पीपीएफ की तरह अब एनपीएस भी होगी पूरी तरह टैक्स फ्री
Updated at : 07 Jan 2019 6:23 AM (IST)
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एनपीएस में यह बदलाव अगले वित्त वर्ष यानी एक अप्रैल 2019 से लागू होगा. अगले वित्त वर्ष से एनपीएस में निवेश पूरी तरह टैक्स फ्री होगा. इसकी वजह है कि सरकार ने नयी पेंशन स्कीम में कुछ बदलावों पर मुहर लगा दी है. इसमें एनपीएस को इइइ यानी एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट का दर्जा दिया जाना भी शामिल […]
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एनपीएस में यह बदलाव अगले वित्त वर्ष यानी एक अप्रैल 2019 से लागू होगा. अगले वित्त वर्ष से एनपीएस में निवेश पूरी तरह टैक्स फ्री होगा. इसकी वजह है कि सरकार ने नयी पेंशन स्कीम में कुछ बदलावों पर मुहर लगा दी है. इसमें एनपीएस को इइइ यानी एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट का दर्जा दिया जाना भी शामिल है. एनपीएस में होने वाला बदलाव अगले वित्त वर्ष यानी एक अप्रैल 2019 से लागू हो जायेंगे.
केंद्र सरकार की कैबिनेट की बैठक में एनपीएस को लेकर कुछ अहम फैसले किये गये हैं. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एनपीएस के तहत सरकार की ओर से दिये जाने वाले योगदान को बढ़ा कर 14 फीसदी कर दिया गया है. अब तक यह 10 फीसदी ही है. हालांकि कर्मचारियों का न्यूनतम योगदान 10 फीसदी ही रहेगा. इसके साथ ही रिटायरमेंट पर एनपीएस से की जाने वाली निकासी को भी पूरी तरह से कर मुक्त बना दिया गया है.
क्या है इइइ का दर्जा
इइइ दर्जे का अर्थ है कि उस सेविंग्स या विकल्प में लगाया जाने वाला पैसा, उससे आने वाला ब्याज और मैच्युरिटी अवधि के पूरा हो जाने पर मिलने वाली राशि, तीनों पर टैक्स नहीं लगता है. अभी तक यह यह लाभ केवल पीपीएफ में दिया जाता था.
अभी कैसे लगता है टैक्स
एनपीएस के तहत कर्मचारी रिटायरमेंट के वक्त कुल जमा राशि में से मात्र 60 फीसदी राशि ही निकाल सकता है. शेष 40 फीसदी राशि पेंशन योजना में चली जाती है.
अभी तक एनपीएस के अंशधारक को योजना में जमा राशि में से रिटायरमेंट के समय 60 फीसदी राशि की निकासी करने पर 40 फीसदी राशि ही कर मुक्त होती थी, जबकि शेष 20 फीसदी पर कर्मचारी को कर का भुगतान करना पड़ता था, लेकिन अब नये बदलावों के बाद एनपीएस से बाहर होते समय यानी रिटायरमेंट के समय निकाली जाने वाली 60 फीसदी राशि को टैक्स फ्री कर दिया गया है. इसके साथ ही एक तरह से पूरी राशि की निकासी कर मुक्त हो गयी है.
कर्मचारियों के हित में यह
केंद्र सरकार द्वारा किये गये बदलावों में सबसे अहम बदलाव है सरकार द्वारा अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाना. सरकार ने योजना के तहत अपने योगदान को बढ़ा कर 14 फीसदी कर दिया है जबकि कर्मचारियों के योगदान को पूर्व की तरह 10 फीसदी ही रखा है.
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