कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर, सेंसेक्स 278 अंक गिरा, निफ्टी भी लाल निशान में
शेयर बाजार में गिरावट
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के बीच कच्चा तेल $97 के पार पहुंचा. जानिए बाजार में इस उठापटक की असली वजह और निवेशकों के लिए जरूरी सपोर्ट लेवल्स.
मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली. वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ, जिससे बाजार लाल निशान पर खुला.
कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 278.64 अंक (0.37%) गिरकर 75,854.17 के स्तर पर आ गया. वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 36.05 अंक (0.15%) फिसलकर 23,743.10 पर कारोबार करता दिखा.
बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार, भारतीय बाजार इस समय दिशाहीन नजर आ रहे हैं और मुख्य सूचकांकों में पिछले 2 सालों से कोई खास रिटर्न नहीं मिला है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और आईपीओ (IPO) व ओएफएस (OFS) की लगातार भरमार सेकेंडरी बाजार की लिक्विडिटी को कम कर रही है.
वैश्विक बाजारों का क्या हाल है?
भारतीय बाजारों पर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का सीधा असर पड़ रहा है. अमेरिकी बाजार सोमवार को लेबर डे के कारण बंद थे, इसलिए वहां के फ्यूचर मार्केट से संकेत मिल रहे हैं.
- अमेरिकी फ्यूचर्स: डाउ जोंस फ्यूचर्स 328.44 अंक (0.61%) गिरकर 53,085.81 पर, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 29.11 अंक (0.38%) फिसलकर 7,718.60 पर और नैस्डैक फ्यूचर्स 77.07 अंक (0.29%) गिरकर 26,506.99 के स्तर पर आ गए. इस हफ्ते आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़ों (CPI) पर सभी की नजरें हैं, जो अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर फैसले को प्रभावित करेंगे.
- एशियाई बाजार: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के कारण एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा.
- गिरावट वाले बाजार: सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.56% और थाईलैंड का SET कंपोजिट 0.07% गिरा. GIFT निफ्टी भी 80.50 अंक (0.34%) टूटकर 23,746.00 पर आ गया.
- बढ़त वाले बाजार: दक्षिण कोरिया का कॉस्पी (KOSPI) 2.35% (164.24 अंक) की जोरदार बढ़त के साथ 7,159.63 पर पहुंचा. जापान का निकेई 225 भी 0.35% चढ़कर 66,630.00 पर बंद हुआ.
कच्चे तेल और सोने के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल के दामों को भड़का दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंता बढ़ गई है.
| कमोडिटी | मौजूदा कीमत | बढ़त / बदलाव |
| ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) | $97.52 प्रति बैरल | +$0.36 (0.37%) |
| कच्चा तेल (WTI Crude) | $92.95 प्रति बैरल | +$0.41 (0.45%) |
| सोना | $4,433.96 प्रति औंस | +$28.98 (0.66%) |
अजय बग्गा ने बताया कि ओपेक प्लस (OPEC+) ने रविवार को अक्टूबर के उत्पादन को सितंबर के स्तर पर ही बनाए रखने का फैसला किया है. कोई नया सरप्लस तेल बाजार में न आने से ब्रेंट क्रूड सात हफ्ते के उच्च स्तर $97 के आसपास पहुंच गया है. लगभग $97 पर तेल और दो हफ्ते बाद अमेरिकी फेड का फैसला ये दिखाता है कि बाजार एक साथ जियोपॉलिटिकल जोखिम और महंगाई के खतरे का सामना कर रहे हैं.
निवेशकों को आगे क्या ध्यान रखना चाहिए?
एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पालविया के मुताबिक, एशियाई बाजार मोटे तौर पर संभलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन निफ्टी के 23,800 के नीचे रहने से बाजार का रुख सतर्क बना हुआ है.
- सपोर्ट लेवल (गिरावट की सीमा): पहला सपोर्ट 23,700 पर है. अगर निफ्टी इससे नीचे जाता है, तो यह 23,550 के स्तर तक फिसल सकता है.
- रेजिस्टेंस लेवल (बढ़त की सीमा): ऊपर की तरफ पहला रुकावट का स्तर 23,950 और दूसरा बड़ा रेजिस्टेंस 24,150 पर देखा जा रहा है.
मौजूदा माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े सौदे करने से बचना चाहिए और वैश्विक संकेतों के साथ-साथ सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स का ध्यान रखना चाहिए.
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