जंग के बीच ईरान की ‘लॉटरी’, हर दिन ₹1200 करोड़ की कमाई, जानें कैसे तेल बना ईरान की लाइफलाइन

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Iran-Israel War Oil Crisis

दुनिया बेहाल, पर तेल बेचकर मालामाल हो रहा है ईरानदुनिया बेहाल, पर तेल बेचकर मालामाल हो रहा है ईरान (फोटो/Canva)

Iran-Israel War Oil Crisis: वेस्ट एशिया युद्ध के बीच ईरान ने अपनी तेल अर्थव्यवस्था को ढाल बना लिया है. $100 पार कच्चे तेल की कीमतों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी पकड़ के चलते ईरान रोजाना ₹1200 करोड़ से ज्यादा कमा रहा है.

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Iran-Israel War Oil Crisis: वेस्ट एशिया में छिड़ी जंग ने वैश्विक तेल बाजार की तस्वीर बदल दी है. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से ईरान को दोहरा फायदा हो रहा है. जहां पहले ईरान का कच्चा तेल (मुख्यतः चीन को जाने वाला) भारी डिस्काउंट पर बिकता था, वहीं अब बाजार में तेल की किल्लत के कारण यह अंतर काफी कम हो गया है.

जंग से पहले ब्रेंट और ईरानी लाइट क्रूड के बीच 10 डॉलर से ज्यादा का अंतर था, जो अब घटकर मात्र 2.10 डॉलर रह गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के साथ-साथ ईरान अब अपने तेल की हर बूंद पर पहले से कहीं ज्यादा मुनाफा कमा रहा है.

होर्मुज का ‘इकलौता सुल्तान’

एनडीटीवी के एक रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के इस दौर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सुरक्षित निकासी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है, लेकिन ईरान यहां ‘इकलौता खिलाड़ी’ बनकर उभरा है. खाड़ी के अन्य देशों जैसे इराक, कुवैत और यूएई के लिए अपने शिपमेंट निकालना बेहद मुश्किल और जोखिम भरा हो गया है, जबकि ईरान के टैंकर खार्ग आईलैंड टर्मिनल से लगातार लोड होकर सुरक्षित बाहर निकल रहे हैं.

आंकड़ों के मुताबिक, मार्च महीने में ईरान का तेल एक्सपोर्ट युद्ध से पहले के स्तर यानी 1.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन पर बना हुआ है. पिछले कुछ दिनों में सैटेलाइट तस्वीरों ने खार्ग आईलैंड पर टैंकरों की गतिविधि में और भी तेजी दर्ज की है, जो ईरान की मजबूत सप्लाई चेन को दर्शाता है.

अमेरिका की ‘मजबूरी’ का फायदा

ईरान पर इजरायल और अमेरिका के लगातार हवाई हमलों के बावजूद, वाशिंगटन ने एक हैरान करने वाला रणनीतिक कदम उठाया है. वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को बेलगाम होने से रोकने के लिए अमेरिका ने ईरान के उस तेल स्टॉक पर से प्रतिबंध (Sanctions) हटा लिए हैं, जो पहले से ही समुद्र में टैंकरों में मौजूद था.

इस ढील का नतीजा यह हुआ कि फरवरी में जो औसत कमाई 115 मिलियन डॉलर (₹950 करोड़) थी, वह मार्च में बढ़कर 139 मिलियन डॉलर (₹1200 करोड़ से ज्यादा) प्रतिदिन तक पहुंच गई है. ट्रंप प्रशासन के इस कदम को विशेषज्ञ एक ‘मजबूरी’ के रूप में देख रहे हैं, जिसने अनजाने में ईरान की तबाह हो चुकी अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी का काम किया है.

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अभिषेक पाण्डेय

लेखक के बारे में

By अभिषेक पाण्डेय

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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