छोटे कारोबारियों के लिए RBI ने बदले लोन के नियम, अब ऐसे मिलेगा फायदा

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बिजनेस लोन एजेंट से बातचीत करता दुकानदार

बिहार-झारखंड में छोटे कारोबारियों के लिए बैंक लोन की प्रक्रिया अब अधिक पारदर्शी हो सकती है. जानें बिना गारंटी लोन, 14 दिन की समयसीमा और अस्वीकृति के नियम.

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बिहार और झारखंड के छोटे कारोबारियों के लिए बैंक से लोन लेना अब कुछ मायनों में आसान हो सकता है. आरबीआई (RBI) की एमएसएमई लैंडिंग (MSME lending) पर अपडेटेड मास्टर डायरेक्शन (Master Direction) में छोटे उद्यमों के लिए बिना गारंटी लोन, लोन आवेदन की तय समयसीमा और आवेदन खारिज होने पर वजह बताने जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया है. यह दिशा-निर्देश 9 फरवरी 2026 तक अपडेट किए गए हैं और इनमें 1 अप्रैल 2026 से मंजूर या रिन्यू होने वाले एमएसई (MSE) लोन के लिए नया कोलैटरल-फ्री लिमिट (collateral-free limit) लागू है.

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बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में जहां बड़ी संख्या में छोटे कारोबार रोजगार और स्थानीय सप्लाई चेन से जुड़े हैं, इस बदलाव का सबसे सीधा असर वर्किंग कैपिटल और छोटे बिजनेस लोन की पहुंच पर पड़ सकता है.

क्या अब बिना गारंटी लोन मिलेगा?

सबसे अहम बदलाव माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज (Micro and Small Enterprises) यानी एमएसई (MSE) के लिए है. बैंक को ₹20 लाख तक के लोन पर कोलैटरल (collateral) यानी संपत्ति की गारंटी नहीं लेनी है. अच्छे रिकॉर्ड और मजबूत वित्तीय स्थिति वाले कारोबारियों के लिए बैंक अपनी आंतरिक नीति के तहत यह सीमा ₹25 लाख तक बढ़ा सकते हैं. पीएमईजीपी (PMEGP) के तहत फाइनेंस किए गए एमएसई (MSE) को भी ₹20 लाख तक कोलैटरल-फ्री लोन (collateral-free loan) देने की व्यवस्था है.

इसका मतलब है कि छोटे कारोबारी को हर बार जमीन-मकान गिरवी रखने की जरूरत नहीं होगी. हालांकि लोन मिलना अपने आप तय नहीं है; बैंक अपनी क्रेडिट असेसमेंट (credit assessment) और दूसरी शर्तों के आधार पर फैसला करेगा.

लोन के लिए आवेदन करने पर कितने दिन में फैसला?

छोटे कारोबारियों के लिए एक और उपयोगी प्रावधान लोन आवेदन की समयसीमा से जुड़ा है. ₹25 लाख तक के एमएसई (MSE) लोन पर क्रेडिट डिसीजन (credit decision) 14 वर्किंग डेज से ज्यादा नहीं होना चाहिए. बैंक को अपनी वेबसाइट पर एमएसएमई (MSME) लोन से जुड़ी जानकारी, जरूरी दस्तावेजों की इंडिकेटिव चेकलिस्ट और क्रेडिट डिसीजन (credit decision) की टाइमलाइन्स (timelines) भी प्रमुखता से दिखानी है.

साथ ही बैंक को लोन आवेदन को ट्रैक करने की व्यवस्था रखनी है. आवेदन मिलने पर एक्नॉलेजमेंट (acknowledgement) और उसका स्टेटस (status) आवेदक तक पहुंचना चाहिए. अगर आवेदन खारिज होता है तो बैंक को मुख्य वजह लिखित रूप में बतानी होगी.

बिहार-झारखंड के कारोबारियों को क्या करना चाहिए?

इस गाइडलाइन का फायदा लेने के लिए कारोबारियों के लिए सबसे जरूरी है कि उनका बिजनेस औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था में दर्ज हो. आरबीआई (RBI) के अनुसार एमएसएमई (MSME) को उद्यम रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (Udyam Registration Certificate) लेना जरूरी है और प्रायोरिटी सेक्टर लैंडिंग (Priority Sector Lending) के लिए बैंक इसी रिकॉर्ड की क्लासिफिकेशन (classification) को आधार मानते हैं. इन्फॉर्मल माइक्रो एंटरप्राइजेज (Informal Micro Enterprises) के लिए उद्यम असिस्ट सर्टिफिकेट (Udyam Assist Certificate) को भी इस उद्देश्य से मान्यता दी गई है.

लोन लेने से पहले कारोबारी ये चीजें तैयार रखें:

  • उद्यम रजिस्ट्रेशन (Udyam Registration) / उपयुक्त प्रमाणपत्र
  • बैंक द्वारा मांगे गए जरूरी दस्तावेज
  • कारोबार और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड
  • कितनी रकम और किस काम के लिए चाहिए, इसकी साफ जानकारी

एमएसई (MSE) के लिए ₹1 करोड़ तक का कम्पोजिट लोन (composite loan) भी उपलब्ध है, जिसमें वर्किंग कैपिटल (working capital) और टर्म लोन (term loan) की जरूरत एक ही व्यवस्था के तहत पूरी की जा सकती है.

आरबीआई (RBI) के दिशा-निर्देशों का असली फायदा तभी दिखेगा जब बैंक स्तर पर इन प्रावधानों को तेजी और पारदर्शिता से लागू किया जाए. बिहार और झारखंड के छोटे कारोबारियों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा फायदा कम कोलैटरल (collateral) की जरूरत, आवेदन की स्पष्ट प्रक्रिया और लोन आवेदन पर जवाबदेही के रूप में सामने आता है.

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