US-ईरान तनाव से तेल बाजार में उबाल, लगातार दूसरे दिन बढ़े दाम, ब्रेंट 91 डॉलर के करीब
कच्चे तेल के बढ़ते दाम
US-ईरान तनाव बढ़ने से कच्चे तेल में लगातार दूसरे दिन तेजी रही. ब्रेंट 91 डॉलर के करीब पहुंचा, जानें होर्मुज संकट से क्यों बढ़ी चिंता.
Oil Price Today: अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े तनाव का असर सीधे ग्लोबल तेल बाजार पर दिख रहा है. लगातार दूसरे दिन कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. ब्रेंट क्रूड करीब 91 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 86 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है. सोमवार को WTI में 2.8% की जोरदार तेजी आई थी, जो तीन हफ्तों में इसकी सबसे बड़ी एक दिन की बढ़त रही.
तेल बाजार की चिंता फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पर संभावित असर है. हालांकि इस समुद्री रास्ते से अभी तेल की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन बढ़ते सैन्य खतरे ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है.
US और ईरान के बीच आखिर क्या हुआ?
तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक द्वीप पर हमला किया. इसके जवाब में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और जॉर्डन को निशाना बनाकर हमले किए. रिपोर्ट के मुताबिक, जॉर्डन में अमेरिकी एयर बेस की ओर दागी गई ईरानी मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया गया. करीब एक महीने बाद दोनों पक्षों के बीच यह पहला सीधा सैन्य टकराव बताया जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि अमेरिकी बलों पर किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा. ऐसे में निवेशकों को डर है कि यह टकराव फिर से बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है.
होर्मुज इतना अहम क्यों है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तेल बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है. फारस की खाड़ी के कई बड़े तेल उत्पादक देशों का तेल इसी रास्ते से बाहर जाता है.
- UAE, सऊदी अरब, कुवैत और इराक से तेल की सप्लाई जारी है.
- लेकिन जहाजों की आवाजाही पर सैन्य हमलों का खतरा बना हुआ है.
- कुछ टैंकरों के अपनी पहचान बताने वाले ट्रांसपोंडर बंद करने की भी खबर है.
यानी तेल निकल तो रहा है, लेकिन शिपिंग सामान्य तरीके से नहीं हो पा रही है और हर यात्रा के साथ जोखिम जुड़ा हुआ है.
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टैंकर पर हमले की खबर ने क्यों बढ़ाई चिंता?
खतरे की एक और बड़ी वजह ओमान के पास होर्मुज से बाहर जा रहे एक टैंकर पर हमला है. UK Maritime Trade Operations के मुताबिक, इस जहाज को तीन अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने निशाना बनाया. यह घटना बताती है कि इलाके में जहाजों के लिए खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है. अगर तेल ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही और प्रभावित होती है, तो सप्लाई को लेकर बाजार की चिंता और बढ़ सकती है.
आगे तेल के दाम कहां तक जा सकते हैं?
TD Securities के ग्लोबल हेड ऑफ कमोडिटी स्ट्रैटेजी बार्ट मेलेक का कहना है कि फिलहाल ऐसे संकेत नहीं हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सामान्य आवाजाही जल्द शुरू होगी. उनके मुताबिक, इस स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं.
अगस्त में भी युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशों और बढ़ते तनाव के बीच तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया था. इस बार खासकर डीजल जैसे रिफाइंड उत्पादों की कीमतों में ज्यादा तेजी देखने को मिली है, क्योंकि सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है.
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