छोटे कारोबार के लिए बदल रहा है पेमेंट का खेल, जानें TReDS से कितना बदलेगा MSME का Cash Flow Model

Updated:
विज्ञापन
WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

एमएसएमई का पेमेंट मॉडल बदल रहा है. जानें कैसे TReDS प्लेटफॉर्म से छोटे कारोबारियों का फंसा पैसा 48 घंटे में सीधे बैंक खाते में आएगा.

विज्ञापन

अगर आप बिहार-झारखंड या देश के किसी भी कोने में छोटा-मोटा कारोबार (MSME) चलाते हैं, तो आपके लिए एक काम की खबर है. अकसर सामान या सर्विस देने के बाद महीनों तक पैसों का इंतजार करना पड़ता है जिससे लेबर का पेमेंट, कच्चा माल और रोजमर्रा का काम (Working Capital) अटक जाता है.

विज्ञापन

लेकिन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय की 30 जून 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, अब सभी केंद्रीय सरकारी कंपनियों (Central Public Sector Enterprises - CPSEs) के लिए छोटे कारोबारियों का बिल पेमेंट अनिवार्य रूप से TReDS प्लेटफॉर्म के जरिए ही करना जरूरी कर दिया गया है.

इसके साथ ही, संसद से पारित होने के बाद 13 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी पाने वाले 'MSME डेवलपमेंट संशोधन कानून 2026' के लागू होने से एमएसएमई के पेमेंट का पूरा मॉडल ही बदल रहा है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह नया सिस्टम आपके बिजनेस के लिए कैसे संजीवनी साबित होगा.

TReDS क्या है और ये आपके किस काम का है?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के मुताबिक, TReDS (Trade Receivables Discounting System) एक ऐसा अधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां आप अपने सरकारी या बड़े कॉर्पोरेट ग्राहकों के बिल (Invoices) को दिखाकर बैंकों से तुरंत कैश पा सकते हैं. 

  • बिना किसी गारंटी के पैसा: आपको बैंक में अपनी जमीन, दुकान या घर के कागज गिरवी नहीं रखने पड़ते. लोन आपके बिल और सरकारी कंपनी की साख (Rating) पर मिलता है.
  • बैंकों की होड़ से सस्ता लोन: RBI से रजिस्टर्ड बैंकरों और NBFCs के अनुसार, TReDS पर बैंकों के बीच ऑनलाइन बोली (Bidding) लगती है. जहां आम बिजनेस लोन 16% से 24% तक पड़ता है, वहीं यहां केवल 7.5% से 10% के बीच ही पैसा मिल जाता है. 
  • पैसा डूबने का कोई डर नहीं (Without Recourse): रिजर्व बैंक के नियमों के तहत, अगर बिल डिस्काउंट कराने के बाद सरकारी कंपनी भुगतान करने में देरी करती है या डिफॉल्ट करती है, तो बैंक आपसे पैसे वापस नहीं मांग सकता. जोखिम बैंक और खरीदार कंपनी का होता है. 

बिल बनने से लेकर खाते में पैसा आने तक का सफर 

पुराने तरीके में सामान की डिलीवरी के बाद 90 से 180 दिन तक पेमेंट के लिए चक्कर काटने पड़ते थे. TReDS के आने से यह प्रक्रिया 4 आसान चरणों में सिमट गई है:

  1. स्टेप 1 (इनवॉइस अपलोड): आपने सरकारी कंपनी (CPSE) को सामान दिया और बिल TReDS वेबसाइट/ऐप पर अपलोड कर दिया.
  2. स्टेप 2 (डिजिटल ओके): CPSE अपने पोर्टल पर लॉगिन करके 48 घंटे के भीतर उस बिल को अप्रूव कर देती है.
  3. स्टेप 3 (बैंकों की बोली): बैंक देखते हैं कि बिल सरकारी कंपनी का है, तो वे कम से कम डिस्काउंट दर पर बिल खरीदने के लिए बोली लगाते हैं.
  4. स्टेप 4 (तुरंत खाते में पैसा): सबसे कम ब्याज दर वाली बोली चुनते ही 24 से 72 घंटे के भीतर आपके बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर हो जाते हैं. बिल की तय तारीख आने पर बैंक खुद CPSE से अपना पैसा वसूल कर लेता है.

पुराना बनाम नया मॉडल: फर्क खुद देखिए

बात किस चीज की है?पुराना पारंपरिक तरीकाTReDS वाला नया मॉडल
पेमेंट आने का समय90 से 180 दिन (और अनिश्चितता)24 से 72 घंटे (गारंटीड)
ब्याज/फाइनेंसिंग का खर्च16% - 24% (साहूकार या महँगे लोन)7.5% - 10% (किफायती दर)
बैंक को गारंटी (Collateral)प्रॉपर्टी या स्टॉक गिरवी रखना अनिवार्यजीरो गारंटी (केवल बिल ही काफी है)
कारोबारी का तनावलेबर और कच्चे माल के पैसों का संकटसदा भरा रहेगा कैश-फ्लो

बिहार-झारखंड के छोटे कारोबारियों को कितना फायदा?

बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में जहां बड़ा औद्योगिक आधार SAIL, CCL, BCCL, ECL और HEC जैसी सरकारी कंपनियों (CPSEs) पर टिका है, वहां MSME के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है.

  • आधिकारिक उद्यम पोर्टल (Udyam Portal) के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में लगभग 15 लाख से अधिक और झारखंड में 6.5 लाख से अधिक पंजीकृत एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं. 
  • रांची के एक माइनिंग इक्विपमेंट सप्लायर के वास्तविक अनुभव के अनुसार, पहले CCL से पेमेंट क्लियर होने में 3 से 4 महीने लग जाते थे, जिसकी वजह से वे नए टेंडर में बोली लगाने से कतराते थे. लेकिन जून 2026 से जब से CPSEs के लिए TReDS अनिवार्य हुआ है, अब बिल अपलोड होते ही 3 दिन के अंदर 8.5% डिस्काउंट काटकर पूरा पैसा खाते में आ जाता है. इससे उनकी कार्यशील पूंजी (Working Capital Turnaround) 4 गुना तेजी से घूमने लगी है. 

क्या TReDS से अटका हुआ पैसा हमेशा के लिए फ्री हो जाएगा?

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, TReDS के जरिए इनवॉइस डिस्काउंटिंग का कुल कारोबार ₹3.47 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है. 

इसे और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए MSME विकास (संशोधन) अधिनियम 2026 में दो बड़े कानूनी बदलाव किए गए हैं:

  1. ऑनलाइन विवाद निपटारा (ODR): अब अगर खरीदार कंपनी बिल को रोकती है, तो 90 दिनों के भीतर ऑनलाइन माध्यम से विवाद सुलझाने की कानूनी समय-सीमा तय कर दी गई है. 
  2. कोर्ट केस में 50% तुरंत पेमेंट: संशोधित कानून की धारा 19 के प्रावधानों के अनुसार, यदि विवाद के कारण मामला 6 महीने से अधिक समय तक कोर्ट में लंबित रहता है, तो संबंधित पक्ष को MSME सप्लायर को कम से कम 50% फंसा हुआ पैसा तुरंत जारी करने का आदेश दिया जाएगा. 

RBI द्वारा मान्यता प्राप्त TReDS प्लेटफॉर्म जहां आप रजिस्टर कर सकते हैं:

  • RXIL (Receivables Exchange of India Ltd.)
  • M1xchange (Mynd Solutions)
  • Invoicemart (A.TREDS Ltd.)
  • C2FO Factoring Solutions
विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola