आर्थिक तबाही से कारोबार को बचाएगा फायर इंश्योरेंस: MSMEs के लिए प्राथमिकता क्यों, जानें 8 बड़े कारण

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लकड़ी का दुकान और बाहर फायर कर्मचारी, फोटो AI

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं. रोजगार और औद्योगिक उत्पादन में इनका बड़ा योगदान है. हालाँकि, कई MSME सीमित आर्थिक भंडार के साथ काम करते हैं, जिससे वे अप्रत्याशित जोखिमों के प्रति कमजोर पड़ जाते हैं. छोटे कारोबारों के सामने आने वाले सबसे विनाशकारी जोखिमों में से एक है आग. बिजली की खराबी हो, प्राकृतिक आपदा हो या कोई दुर्घटना- आग कुछ ही मिनटों में वर्षों की मेहनत नष्ट कर सकती है. यहीं फायर इंश्योरेंस (Fire Insurance) मददगार साबित होता है.

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कारोबार विशेषज्ञों के अनुसार, MSME को इन कारणों से फायर इंश्योरेंस को प्राथमिकता देनी चाहिए.

  1. संपत्ति की सुरक्षा जयपुर में फर्नीचर बनाने की एक छोटी इकाई का उदाहरण लें, जहां बड़ी मात्रा में लकड़ी और वार्निश रखा जाता है- दोनों ही बेहद ज्वलनशील सामग्री हैं. एक शॉर्ट सर्किट आसानी से आग का कारण बन सकता है, जो कुछ ही मिनटों में लाखों रुपये का स्टॉक राख कर दे. लेकिन अगर उस निर्माता के पास फायर प्रॉपर्टी इंश्योरेंस है, तो किसी हादसे की स्थिति में वह कवर की गई राशि तक मशीनरी, इन्वेंट्री और फर्नीचर के मूल्य का दावा कर सकता है. इसके बिना, एक ही दुर्घटना उसकी वर्षों की बचत और तरक्की मिटा सकती है.
  2. मशीनरी को नुकसान तिरुपुर की एक टेक्सटाइल डाइंग फैक्ट्री का उदाहरण लीजिए, जो कपड़ों की प्रोसेसिंग के लिए तेज गर्मी वाली मशीनों का इस्तेमाल करती है. ज़्यादा गरम हुआ एक बॉयलर या रसायन का बिखर जाना ऐसी आग भड़का सकता है जो सारे उपकरण बर्बाद कर दे. ऐसी घटना होने पर बीमा कंपनी इन विशेष मशीनों की मरम्मत या उन्हें बदलने का खर्च उठाती है, जो अक्सर कई लाख रुपये का होता है. यह कवरेज फैक्ट्री मालिक को अपनी आर्थिक स्थिति पर बोझ डाले बिना उत्पादन दोबारा शुरू करने में सक्षम बनाता है, और साथ ही एक चुनौतीपूर्ण बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धात्मकता भी बनाए रखता है.
  3. इन्वेंट्री का नुकसान दिल्ली के एक छोटे इलेक्ट्रॉनिक्स थोक विक्रेता की स्थिति पर विचार करें, जो सर्किट बोर्ड और LED पैनल जैसे सारे कीमती सामान गोदाम में रखते हैं. एक दिन शॉर्ट हुए तार से लगी आग पूरे स्टॉक को जलाकर पूरी खेप नष्ट कर देती है. फायर इंश्योरेंस यह सुनिश्चित करता है कि सारा सामान नष्ट हो जाने पर भी कारोबारी हुए नुकसान की भरपाई का दावा कर सके और जल्दी से दोबारा स्टॉक भर सके, जिससे कारोबार लंबे समय तक ठप न रहे और आपूर्तिकर्ताओं की पेनल्टी से भी बचा जा सके.
  4. कारोबार की निरंतरता पुणे की एक बेकरी दुकान का उदाहरण सामने आया, जहां एक दिन ओवन की खराबी के कारण आधी रात को आग लग गई. नतीजतन, मरम्मत के दौरान तीन हफ्तों तक दुकान बंद रही। यहाँ फायर इंश्योरेंस कारोबार ठप रहने के दौरान हुए आय के नुकसान की भरपाई करके मदद करता है. इससे बेकरी दुकान बंद रहने पर भी कर्मचारियों का वेतन, किराया और आपूर्तिकर्ताओं का बकाया चुका पाती है, और कर्ज के दबाव के बिना सहजता से दोबारा खड़ी हो जाती है.
  5. अनुबंध संबंधी बाध्यताएं कई ग्राहक कारोबारियों से फायर इंश्योरेंस रखने की मांग करते हैं. उदाहरण के लिए, नोएडा के एक पैकेजिंग सप्लायर को लीजिए जो बहुराष्ट्रीय FMCG कंपनियों को सेवाएं देता है. उसके ग्राहक उससे यह कवरेज रखने की अपेक्षा करते हैं. वजह यह है कि अगर आग से आपूर्ति शृंखला प्रभावित होती है, तो बीमा कंपनी की मदद से वह सप्लायर सामान न पहुंचा पाने के कारण ग्राहकों को हुए नुकसान की आर्थिक भरपाई कर सकेगा.
  6. किरायेदार की सुरक्षा किराए की जगह पर चलने वाले MSME के साथ यह जोखिम जुड़ा रहता है कि आग लगने पर मकान मालिक की संपत्ति को नुकसान पहुंच सकता है. फायर इंश्योरेंस उन्हें ऐसे नुकसान की देनदारी से बचाता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी किरायेदार MSME के उपकरण से औद्योगिक शेड में आग लग जाती है, तो पॉलिसी मकान मालिक को ढांचे के नुकसान की भरपाई कर सकती है. यह लाभ कानूनी विवादों से बचाने में मदद करता है.
  7. कानूनी सुरक्षा आग से जटिल कानूनी मामले खड़े हो सकते हैं, खासकर तब जब आसपास के दूसरे कारोबार भी प्रभावित हों. फायर इंश्योरेंस में अक्सर लायबिलिटी कवरेज शामिल होता है, जो MSME को तीसरे पक्ष के दावों से बचाता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी वर्कशॉप की आग बगल की इकाई तक फैल जाती है, तो पॉलिसी कानूनी खर्च और मुआवजा कवर कर सकती है. इससे मुकदमेबाजी के कारण होने वाले अतिरिक्त आर्थिक नुकसान से बचाव होता है.
  8. लोन में सुविधा बैंक और ऋणदाता संस्थाएं अक्सर बीमाकृत कारोबारों को ऋण देना पसंद करती हैं. फायर इंश्योरेंस ऋणदाताओं को यह भरोसा देता है कि गिरवी रखी संपत्ति या अन्य आस्तियां नुकसान से सुरक्षित हैं.

फायर इंश्योरेंस का दावा (Claim) करने की चरणबद्ध गाइड

किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में क्लेम प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए कारोबारियों को इन 10 चरणों का पालन करना चाहिए:

चरण 1: आग पर तुरंत काबू पाएं (यदि संभव हो) और आगे नुकसान होने से रोकें. सबूतों से छेड़छाड़ न करें.

चरण 2: स्थानीय दमकल विभाग को बुलाएं और फायर ब्रिगेड रिपोर्ट प्राप्त करें, जो दावा प्रक्रिया के लिए बेहद जरूरी है.

चरण 3: पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराएं, खासकर अगर आगजनी या किसी गड़बड़ी का संदेह हो.

चरण 4: घटना के 24 घंटे के भीतर कॉल, ईमेल या कंपनी के ऐप/पोर्टल के जरिए अपनी बीमा कंपनी को सूचित करें.

चरण 5: बीमा कंपनी का फायर क्लेम इंटिमेशन फॉर्म भरें, जिसमें पॉलिसी नंबर, आग की तारीख/समय, कारण और अनुमानित नुकसान जैसी जानकारी दें.

चरण 6: सफाई या मरम्मत शुरू करने से पहले प्रभावित संपत्ति और सामान की साफ. तस्वीरें/वीडियो लें.

चरण 7: बीमा कंपनी नुकसान का आकलन करने के लिए एक लाइसेंसधारी सर्वेयर नियुक्त करेगी. माँगे गए सभी दस्तावेज उपलब्ध कराएं.

चरण 8: FIR, फायर ब्रिगेड रिपोर्ट, खरीद के बिल, स्टॉक रजिस्टर, मरम्मत के अनुमान और तस्वीरें शामिल करें.

चरण 9: नुकसान के आकलन की समीक्षा करें और आपत्ति हो तो उसे उचित कारण के साथ दर्ज कराएं.

चरण 10: मंजूरी मिलने के बाद बीमा कंपनी NEFT या चेक के जरिए दावे की राशि जारी कर देगी.


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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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