न मूर्ति का बीमा, न भगवान का, फिर मुंबई के गणपति पंडाल का ये ₹703 करोड़ का इंश्योरेंस आखिर किसके लिए?

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सोने के मुकुट, आभूषणों और ताजे फूलों की माला से सजे भगवान गणेश

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न मूर्ति का बीमा, न भगवान का! जानिए आखिर मुंबई के गणपति उत्सव का ₹703 करोड़ का इंश्योरेंस कवर किन-किन चीजों और जोखिमों की सुरक्षा करता है.

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गणपति उत्सव के दौरान मुंबई का प्रसिद्ध 'जीएसबी सेवा मंडल' (GSB Seva Mandal) अपने ₹703.27 करोड़ के भारी-भरकम बीमा कवर को लेकर सुर्खियों में है. इतनी बड़ी रकम सुनकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या भगवान गणेश की मूर्ति का भी बीमा होता है? जवाब है नहीं.

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व्यावहारिक तौर पर 'गॉड इंश्योरेंस' (God Insurance) नाम का कोई स्टैंडर्ड बीमा प्रोडक्ट नहीं होता. असल में यह बीमा उत्सव से जुड़े जोखिमों, संपत्ति और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए लिया जाता है.

₹703 करोड़ के बीमे में क्या-क्या कवर होता है?

त्योहार के दौरान होने वाली अनहोनी से बचाव के लिए आयोजक (Mandal) कई तरह के इंश्योरेंस कवर लेते हैं. इसमें मुख्य रूप से ये चीजें शामिल होती हैं:

  • आग और चोरी से सुरक्षा: पंडाल, अस्थायी संरचनाओं, बिजली के सामान और संपत्ति को आग या चोरी से नुकसान पहुंचने पर कवर.
  • सोने-चांदी के गहने: जीएसबी सेवा मंडल के गणपति भगवान को 66 किलोग्राम से अधिक सोना और 335 किलोग्राम चांदी के आभूषण पहनाए जाते हैं. इन कीमती गहनों को चोरी, डकैती या दुर्घटना से बचाने के लिए विशेष कवर दिया जाता है.
  • कीमती सामान का परिवहन: पंडाल तक गहने और अन्य सामान लाने-ले जाने (Transport) के दौरान होने वाले जोखिम भी इसमें शामिल हो सकते हैं.
  • पर्सनल एक्सीडेंट कवर: ड्यूटी पर तैनात स्वयंसेवकों और निर्दिष्ट लोगों को दुर्घटना में चोट लगने पर सुरक्षा.
  • पब्लिक लायबिलिटी इंश्योरेंस: भीड़ प्रबंधन के दौरान किसी तीसरे पक्ष (श्रद्धालुओं) के साथ होने वाली दुर्घटना या नुकसान के दावों की भरपाई के लिए.

क्या हादसा होने पर पूरे ₹703 करोड़ मिलेंगे?

बिल्कुल नहीं. 703 करोड़ रुपये की रकम 'टोटल सम इंश्योर्ड' (Total Sum Insured) यानी अधिकतम बीमा राशि दर्शाती है. इसका मतलब यह कतई नहीं है कि कोई घटना होने पर बीमा कंपनी पूरा पैसा दे देगी.

बीमा पॉलिसी के अलग-अलग सेक्शन, सीमाएं (Limits), शर्तें और नियम होते हैं. नुकसान का आकलन करने के बाद ही तय सीमा के तहत दावा भुगतान (Payout) किया जाता है.

कानूनी रूप से मूर्ति का बीमा क्यों नहीं हो सकता?

भारतीय कानून में हिंदू मूर्तियों को संपत्ति रखने का कानूनी अधिकार (Juristic Person) प्राप्त है. लेकिन एक मूर्ति खुद जाकर इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं खरीद सकती. इसलिए कानूनी रूप से मंडल, ट्रस्ट या आयोजक संस्था ही बीमाकर्ता कंपनी के साथ अनुबंध करती है और वित्तीय जोखिमों का प्रबंधन संभालती है.

इतने बड़े बीमा कवर की जरूरत क्यों पड़ती है?

बड़े धार्मिक आयोजनों में सिर्फ कीमती आभूषण ही नहीं, बल्कि कई अन्य जोखिम भी होते हैं:

जोखिम का कारणसंभावित खतरा
भारी भीड़भगदड़, दुर्घटना या चोट का खतरा.
कीमती आभूषण66 kg सोना और 335 kg चांदी की सुरक्षा.
अस्थाई ढांचा व बिजलीआग लगने या शॉर्ट सर्किट का जोखिम.
प्रसाद व खाद्य वितरणफूड पॉइजनिंग या अन्य जन स्वास्थ्य जोखिम.

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