समय पर बिल भरने के बाद भी क्यों रिजेक्ट हो सकता है लोन? जानिए क्या है क्रेडिट यूटिलाइजेशन का खेल
लेपटॉप में अपना स्कोर चेक करता शख्स, फोटो एक्स
ज्यादातर लोग मानते हैं कि समय पर बिलों का भुगतान करना ही बेहतर क्रेडिट स्कोर की एकमात्र गारंटी है. हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, एक और बेहद महत्वपूर्ण आंकड़ा है जिस पर बहुत कम लोगों का ध्यान जाता है. 'क्रेडिट यूटिलाइजेशन'. यह अकेला फैक्टर किसी भी लोन अर्जी को चुपचाप स्वीकार या खारिज कराने में निर्णायक भूमिका निभाता है.
क्रेडिट यूटिलाइजेशन आपकी कुल उपलब्ध क्रेडिट सीमा का वह प्रतिशत है जो आप वर्तमान में इस्तेमाल कर रहे हैं. यदि कोई व्यक्ति सालों से समय पर भुगतान कर रहा है, लेकिन लगातार अपने कार्ड की पूरी सीमा खर्च करता है, तो उसका स्कोर गिरना तय है. ऋणदाता ऊंचे यूटिलाइजेशन को वित्तीय दबाव का संकेत मानते हैं.
- यदि आपके क्रेडिट कार्ड की सीमा ₹2 लाख है और आपका बकाया ₹60,000 है, तो आपका यूटिलाइजेशन अनुपात 30% होगा.
- क्रेडिट स्कोर की गणना में इस अनुपात की हिस्सेदारी लगभग 30% होती है. भुगतान इतिहास के बाद यह दूसरा सबसे प्रभावशाली फैक्टर है.
30% का नियम: एक सीमा, लक्ष्य नहीं
वित्तीय बाजारों में अक्सर 30% से नीचे यूटिलाइजेशन रखने की सलाह दी जाती है, लेकिन विशेषज्ञ इसे एक अधूरी सलाह मानते हैं.
- कम यूटिलाइजेशन, बेहतर स्थिति: 750 से अधिक स्कोर वाले उधारकर्ता आमतौर पर अपनी क्रेडिट सीमा का 10% से भी कम इस्तेमाल करते हैं. 30% का आंकड़ा केवल एक ऊपरी सीमा है, जहां से स्कोर में गिरावट शुरू होती है.
- प्रति कार्ड का गणित: यूटिलाइज़ेशन केवल सभी कार्डों के कुल औसत पर ही नहीं, बल्कि हर एक कार्ड पर अलग से भी देखा जाता है. यदि एक कार्ड 100% इस्तेमाल में है और दूसरा शून्य पर, तो पूरी तरह भरा हुआ कार्ड फिर भी जोखिम का संकेत माना जाएगा.
ऋणदाता लोन अर्जी पर कैसे लेते हैं फैसला?
जब आप पर्सनल या होम लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो अंडरराइटर आपके यूटिलाइजेशन अनुपात को दो तरीकों से देखते हैं.
- क्रेडिट स्कोर पर असर: उच्च यूटिलाइज़ेशन स्कोर को सीधे नीचे गिरा देता है.
- स्वतंत्र जांच: एक ही क्रेडिट स्कोर (जैसे 740) वाले दो आवेदकों में से, 8% यूटिलाइजेशन वाले व्यक्ति को 45% यूटिलाइजेशन वाले व्यक्ति की तुलना में अधिक सुरक्षित और वित्तीय रूप से सहज माना जाता है.
₹50 लाख जैसे बड़े होम लोन के मामलों में, अधिक यूटिलाइजेशन आपकी अर्जी खारिज होने या अधिक ब्याज दर मिलने की मुख्य वजह बन सकता है.
बिलिंग साइकिल और टाइमिंग का खेल
ज्यादातर क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता आपके स्टेटमेंट बंद होने की तारीख का बैलेंस क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट करते हैं, न कि देय तारीख के बाद का बकाया.
यदि आप हर महीने पूरा भुगतान कर भी देते हैं, तो भी स्टेटमेंट बंद होने से ठीक पहले की गई बड़ी खरीदारी आपका रिपोर्टेड यूटिलाइजेशन बढ़ा सकती है. इसलिए, यदि आप लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो स्टेटमेंट तारीख से पहले ही भुगतान कर देना एक समझदारी भरा कदम है.
खर्च घटाए बिना यूटिलाइजेशन कम करने के 3 उपाय
क्रेडिट सीमा बढ़ाएं: यदि आपकी सीमा ₹2 लाख से बढ़कर ₹4 लाख हो जाती है और खर्च वही रहता है, तो आपका यूटिलाइजेशन अनुपात रातोंरात आधा (50%) रह जाएगा. महीने में कई बार भुगतान: बिलिंग साइकिल के बीच में (स्टेटमेंट जारी होने से पहले) कुछ राशि चुकाने से रिपोर्ट होने वाला बैलेंस कम हो जाता है. स्मार्ट मॉनिटरिंग: किसी भी लोन के लिए आवेदन करने से पहले अपना सिबिल स्कोर जरूर जांचें, ताकि आपको अपने वास्तविक यूटिलाइजेशन का पता रहे.
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लेखक के बारे में
By अरबिंद कुमार मिश्रा
अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.
झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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