AI से कुछ ही सेकंड में कंटेंट तैयार कर सकते हैं.
- ओपन-बुक और सिमुलेशन टास्क: अब स्कूलों में ऐसे प्रोजेक्ट्स दिए जा रहे हैं जिनमें समस्याओं का व्यावहारिक समाधान खोजना पड़े.
- डिजिटल मूल्यांकन: वर्चुअल लैब्स के जरिए छात्र वास्तविक समय में प्रयोग करके देख सकते हैं. परीक्षा की तैयारी के लिए 'DIKSHA PAL' (Personalized Adaptive Learning) का उपयोग हो रहा है, जो छात्र की कमजोरी के हिसाब से सवाल तैयार करता है.
- कंप्यूटर और इंटरनेट का अभाव: बड़े निजी स्कूलों में स्मार्ट लैब्स और हाई-स्पीड इंटरनेट मौजूद है, जबकि छोटे शहरों के सरकारी स्कूलों में अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है.
- बिजली और हार्डवेयर: कई ग्रामीण इलाकों में वर्चुअल लैब्स चलाना केवल इसलिए कठिन हो जाता है क्योंकि वहां बिजली और अपडेटेड कंप्यूटर उपलब्ध नहीं हैं.
CBSE लगातार ट्रेनिंग सेशन चला रहा है
बड़े शहरों के शिक्षक ऑनलाइन और ऑफलाइन वर्कशॉप्स में भाग ले रहे हैं, लेकिन दूर-दराज के इलाकों में शिक्षकों तक यह तकनीक देर से पहुंच रही है. कई सीनियर शिक्षक नई तकनीक को अपनाने में हिचकिचाते हैं, जिसके लिए लगातार हैंड-होल्डिंग सपोर्ट की जरूरत है.
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