शिक्षकों के लिए ₹1.34 लाख की शुरुआती सैलरी और 36% HRA? जानें क्या हैं प्रमुख मांगें

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सांकेतिक तस्वीर (फोटो : Canva )

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8th Pay Commission : क्या सरकारी शिक्षकों की शुरुआती सैलरी ₹1.34 लाख होगी? 8वें वेतन आयोग के सामने रखी गई 36% HRA, पुरानी पेंशन और ₹50 लाख ग्रेच्युटी जैसी बड़ी मांगों का पूरा ब्यौरा.

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8th Pay Commission : दिल्ली में 28 से 30 अप्रैल तक चली बैठकों में शिक्षक संघों ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. उनका मुख्य जोर बेसिक सैलरी में भारी बढ़ोतरी और भत्तों के आधुनिकीकरण पर है.

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शुरुआती सैलरी ₹1.34 लाख का गणित

शिक्षक संघों ने मांग की है कि एंट्री-लेवल शिक्षकों (Level 6) की बेसिक सैलरी को नए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर पुनर्गठित किया जाए.

  • फिटमेंट फैक्टर: वर्तमान 2.57 के मुकाबले 2.62 से 3.83 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है.
  • सालाना वृद्धि: मांग की गई है कि हर साल सैलरी में 6-7% की बढ़ोतरी हो, ताकि महंगाई के साथ तालमेल बना रहे.
  • DA का मर्जर: एक बड़ी मांग यह है कि जैसे ही महंगाई भत्ता (DA) 50% पर पहुंचे, उसे बेसिक पे में जोड़ दिया जाए. इससे रिटायरमेंट बेनिफिट्स में भारी इजाफा होगा.

HRA और भत्तों में बड़ी छलांग

मकान किराया भत्ता (HRA) को लेकर संघों ने शहर की श्रेणियों के आधार पर नए स्लैब प्रस्तावित किए हैं:

  • नया HRA: शहरों की श्रेणी के अनुसार इसे 12%, 24% और 36% करने की मांग है (अभी यह अधिकतम 30% के आसपास है).
  • ट्रांसपोर्ट अलाउंस: इसे बेसिक सैलरी का 12-15% रखने का सुझाव है, जिसकी न्यूनतम सीमा ₹9,000 हो.
  • बच्चों की शिक्षा (CEA): बच्चों की पढ़ाई का खर्च बढ़ने के कारण इसे बढ़ाकर ₹7,000 प्रति माह प्रति बच्चा करने की मांग की गई है.

रिटायरमेंट और पेंशन पर ‘मास्टरस्ट्रोक’

शिक्षक संघों ने सेवाकाल और उसके बाद की सुरक्षा के लिए ये मांगें रखी हैं:

  • रिटायरमेंट उम्र: रिटायरमेंट की उम्र को बढ़ाकर 65 वर्ष करने का प्रस्ताव है.
  • ग्रेच्युटी: ग्रेच्युटी की वर्तमान सीमा को बढ़ाकर ₹50 लाख करने की मांग की गई है.
  • पुरानी पेंशन (OPS): NPS (नई पेंशन योजना) और UPS (एकीकृत पेंशन योजना) को हटाकर फिर से पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने पर जोर दिया गया है.

राज्यों में बैठकों का दौर

आयोग अब दिल्ली के बाद अलग-अलग राज्यों का दौरा करेगा ताकि क्षेत्रीय स्तर पर फीडबैक लिया जा सके.

हैदराबाद (18-19 मई): अगली बड़ी सुनवाई यहां होगी.
श्रीनगर और लद्दाख (जून): जून के पहले और दूसरे हफ्ते में यहाँ बैठकें प्रस्तावित हैं.

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